अनिवार्य प्रश्न
datu theka

मन्दिरों के पास ही क्यों खुलतें हैं मैखाने

बार-बार नागरिकों को क्यों करना पड़ता है विरोध
पुण्य नगरी काशी में क्यों सोए रहते हैं अधिकारी ?


वाराणसी। यहाँ जिस तरह से अल्हड़ता की संस्कृति पुरानी रही है उसी प्रकार से मन्दिरों के पास खुलने वाले मैखानों (शराब की दुकानें) का विवाद भी प्राचीन रहा। यहाँ अकर्मण्य व बेपरवाह प्रशासनिक कार्यो का नजारा हमेशा उजागर होता रहा है। अभी हाल में ही एक और मन्दिर से सटकर शराब की दुकान खोलने का मामला प्रकाश में आया है। नगर के भदऊ चुंगी राजघट स्थित प्राचीन पंचमुखी हनुमान मन्दिर से सटे मकान में शराब की दुकान खोल दी गई है। इस दुकान का अनुज्ञापी मंगला प्रसाद है।

शराब की दुकान खुलते ही भीड़ लगनी शुरू हो जाने से स्थानीय लोगो में भय का माहौल बन गया है। वहीं धार्मिक अधिकारों के लिए काम करने वाले एक संगठन विश्व सनातन सेना ने इसे तत्काल हटाने की चेतावनी दी है।

स्थानीय अधिकारियों को एवं प्रेस को संबोधित एक नोट में संगठन ने कहा है कि शराब खाने के खुल जाने से क्षेत्रीय साधु प्रवृत्ति के लोगों को पूजा-पाठ व आवागमन में परेशानी होती है। विश्व सनातन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल सिंह एंव प्रदेश प्रचारक विष्णु स्वरूप त्रिपाठी व पूजा जायसवाल का कहना है कि यहाँ के प्रशासनिक अधिकारी लोगों की धार्मिक भावनाओं को भी बचा नहीं पाते। बुराई कहीं भी की जाए इनको परवाह नहीं है। इनको परवाह सिर्फ घूस और तनख्वाह की है।

सम्बन्धित मैखाने को अगर जल्दी हटाया नहीं गया तो हमारा संगठन आन्दोलन को मजबूर हो जायेगा। हम जान लड़ा देंगे लेकिन धर्म और उससे जुड़े लोंगो की आस्था खतरे में नहीं पड़ने देंगे।

बनारस में हांलाकि यह कोई नई घटना नहीं हैं, ऐसी अनेकों घटनाएँ हुई हैं जिसमें लोगों की भावनाएँ आहत होती हैं। शराब की दुकानों के विरोध में कई बार महिलाओं तक को सड़क पर आना पड़ा है। बावजूद इसके शासन व प्रशासन द्वारा इस समस्या के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता है। काशी धर्म के लिए पावन भूमि है।

प्रशासन की वजह से यहाँ यहीं के लोगों द्वारा सबके धार्मिक भाववनाओं को ठेंस पहँुचाई जाती है। भोजूबीर से पाण्डेयपुर मार्ग पर सम्मो माता मन्दिर के पास मुर्गे की दुकान प्रशासन की आखों के सामने लगती है। बड़े हनुमान जी मन्दिर के सामने पाण्डेयपुर देशी दारू की दुकान व माॅडल शाॅप खोला गया है। अर्दली बाजार के पास महाबीर मन्दिर जो अति प्राचीन है के पास भी देशी शराब की दुकान है। मड़ुवाडीह से डीएलडब्लू रोड पर श्री राम नगर कालोनी में भी कई अनियमिताओं में कारवास काट रहे अनुज्ञापी विजय जायसवाल की या उनके सम्बंधी की शराब की दुकान है।

चिंतनीय है कि प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र होने के बाद भी काशी प्रशासन चेता नहीं। आज भी इस धर्म नगरी में पाप कर्म होते हैं। अनिवार्य प्रश्न यह है कि मन्दिरों के पास ही क्यों खुलते हैं मैखानें ?


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