अनिवार्य प्रश्न
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रंगमंच पर अपने पद चिन्हों से….. रच रहे इतिहास।

वाराणसी की मंचदूतम नाट्य संस्था अपनी कला
से देश के कोने कोने से बटोर रही उपलब्धियां
दो वर्ष के दौरान उड़ीसा, आसाम, आगरा और भागलपुर में
नाट्य मंचन कर लगाया पुरस्कारों का अंबार

मोनेश श्रीवास्तव। सहायक संपादक

दुनिया एक रंगमंच है और हम सब इसके कलाकार। हर इंसान अपने-अपने हिस्से का किरदार अदा करने आता है और उसे निभाकर रुख़सत हो जाता है। प्राकृतिक रंगमंच (दुनिया) से अलग अभिनय की एक अनोखा संसार भी है जो नाट्य शास्त्र पर आधारित है। भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न अंग होने के बावजूद इसकी अनदेखी होती रही है। इसी नाट्य शास्त्र पर आधारित अभिनय व कला की एक और दुनिया है जिसे हम सिनेमा कहते हैं। बड़े पर्दे पर दिखने वाले अदाकार इसी शास्त्र के पात्र हैं पर उनकी नजरों को रंगमंच शायद कम भाता है। लेकिन ‘रंगमंच’ के लिए समर्पित कला के दिवानों की कमी नहीं है, जो रंगमंच पर एक बार अपने कदम रखते हैं वह उसे जीने लगते हैं। रंगमंच अभिनय से जुड़ने का वह मार्ग है जो स्वयं में एक मंजिल के समान है। इन्हीं राहों से गुजरते हुए अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे है मंच के कुछ ऐसे ही दूत। काशी आध्यात्म और संस्कृति के लिए खूब जानी जाती है इसके साथ ही साथ यह शहर अपनी अन्य कलाओं के लिए भी पहचाना जाता है। काशी में नाट्य कला के कलाकारों की भरमार है, कुछ लोगों ने बड़े कीर्तिमान भी स्थापित किये हैं। कुछ लोग नये इतिहास गणने की ओर अग्रसर भी हैं। काशी की एक ऐसी ही नाट्य संस्था, जिसका नाम ही मंचदूतम् है, वह नाट्य-कला को अपने अभिनय से पूरे भारत में रोशन करने में जुटी हुई है। जिसने नवांकुरों के साथ अपनी एक छोटी सी टोली लेकर पिछले कुछ वर्षों के दौरान ऐसी प्रतिभा दिखायी है कि सम्मान और पुरस्कारों से इसकी झोली भरने लगी है।

‘मंचदूतम्’ नाट्य संस्था के प्रणेता अजय रोशन जो करीब दो दशक से अभिनय से जुड़े हुए हैं, उन्होंने कुछ खास मकसद से दो वर्ष पूर्व ‘मंचदूतम्’ नाट्य संस्था की नींव रखी। अपने संघर्ष भरे जीवन में उन्होंने इस संस्था को जब शुरू किया तब उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि वह भारत की सर्वश्रेष्ठ नाट्य कला संस्था की कुछ चुनिंदा टीमों में शामिल हो जाएगी।

मंचदूतम ने उड़ीसा, आसाम, भागलपुर और आगरा में अपने अभिनय का लोहा मनवाया और दोनों जगहों से लगभग डेढ़ दर्जन पुरस्कार और सम्मान प्राप्त किये। आगरा में संस्कार भारतीय नाट्य केंद्र की ओर से आयोजित 15वीं राष्ट्रीय नाट्य नृत्य महोत्सव ‘रंगोदय 2018’ में सर्वश्रेष्ठ कहानी समेत द्वितीय सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, अभिनेत्री, नाटक का पुरस्कार मिला। साथ ही नुक्कड नाटक के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, अभिनेत्री, निर्देशक, बाल कलाकार समेत नौ पुरस्कार हासिल किये। इसके साथ ही संस्कार भारती की ओर से कलाकार अजय रोशन और ज्योति को विषेश सम्मान से सम्मानित किया गया।

उड़ीसा में आयोजित राष्ट्रीय नाट मेला में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, व निर्देशन अजय रौशन, सर्वश्रेष्ट अभिनेत्री ज्योति, सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता अमरेश, सर्वश्रेष्ठ चरित्र अभिनेता सत्यप्रकाश, सर्वश्रेष्ट संगीत नीरज पाण्डेय, सर्वश्रेष्ठ प्रोडक्शन, सर्वश्रेष्ट द्वितीय अभिनेत्री प्रशी शर्मा एवं सर्वश्रेष्ठ नुक्कड़ नाटक का पुरस्कार हासिल किया।

साथ ही जिन कलाकारों ने शिरकत की उनमें गोपाल पटेल, राहुल शर्मा, रजत यादव, सविता नन्दन तिवारी आदि ने अपनी कला को प्रदर्शित किया।

नाटकों को कब मिलेगा वाजिब सम्मान
नाट्य विधा आज के दौर की सबसे कठिन विधाओं में एक मानी जाती है। इस विधा से जुड़े रंग कर्मियों को समाज की तमाम दुश्वारियों का सामना करते हुए आगे बढ़ना पड़ता है। आज भी नाट्य विधा को वो सम्मान हासिल नहीं है जो उसे मिलना चाहिए। ये विधा महाभारत के भीष्मपितामह की तरह बाणों से भेदी हुई सरसैया पर लेटी अंतिम सांस गिन रही है। लेकिन अभी भी कुछ लोग हैं जो इस विधा को एक साधना के तौर पर जीवंत रखे हुए हैं। मैंने भी अपने अभिनय की दो दशक की साधना के दौरान जो कुछ हासिल किया उसे अपनी संस्था ‘मंचदूतम्’ के माध्यम से लोगों के बीच रखने की कोशिश में जुटा हुआ हूँ। रंगमंच की बारीकियों को अपने नवांकुरों को खाद के रूप में दे रहा हूँ, जो आने वाले समय में एक विशाल वट वृक्ष बनेंगे। दो वर्ष पूर्व मैंने ‘मंचदूतम्’ की नीव रखी और आज देश के कई प्रांतों में आयोजित नाट्य प्रतियोगिताओं एवं नाट्य महोत्सवों का आमंत्रण मिल रहा है। यह एक सुखद अनुभूति है कि हमें अपनी कला व कौशल को प्रदर्शित करने के लिए जिस मंच की तलाश थी आज वह तलाश निरंतर पूरी होती जा रही है।


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