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Ministry of Culture will celebrate 'Sankalp Parv'

संस्कृति मंत्रालय मनाएगा ‘संकल्प पर्व’


अनिवार्य प्रश्न । संवाद


दिल्ली।  वातावरण अथवा परिवेश सुनिश्चित किया जा सके। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रह्लाद सिंह पटेल ने आज ‘संकल्प पर्व’ का सफल आयोजन करने और हमारे प्रधानमंत्री की इच्छा के अनुरूप ही पेड़ लगाने का आह्वान किया।

श्री पटेल ने बताया कि संस्कृति मंत्रालय ने 28 जून से 12 जुलाई 2020 तक संकल्प पर्व मनाने का निर्णय लिया है। मंत्रालय यह अपेक्षा रखता है कि इस दौरान उसके सभी अधीनस्थ कार्यालय, अकादमी, संलग्न संस्थान, संबद्ध संस्थान अपने-अपने परिसरों में या उसके आसपास ही जहां भी संभव हो वहां अवश्‍य ही पेड़ लगाएंगे। उन्होंने कहा कि संस्कृति मंत्रालय द्वारा उन पांच पेड़ों को लगाए जाने को प्राथमिकता दे रहा है जिन्हें हमारे प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया है और जो हमारे देश की हर्बल विरासत का सटीक प्रतिनिधित्व करते हैं। ये पेड़ हैं – (i) ‘बरगद’ (ii) ‘आंवला’ (iii) ‘पीपल’ (iv) ‘अशोक’ (v) ‘बेल’। उन्होंने आगे कहा कि यदि इन वृक्षों का पौधा उपलब्ध नहीं है तो लोग अपनी पसंद के किसी अन्य पौधे का पौधारोपण कर सकते हैं।

श्री पटेल ने यह भी कहा कि मंत्रालय से संबंधित संगठनों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रधानमंत्री द्वारा बताए गए इन पांच पेड़ों को लगाने के अलावा प्रत्येक कर्मचारी अपनी पसंद का भी कम से कम एक पेड़ अवश्‍य लगाए। संस्थानों को इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि कर्मचारी अवश्‍य ही पूरे साल अपने द्वारा लगाए गए पौधे की देखभाल करे, ताकि वह सदैव सुरक्षित और फलता-फूलता रहे।

श्री पटेल ने सभी से संकल्प पत्र में भाग लेने और #संकल्पपर्व #SankalpParv के साथ पौधरोपण की फोटो को संस्कृति मंत्रालय के साथ साझा करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि मानसून के मौसम का आगमन हो चुका है जो वृक्षारोपण या पेड़ लगाने के लिए बिल्‍कुल सही समय है। हम सभी इस महामारी के दौरान स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण के विशेष महत्व से रू-ब-रू हो चुके हैं और हमें अपनी हर्बल संपदा पर काफी गर्व है जिसमें इतनी क्षमता है कि इसकी बदौलत हम महामारी के इस संकट काल में अपने जीवन को निरंतर सुरक्षित रख सकते हैं। मैं सभी से इस संकल्प पर्व में भाग लेने और कम से कम एक पौधा लगाने तथा उसकी निरंतर देखभाल करने का अनुरोध करता हूं, ताकि हम स्वस्थ पर्यावरण या परिवेश और समृद्ध ‘भारत’ का निर्माण कर सकें।

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