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स्वस्थ हृदय और आयुर्वेद जड़ी बूटियां दूर कर सकती हैं देह की हर बीमारी, हृदय के लिए भी है इनका विशेष फायदा

डा. साक्षी मिश्रा
वाराणसी
लेखिका डी.फार्मा ;आयुर्वेदद्ध लखनऊ विश्वविद्यालय
एवं बी.ए.एम.एस ;प्रशिक्षुद्ध हैं


हृदय हमारे शरीर का एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है, जो लगातार काम करता रहता है, इसलिए हमारे लिए इसे स्वस्थ रखना भी जरूरी होता है। आज-कल का रहन-सहन और गलत खान-पान हमारे हृदय को कई तरह से नुकसान पहँुचाता है, और इससे जुड़ी हुई समस्यायें बहुत ही आम होती जा रही हैं, इसमें दिल का दौरा, सीने में दर्द (एनजाइना), उच्च एवं निम्न रक्तचाप आदि प्रमुख कही जा सकती हैं। हृदय रोग सामान्यतः उन स्थितियों को सन्दर्भित करता है, जिनमें संकुचित या अवरुद्ध रक्त वाहिनियाँ होती हैं या इनमें खून के थक्के जम जाते हैं। आइए विस्तार से हृदयरोग के लक्षण एवं उसके बचाव के उपायों को समझते हैं-

हृदय से सम्बन्धित बिमारियों के लक्षण

अगर आप किसी भी घातक स्थिति से बचना चाहते हंै, तो सबसे पहले यदि आप किसी भी बिमारी के लक्षण को जान लेगें तो खतरा कम हो सकता है या टल भी सकता है

1-उच्च रक्तचापः- अगर सिस्टोलिक रक्तचाप (उच्चतम) 100-140 है तो सामान्य है इसके अधिक है तो यह उच्च रक्तचाप होता है। इसके शुरुआती लक्षणों के बारे में बात करें तो इसमें व्यक्ति के सिर के पीछे और गर्दन में दर्द रहता है, इस तरह की परेशानी हो तो इसे नजरअंदाज न करें।


1-उच्च रक्तचाप के लक्षणों में सिर चकराना एक आम समस्या है।

2-यदि आप को बहुत जल्दी गुस्सा आता हो, तनाव महसूस होता हो तो यह भी इसी का कारण हो सकता है।

3-अनिंद्रा (नींद न आना), थकान होना, हृदय की धड़कन का बढ़ जाना तथा दर्द महसूस होना आदि।

2-निम्न रक्तचापः- यदि आपका ब्लड प्रेषर 90/60 या उससे भी कम है तो ये निम्न रक्तचाप है, इसके लक्षणों में चक्कर आना, कमजोरी लगना, थकान, तेज सासें, धुंधला दिखायी देना, अत्यधिक प्यास लगना आदि होता है।

3-हार्ट अटैक- आप हार्ट अटैक के शिकार कभी भी या अचानक से हो सकते है, लेकिन कई बार कुछ दिनों पहले से कुछ लक्षण नजर आने लगते है, इन पर ध्यान देना जरुरी होता है जैसे कि-

4-सीने में दबाव, जलन या कुछ असहजता का अनुभव होना।

5-पैर के पंजे, टखने और अन्य हिस्सों में सूजन।

6-थकान, चक्कर आना , साँस लेने में दिक्कत, लम्बे समय तक सर्दी बने रहना तथा बलगम आना आदि।

7-एनजाइनाः-इसके लक्षणों में बेचैनी, छाती में दर्द, जलन, सीने में भारीपन महसूस होना, जकड़न तथा कभी-कभी इसका दर्द छाती के साथ-साथ कंधे, हाथ, गर्दन, जबड़े, गले के पीछे तक फैल जाता है।


आयुर्वेदिक औषधियाँः-

1-अर्जुन की छालः- 2 चम्मच अर्जुन की छाल को 1 गिलास गर्म पानी में डालकर आधा होने तक उबालें फिर ठंडा होने पर खाली पेट ही पियें।

2-लौकी का जूसः- इसे भी आप खाली पेट ही या नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते है।

3-अलसी के बीजः- अलसी में ओमेगा-3 फैटी एसिड की अधिकता होती है, इसके इस्तेमाल से हदय स्वस्थ रहता है।

4-दालचीनीः- यह हमारे शरीर में उपस्थित कोलेस्ट्राल को कम करता है, अतः इसका नियमित प्रयोग करें।

5-लहसुनः- इसके नियमित प्रयोग से कोलेस्ट्राल नियंत्रित रहता है।

6-इलायची- इसका प्रयोग उच्चरक्तचाप के लिए अच्छा है।


हृदय को स्वस्थ रखने के सामान्य उपायः-

1-स्वस्थ हृदय में आहार बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, ऐसा आहार लें जिसमें फैट की मा़त्रा कम अथवा संतुलित हो।

2-अलकोहल का इस्तेमाल न करें।

3-सिगरेट, तम्बाकू, पान व मसाला आदि का सेवन बिल्कुल भी न करें।

4-अपने जीवन शैली में सकारात्मक परिवर्तन लायें।

5-योगासनः- धनुषासन, भुजंगासन, त्रिकोणासन, सेतुबंधासन व दंडासन इन सभी योगमुद्राओं के साथ शवासन भी काफी लाभदायक हैं। इनसे शरीर को आराम मिलता है।
इन सभी के साथ-साथ जो हमारे आयुर्वेद का प्रयोजन है-
‘‘स्वस्थ स्वास्थ्यरक्षणं आतुरस्य विकारप्रशमनं च।’’ अर्थात स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना और रोगी के विकारों को शान्त करना जैसे सिद्धांत का पालन करते हुए हमें अपने स्वास्थ की रक्षा खुद करनी चाहिए।


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