अनिवार्य प्रश्न
E-Launch of 'National Portal for Transgender People', e-inauguration of a shelter site, dignity home

‘ट्रांसजेंडर लोगों के लिए नेशनल पोर्टल’ का ई-शुभारंभ, एक आश्रय स्थल, गरिमा गृह का ई-उद्घाटन


अनिवार्य प्रश्न। संवाद


नई दिल्ली। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने ‘ट्रांसजेंडर लोगों के लिए राष्ट्रीय पोर्टल’ लॉन्च किया और गुजरात के वडोदरा में आज एक ‘गरिमा गृह : ए शेल्टर होम फॉर ट्रांसजेंडर पर्सन्स’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर केन्द्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री  कृष्णपाल गुर्जर, रामदास अठावले, रतन लाल कटारिया, ट्रांसजेंडर राष्ट्रीय परिषद के सदस्य लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी और सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के सचिव आर सुब्रह्मण्यम उपस्थित थे।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए श्री गहलोत ने कहा कि 29 सितंबर 2020 को  ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) नियम 2020 की अधिसूचना के दो महीने के भीतर ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए यह राष्ट्रीय पोर्टल विकसित किया गया है। यह अत्यधिक उपयोगी पोर्टल देश में कहीं से भी एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति को प्रमाण पत्र और पहचान पत्र के लिए डिजिटल रूप से आवेदन करने में मदद करेगा। मंत्री ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि यह ट्रांसजेंडर व्यक्ति को किसी भी भौतिक इंटरफेस के बिना और किसी भी कार्यालय जाए बिना आई-कार्ड प्राप्त करने में मदद करता है। पोर्टल के माध्यम से, वे अपने आवेदन की स्थिति की निगरानी कर सकते हैं जो प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करता है। जारी करने वाले अधिकारी भी आवेदनों को संसाधित करने और बिना किसी आवश्यक देरी के प्रमाण पत्र और पहचान पत्र जारी करने के लिए सख्त समय-सीमा के तहत आते हैं। एक बार प्रमाण पत्र और आई-कार्ड जारी होने के बाद, आवेदक उन्हें पोर्टल से ही डाउनलोड कर सकते हैं। देरी या अस्वीकृति के मामले में, आवेदक के पास पोर्टल के माध्यम से शिकायत करने का विकल्प होता है जो संबंधित व्यक्ति को भेज दिए जाते हैं और जल्द से जल्द हल हो जाएंगे। जारी किए गए डैशबोर्ड के माध्यम से जारी करने वाले प्राधिकारी उन्हें प्राप्त आवेदनों की संख्या, स्वीकृत किए गए आवेदनों और लंबित या रखे गए आवेदनों को देख सकते हैं ताकि वे अपनी ओर से आवश्यक आवश्यक कार्रवाई कर सकें। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पोर्टल समुदाय के बहुत से लोगों को आगे आने में मदद करेगा और उनकी स्वयं की कथित पहचान के अनुसार ट्रांसजेंडर प्रमाणपत्र और पहचान पत्र प्राप्त करेगा जो कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 का एक महत्वपूर्ण प्रावधान है।

श्री गहलोत ने कहा कि ‘गुजरात के वडोदरा में आज ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए एक आश्रय स्थल गरिमा गृह का उद्घाटन किया गया है, जो लक्ष्मण ट्रस्ट के सहयोग से चलाया जाएगा जो पूरी तरह से ट्रांसजेंडरों द्वारा संचालित एक समुदाय आधारित संगठन है। आश्रय स्थल का उद्देश्य ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को आश्रय प्रदान करना है, जिसमें आश्रय, भोजन, चिकित्सा देखभाल और मनोरंजन जैसी बुनियादी सुविधाएं हैं। इसके अलावा, यह समुदाय में व्यक्तियों के क्षमता-निर्माण/कौशल विकास के लिए सहायता प्रदान करेगा जो उन्हें सम्मान और सम्मान का जीवन जीने में सक्षम बनायेगा।

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‘ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए आश्रय गृह’ की योजना में आश्रय सुविधा, भोजन, कपड़े, मनोरंजन सुविधाएं, कौशल विकास के अवसर, योग, ध्यान/प्रार्थना, शारीरिक फिटनेस, पुस्तकालय सुविधाएं, कानूनी सहायता, लिंग परिवर्तन और सर्जरी के लिए तकनीकी सलाह, ट्रांस-फ्रेंडली संगठनों के लिए क्षमता निर्माण, रोजगार और कौशल-निर्माण सहायता, आदि शामिल हैं। नोडल मंत्रालय ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की स्थितियों में सुधार करने के लिए पहला कदम उठाया है और प्रायोगिक आधार पर देश में चयनित 13 सीबीओ के सहयोग से 13 शेल्टर होम्स स्थापित करने और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए सुविधाओं का विस्तार करने के लिए 10 शहरों की पहचान की है। शहरों में वडोदरा, नई दिल्ली, पटना, भुवनेश्वर, जयपुर, कोलकाता, मणिपुर, चेन्नई, रायपुर, मुंबई आदि शामिल हैं। यह योजना मंत्रालय द्वारा चिन्हित प्रत्येक घरों में न्यूनतम 25 ट्रांसजेंडर व्यक्तियों का पुनर्वास करेगी। यह एक पायलट प्रोजेक्ट है और इसके सफल होने पर देश के अन्य हिस्सों में इसी तरह की योजनाओं को विस्तार दिया जाएगा।

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