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'Namami Gange' project boosts local economy; Prestigious 'Prime Minister's Award for Excellence in Public Administration 2020'

‘नमामि गंगे’ परियोजना से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा; प्रतिष्ठित ‘लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार 2020’ में शामिल


अनिवार्य प्रश्न । संवाद


नई दिल्ली। इस वर्ष नमामि गंगे परियोजना को प्रतिष्ठित ‘लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार 2020’ में शामिल किया गया है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी)  के महानिदेशक श्री राजीव रंजन मिश्रा  ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उत्तर प्रदेश के जिलाधिकारियों (डीएम) और जिला गंगा समितियों से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत करने के दौरान उनसे इस वर्ष के ‘लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार’ के लिए अपना नामांकन प्रस्तुत करने को कहा। श्री राजीव रंजन मिश्रा  ने कहा, ‘यह उत्तर प्रदेश के लिए गंगा में स्वच्छता की उपलब्धि को प्रस्तुत करने का एक अच्छा अवसर है, यह देश भर में नदी में स्वच्छता से जुड़े कार्य को प्रोत्साहित करेगा।’ उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की 26 जिला गंगा समितियों के ठोस प्रयासों से आर्थिक गतिविधियों को भी काफी बढ़ावा मिल रहा है। ये समितियां गंगा की स्वच्छता और कायाकल्प के लिए स्थानीय निवासियों के सहयोग से जिला स्तर पर काम करती हैं। इनके गठन के बाद गंगा की स्वच्छता और कायाकल्प से जुड़े प्रयासों में व्‍यापक बदलाव आया है। यही नहीं, गंगा के किनारे जैविक खेती और जैविक विविधता के विकास से स्थानीय स्तर पर रोजगार के साधन बढ़ेंगे।

 

श्री मिश्रा के अनुसार, नमामि गंगे की विभिन्न इकाइयां (यूनिट) यहां तक कि लॉकडाउन के दौरान भी निरंतर कार्यरत रहीं, जिसके परिणाम उम्मीद से कहीं बेहतर रहे हैं। उत्तर प्रदेश की जिला गंगा समितियों के साथ बैठकों की एक श्रृंखला को सक्रियतापूर्वक पूरा करने के बाद  उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन का उद्देश्‍य केवल गंगा की ‘निर्मलता’ और ‘अविरलता’ तक ही सीमित नहीं है,  हम गंगा और उसकी सहायक नदियों के आसपास एक टिकाऊ सामाजिक-आर्थिक जोन विकसित करने के लिए ‘अर्थ गंगा’ की रूपरेखा पर भी काम कर रहे हैं जिससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को काफी बढ़ावा मिलेगा।’  

 

अतीत में, ‘गंगा यात्रा’ और ‘गंगा आमंत्रण अभियान’ की सफलता से लोगों के बीच जागरूकता आई है जिनकी बदौलत अब न केवल गंगा के किनारे वाले इलाकों में, बल्कि अन्य नदियों की स्वच्छता में भी जनता की भागीदारी निरंतर बढ़ रही है। लॉकडाउन के दौरान घर लौटे प्रवासी श्रमिकों को महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के जरिए नदी-तालाबों के पुनरुत्‍थान कार्य से जोड़ा गया, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था काफी लाभान्वित हुई और इसके साथ ही मानसून के जल के संचयन के लिए प्राकृतिक स्रोतों को संरक्षित किया गया।

 

इसके अलावा, क्षेत्र की जैव विविधता को विकसित करने के लिए आईआईटी कानपुर और डब्‍ल्‍यूडब्‍ल्‍यूएफ के साथ मुरादाबाद में काम शुरू किया जा रहा है। इसी तरह हरदोई, बिजनौर, मेरठ इत्‍यादि जिलों में अब कछुओं की कई प्रजातियों का संरक्षण और संवर्धन किया जा रहा है। हरदोई में कछुआ तालाब का पुनरुत्‍थान कर पहली बार हैचिंग (अंडे सेने का कार्य) सफलतापूर्वक की गई है। रायबरेली में आर्द्रभूमि के लिए सर्वेक्षण जारी है। गंगा के किनारे वाले इलाके अतिक्रमण मुक्त किए जा रहे हैं। वृक्षारोपण अभियान भी इस योजना का एक महत्वपूर्ण घटक हैं। सभी जिलों में पौधे लगाकर गंगा के किनारे वन विकसित किए जाएंगे। इस योजना के तहत इस वर्ष कासगंज में 300 हेक्टेयर भूमि पर 3.5 लाख पौधे लगाए गए हैं।

 

बैठक में शामिल सभी जिला कलेक्टरों ने अपने-अपने जिले में हो रही विभिन्‍न गतिविधियों का विवरण दिया। कानपुर में 14 दिसंबर, 2019 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई राष्ट्रीय गंगा परिषद की बैठक में नमामि गंगे को ‘लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार 2020’ में शामिल करने का निर्णय लिया गया। नामांकन के लिए जिलेवार विवरण एनएमसीजी  को भेजे जाएंगे। आवेदन 15 अगस्त से पहले किए जाने हैं। संबंधित पुरस्कार ‘सिविल सेवा दिवस’ के अवसर पर वितरित किए जाएंगे।

 

अब कर्णावती में प्रवाह पूरे वर्ष बना रहेगा: नमामि गंगे परियोजना में गंगा की सहायक नदियों की स्वच्छता और कायाकल्‍प शामिल है। मिर्जापुर जिले में गंगा की एक सहायक नदी ‘कर्णावती’ के कायाकल्‍प की बदौलत अब यह पूरे साल सतत रूप से बहती रहेगी। वर्तमान में कार्यान्वित किए जा रहे सामाजिक-आर्थिक मॉडल से कर्णावती नदी के किनारे वाले इलाके काफी लाभान्वित होंगे। इसके साथ ही गोमती नदी से मिलने वाली हरदोई जिले की सई नदी को प्रवासी कामगारों की मदद से पुनर्जीवित किया गया है। इसी तर्ज पर कासगंज और फर्रुखाबाद में पुरानी गंगा का कायाकल्‍प किया गया है।

प्रवासी श्रमिकों को काम मिला और उन्‍होंने जल संसाधनों का संरक्षण किया: प्रवासी श्रमिक लॉकडाउन की अवधि के दौरान विशेषकर जिला गंगा समिति के क्षेत्रों में प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण में जुटे हुए थे जिनमें वाराणसी, कानपुर, बिजनौर भी शामिल हैं। इससे छोटी नदियां और तालाब लाभान्वित हुए हैं। बदायूं में कछला घाट को विकसित किया जाएगा।

 

डॉल्फिन के संरक्षण के साथ  किसानों की समृद्धि भी बढ़ी: नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत फतेहपुर जिले के किसानों को जैविक खेती का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह क्षेत्र गंगा में डॉल्फिन के लिए भी जाना जाता है, अत: डॉल्फिन के संरक्षण कार्य भी एक विशेष परियोजना के माध्यम से निरंतर आगे बढ़ रहा है।

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