अनिवार्य प्रश्न
Chandauli DM Do not see WhatsApp message, then why is WhatsApp installed on their number

चन्दौली के डी.एम. नहीं देखते व्हाट्सएप संदेश, तो फिर क्यों इंस्टाल है उनके नम्बर पर व्हाट्सएप


अनिवार्य प्रश्न। ब्यूरो संवाद


चंदौली। स्थानीय जिला अधिकारी का व्हाट्सएप नंबर चलता तो है पर उस पर कोई संदेश देखा नहीं जाता। केंद्र और राज्य सरकार ने जहां जनता से जुड़ने के लिए सोशल मीडिया व डिजिटल माध्यम का सहारा ले रही है वहीं जनपद का सुन्न व बेहोश प्रशासन अभी तक सुस्त और सोया हुआ ही है। वैसे तो जनपद के जिला अधिकारी का नंबर 9454417576 व्हाट्सएप पर सक्रिय है, उसपर उनकी डी.पी. भी लगी है और डाटा सेवा ऑन होने से संदेश की डिलीवरी भी होती है लेकिन संदेश पढ़ा नहीं जाता है। हांलांकि किसको जनता के द्वारा भेजे गए संदेशों के फिक्र है, साहब तो डीएम हैं वह किसी का संदेश क्यों देखेंगे?

आम लोगों द्वारा भेजी गई सूचना पर जब अनिवार्य प्रश्न समाचार समूह ने भी संदेश भेजा तो संदेश डिलीवर तो मगर काफी दिनों तक हुआ पर पढ़ा नहीं गया। संभवतः उनके नंबर पर किसी का भी डिलीवर संदेश देखा नहीं जाता। हो सकता है किसी विभाग का या किसी अधिकारी का देखा भी जाता हो पर आम आदमी के नंबरों से भेजे गए संदेश को पढ़ा नहीं जाता।

पिछले दिनों कई बार मुख्यमंत्री योगी एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने कई आदेशों के क्रियांवयन की मंशा में यह कहा गया है कि सभी जिला अधिकारी अपने व्हाट्सएप पर अपने मोबाइल को संदेश सेवाओं के लिए ऑन रखें ताकि आम आदमी अगर व्यवस्था से असंतुष्ट हो या उसकी अपनी निजी कोई शिकायत हो तो वह सीधे जिलाधिकारियों से साझा कर सके। लेकिन चंदौली जिला अधिकारी जनपद के प्रकाशित समाचारों व विसंगतियों अथवा संबंधित शिकायतें व उससे जुड़े समाचार प्रकाशित कर भेजने के बाद भी शायद उसे पढ़ने की जरुरत नहीं समझते हैं। उल्लेखनीय है कि चन्दौली के वर्तमान जिलाधिकारी आईएएस संजीव सिंह हैं। प्रशासनिक महकमें में उन्हें एक युवा, उर्जावान और सक्रिय अधिकारी के रुप में जाना जाता है।

यहां अनिवार्य प्रश्न है कि जब मीडिया समूहों द्वारा भेजा गया समाचार, विषय प्रकाशन व शिकायतें नहीं देखी जातीं तो आम आदमी की प्रार्थना कैसे देखी या पढ़ी जाती होगी। ऐसे में जिलाधिकारी के उस नंबर पर व्हाट्सएप बनाया ही क्यों गया है। क्या सिर्फ मुख्यालयों के दबाव और खानापूर्ति के लिए व्हाट्सएप इंस्टाल किया गया है। या उसका कोई और औचित्य है?

अनिवार्य प्रश्न यह भी है कि आखिर यह नंबर चलाता कौन है? अगर डीएम साहब का नियुक्त कोई पीआरओ चलाता है तो क्या उनके नंबर पर आए विभिन्न संदेशों को अवॉयड करता है या सिर्फ अपने चिर परिचितों का ही संदेश पढ़ता और उसका जवाब देता है? आम आदमी ऐसे अनेक सवालों को लेकर खड़ा है। अपनी हजारों पीड़ायें साहब डीएम से उक्त व्हाट्सएप नम्बर और इस सरल माध्यम से साझा करना चाहता है, लेकिन हाय, सरकार तो हमारी जरूर है पर आज भी चलती अंग्रेजी प्रणाली से ही है। जनता समाज के भरोसे जीती आई है और समाज के भरोसे जीती रहेगी। सरकारें जो करती आईं हैं सरकारें वही करती रहेंगी। ऐसे में एक अनिवार्य प्रश्न यह है कि यह प्रशासन किसका है और किस लिए है? ये सरकारी लोग कौन हैं? क्या कर रहे हैं और किसके लिए हैं? आखिर आम आदमी अपनी बात इन तक कैसे पहुँचाए?

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