अनिवार्य प्रश्न
Corruption dominates wheat procurement in Chandauli, Menth and Palledar become center in-charge, 30 rupees quintal is taken.

चंदौली में गेहूं खरीद में हावी भ्रष्टाचारी, मेंठ व पल्लेदार बनते हैं केंद्र प्रभारी, 30 रुपये क्विंटल ली जाती है पल्लेदारी


अनिवार्य प्रश्न । ब्यूरो संवाद


चंदौली। बारिस झूम कर आने ही वाली है और धान का बीज भी अब रोपे जाने का समय नजदीक आ गया है। ऐसे में पूरी गर्मी समाप्त हो जाने के बाद भी जनपद में किसानों के गेहूं की खरीद पर्याप्त नहीं हो पाई है। जितने क्विंटल का किसान अपना पंजीयन टोकन लेकर आते हैं मौके पर गेहूं लाने पर उसकी आधी खरीद की रही है। उक्त भ्रष्टाचार का मामला चन्दौली जनपद में लीलापुर स्थित नवीन मंडी का है। यहां कुल चार क्रय केन्द्र खोले गए हैं। जिसका एक केन्द्र प्रभारी प्रदीप पाण्डेय है, जो हर समय कार्यलय से गायब मिलता है। ऐसा सिर्फ किसानों का ही कहना नहीं हैं यह स्थानीय ए.डीएम प्रशासन चन्दौली अतुल कुमार अपनी कई निरीक्षणों के बाद कह रहे हैं।

उत्तर प्रदेश राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार द्वारा की गई तमाम घोषणाओं के बाद भी जनपद का हाल जैसा का तैसा है। वैसे तो सरकार घोषणा कर रही है कि पिछली बार की अपेक्षा इस बार अब-तक लगभग 13 प्रतिशत अधिक मात्रा में गेहूं की खरीद की गई है, लेकिन यहां सच्चाई कुछ और ही है। जिले के किसान अपने गेहूं को लेकर दर-दर भटक रहे हैं और उनकी उपज की मानक भर भी खरीद नहीं हो पा रही है। किसानो का ही नहीं स्थानीय अधिकारी भी ये कह रहे हैं कि सेंटर प्रभारी ड्यूटी पर नहीं मिलता है। हर दम गायब रहता है।

किसानों के अनुसार वहां के पल्लेदार और मेठ इंचार्ज बनकर बैठे मिलते हैं। जिन किसानों के 100 क्वींटल उपज खरीद का पंजीकरण हुआ है उनकी 50 क्वींटल खरीद की जा रही है। और किसानों को झूठ बताया जा रहा है कि 25 मई से 30 मई की तारीख के बीच इतनी ही खरीद करने के लिए उ.प्र. प्रदेश सरकार का एक शासनादेश आया है।

स्थानीय विधायक साधना सिंह जब औचक निरीक्षण के लिए नवीन मण्डी पहुंचीं तो घटनास्थल पर आए क्षेत्र के एडीएम प्रशासन अतुल कुमार वाराणसी कमिश्नर से वार्तालाप के समय हांफते दिखे। साथ ही सूखे गले से विधायक साधना सिंह से सफाई देते दिखे। विधायक ने विधानसभा क्षेत्र एवं समूचे जनपद में गेहूं खरीद के लिए और सेंटर खोलने, कांटा बढाने एवं सेमरा रामनगर के क्रय केन्द्र को ग्रामीण क्षेत्र में स्थानान्तरित करने की मांग की। साथ ही आयुक्त वाराणसी से खरीद व्यवस्था को ठीक करने के लिए अनुरोध किया है।

अनिवार्य प्रश्न यह है कि इतने वादों के बाद भी सरकारों के दावों और और राज्य सरकार के गेहूं खरीदी व्यवस्था सुदृढ़ करने के तमाम आश्वासन के बाद भी जिले के अधिकारी गैरजिम्मेवार, सुन्न और सुस्त क्यों है? यहां तक कि सैयदराजा-बरहनी के अनेक किसानों ने आंदोलन भी किया उसके बाद भी इन भ्रष्टाचारियों का ध्यान मेहनत कर जीने वाले कृषकों की संवेदना के ऊपर व उनकी पीड़ा पर क्यों नहीं जा रहा?

यही चंदौली जनपद की सबसे बड़ी समस्या रही है और यही चंदौली के लिए सबसे बड़ा चिंतन का विषय रहा है। जब यहां लापरवाह व भ्रष्ट अधिकारियों के लिए तत्काल कठोर दंडात्मक कार्यवाही की व्यवस्था किया जाएगा और किसानों से भ्रष्टाचार को गंभीरता से लिया जाएगा तभी यहां के किसानों का दुख दूर हो पाएगा।

जनपद के लगभग सभी सेन्टर प्रभारी गेहूं खरीद के लिए बनाए गए सेंटरों से लापता रहते हैं। यहां मानक से कम खरीद की जाती है। खरीद केद्रों पर कई और तरह का भ्रष्टाचार भी छाया हुआ है। सरकार द्वारा निर्धारित 6.12 रुपये की जगह 30 रुपये पल्लेदारी ली जाती है। लाचार हो गया किसान खून के आंसू रोने को मजबूर है। पसीने से पैदा करने वाले व देश की भूख मिटाने वाले किसानो का आत्मबल अब टूट रहा है। पर बेशर्म सरकारी अधिकारी राक्षसों का सलूक कर रहे हैं।

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