अनिवार्य प्रश्न
Rahat Indori passed away

गुजर गए राहत इंदौरी

 


अनिवार्य प्रश्न । कार्यालय संवाद


…..मेरी पेशानी पे हिन्दुस्तान लिख देना : नहीं रहे राहत  : इंदौर में शोक


कई लोगों का मानना रहा है कि उनकी लेखनी मार्क्सवाद से प्रभावित रही है। वे मोदी सरकार और उनके कई फैसलों के खिलाफ कविताएं लिखते-पढ़ते रहे।


देश के मशहूर गजलगोह राहत इंदौरी का आज दिनांक 11 अगस्त 2020 को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार वह कोविड-19 के पॉजिटिव पाए गए थे। अरविंदो चिकित्सालय इंदौर में उनका इलाज चल रहा था। उन्होंने सुबह एक ट्वीट कर अपने प्रशंसकों से कहा था कि फोन पर कोई भी उनसे तबीयत न पूछे। वह स्वयं समय-समय समय पर अपना हाल चाल सोशल साइट ट्वीटर और फेसबुक पर बताएंगे। उनमें कोविड के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर भी उन्होंने ट्वीटर पर जानकारी दी थी कि ‘‘कल मेरा कोरोना टेस्ट किया गया। जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।’’

अस्पताल के सूत्र बताते हैं कि शायर इंदौरी को आज सुबह 11 अगस्त 2020 को तीन बार दिल का दौरा पड़ा था, जिसको वो उम्र अधिक होने से बर्दास्त नहीं कर पाए और 70 साल की उनकी जीवन रेखा रुक गई। जानकारी मिल रही है कि उन्हें पहले से शुगर भी था।

मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चैहान ने उनके गुजर जाने पर श्रद्वांजलि अर्पित की है। संस्कृति, पर्यटन एवं आध्यात्म मंत्री सुश्री उषा ठाकुर ने प्रदेश ही नहीं देश के भी मशहूर शायर श्री राहत इंदौरी के निधन पर गहरा दुःख प्रकट किया है। मंत्री सुश्री ठाकुर ने कहा कि स्वर्गीय श्री राहत इंदौरी ने देश और दुनिया में इंदौर और मध्यप्रदेश का नाम रौशन किया, इसके लिये प्रदेश उनका ऋणी रहेगा। सामाजिक सद्भाव के पक्षधर श्री इंदौरी ने भारतीय उर्दू साहित्य और फिल्म उद्योग को अनेक अद्भुत रचनाएँ दीं। संस्कृति मंत्री ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा को शांति और शोक.संतप्त परिवार को असहनीय दुरूख सहन करने की क्षमता प्रदान करने की प्रार्थना की है।

बीते कल उनके बीमार होने की सूचना पर शिवराज ने भी राहत साहब के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना थी। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा था कि ‘‘ प्रसिद्ध शायर श्री राहत इंदौरी जी के अस्वस्थ होने का समाचार मिला। ईश्वर से उनके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।’’ लेकिन ईश्वर को उनकी प्रार्थ ना मंजूर नहीं थी।


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जीवन एवं शिक्षा
शायर राहत का जन्म इंदौर में 1 जनवरी 1950 में कपड़ा मिल के कर्मचारी रफ्तुल्लाह कुरैशी और मकबूल उन निशा बेगम के यहाँ हुआ था। वे उन दोनों की चैथी संतान थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा नूतन स्कूल इंदौर में हुई। उन्होंने इस्लामिया करीमिया कॉलेज इंदौर से 1973 में अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी की 3, और 1975 में बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल से उर्दू साहित्य में एमए किया। तत्पश्चात 1985 में मध्य प्रदेश के मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय से उर्दू साहित्य में पीएचडी किए।

आरंभिक दिन
राहत इंदोरी जी ने शुरुवाती दौर में इंद्रकुमार कॉलेजए इंदौर में उर्दू साहित्य का अध्यापन कार्य शुरू कर दिया। उनके छात्रों के मुताबिक वह कॉलेज के अच्छे व्याख्याता थे। फिर बीच में वो मुशायरों में व्यस्त हो गए और पूरे भारत से और विदेशों से निमंत्रण प्राप्त करना शुरू कर दिया। उनकी अनमोल क्षमताए कड़ी लगन और शब्दों की कला की एक विशिष्ट शैली थी एजिसने बहुत जल्दी व बहुत अच्छी तरह से जनता के बीच लोकप्रिय बना दिया। राहत साहेब ने बहुत जल्दी ही लोगों के दिलों में अपने लिए एक खास जगह बना लिया और तीन से चार साल के भीतर ही उनकी कविता की खुशबू ने उन्हें उर्दू साहित्य की दुनिया में एक प्रसिद्ध शायर बना दिया था।

उनकी जिंदगी
राहत की दो बड़ी बहनें थीं जिनके नाम तहजीब और तकरीब थे। एक बड़े भाई अकील और फिर एक छोटे भाई आदिल रहे। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी और राहत जी को शुरुआती दिनों में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। उन्होंने अपने ही शहर में एक साइन चित्रकार के रूप में 10 साल से भी कम उम्र में काम करना शुरू कर दिया था। चित्रकारी उनकी रुचि के क्षेत्रों में से एक थी और बहुत जल्द ही बहुत नाम अर्जित किया था। वह कुछ ही समय में इंदौर के व्यस्ततम साइनबोर्ड चित्रकार बन गए। क्योंकि उनकी प्रतिभाए असाधारण डिजाइन कौशल, शानदार रंग भावना और कल्पना की है कि और इसलिए वह प्रसिद्ध भी हैं। यह भी एक दौर था कि ग्राहकों को राहत द्वारा चित्रित बोर्डों को पाने के लिए महीनों का इंतजार करना भी स्वीकार था। यहाँ की दुकानों के लिए किया गया पेंट कई साइनबोर्ड्स पर इंदौर में आज भी देखा जा सकता है।

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