अनिवार्य प्रश्न
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आरटीआई का जवाब नहीं देता एआरटीओ वाराणसी

आरटीओ वाराणसी से नहीं दी जाती सूचना
आवश्यक एवं कठिन विषयों पर भी विभाग मौन
भ्रष्टाचार के लिए मशहूर विभाग आज भी है निकम्मा

अनिवार्य प्रश्न। शहर संवाददाता

वाराणसी। स्थानीय परिवहन कार्यालय से जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारियों का भी जवाब नहीं दिया जाता है। एक आरटीआई कार्यकर्ता का आरोप है कि उसके द्वारा मांगी गई सूचनाएं निश्चित समय में संबंधित विभाग नहीं दे रहा है। अंततः उसे आयोग में शिकायत करनी पड़ी।

आयोग से नोटिस जारी होने के बाद भी इस विभाग के कान पर जूं नहीं रेंग रही है। मामला भ्रष्टाचार से जुड़ा होने के कारण वह आरटीआई का भी जवाब देने से भाग रहा है।

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग का वाराणसी व चन्दौली कार्यालय हमेशा अपने भ्रष्टाचार एवं अपने यहाँ होने वाली दलाली को लेकर देशभर में चर्चा में बना रहता है। यह दोनों कार्यालय बड़े बड़े घोटालों व दलालों के बड़े-बड़े कारनामों के लिए जाना जाता रहा है। यहां तक कि चन्दौली का एक एआरटीओ आर.एस यादव अभी निलंबित चल रहा है और उसको सजा होने के आसार दिख रहे हैं।

एक आरटीआई एक्टिविस्ट का कहना है की वाराणसी परिक्षेत्र में संचालित मोटर ट्रेनिंग सेंटरों, लाइसेंस एवं आवंटित लाइसेंस के विवरण और मोटर ट्रेनिंग सेंटर खोलने से संबंधित जानकारी को लेकर सूचना मांगी गई थी। पर विभाग जानकारी देने से बच रहा है, वाराणसी जोन में बहुत सारे मोटर ट्रेनिंग सेंटर मानकों के विरुद्ध भी कमीशन देकर चलाए जा रहे हैं।

जानकारों की माने तो ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने से लेकर मोटर ट्रेनिंग सेंटर चलाने में भारी गोलमाल होता है। वैसे तो यह विभाग जनता की आवश्यक सेवाओं से जुड़ा हुआ है लेकिन इसके बाद भी भ्रष्टाचार ही इसके हाथ पाव हैं।

वर्तमान भाजपा सरकार में बहुत एहतियात बरतने के पश्चात भी आज तक परिवहन विभाग से भ्रष्टाचार समाप्त नहीं हो सका है। विगत दिनों राज्य सूचना आयोग नेे विभाग को एक नोटिस जारी कर तलब किया था। बावजूद इसके सूचना अधिकारी आयेग कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए। न्यायालय ने उन्हें दूसरी नोटिस जारी कर तलब किया है। आगे संभावना है कि एआरटीओ वाराणसी को न्यायालयी दंड का सामना करना पड़े।


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