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वर्तमान परिस्थितियों में कानपुर में बाल मजदूरों की संख्या 50000 से अधिक होने की संभावना

अनिवार्य प्रश्न । संवाद

कानपुर। बाल मजदूर विरोध दिवस के अवसर पर मुसीबत में फंसे बच्चों की मदद के लिए संचालित चाइल्ड लाइन कानपुर नगर रोटरी क्लब कानपुर त्रिमूर्ति व बाल सेवी संस्था सुभाष चिल्ड्रन सोसायटी के संयुक्त तत्वाधान में बाल श्रम निषेध दिवस पर बाल मजदूरों की रोकथाम व पुनर्वासन के संबंध में चाइल्ड लाइन कानपुर एवं सामाजिक संस्थाओं की चुनौतियां एवं संभावनाएं विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में चाइल्ड लाइन कार्यकर्ता रेलवे चाइल्ड लाइन कार्यकर्ता सहित एक दर्जन से अधिक सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।

बाल श्रम निषेध दिवस पर जारी रिपोर्ट के अनुसार कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को बताया गया कि कानपुर नगर में बाल सेवी संस्था सुभाष चिल्ड्रन सोसायटी द्वारा विगत वर्ष 2007 से चाइल्डलाइन इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से चलाई जा रही है। जिस क्रम में अब तक चाइल्ड लाइन कानपुर द्वारा विगत 12 वर्षों में 734 बच्चों को बाल मजदूरी बाल शोषण व प्रशासन की मदद से संशोधन से सुरक्षा व न्याय दिलाया 4828 भटके बच्चों को उनके घर पहुंचाया एवं 103 बच्चों को चिकित्सकीय सहायता, 1252 बच्चों को आश्रय तथा 3356 बच्चों को काउंसलिंग कर उन्हें उज्जवल भविष्य के लिए प्रेरणा प्रदान की गई। लगभग 1884 बच्चों को उनके साथ हो रहे शोषण से मुक्त कराया गया। इसके साथ ही विगत 12 वर्षों में कुल 12000 से अधिक बच्चों को चाइल्ड लाइन द्वारा मदद पहुंचाई जा चुकी है वह विगत 1 वर्ष अप्रैल 2019 से मई 2020 तक 53 बार मजदूर व भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों का पुनर्वासन किया जा चुका है।

कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि चाइल्ड लाइन द्वारा इस कार्यशाला का आयोजन करने का उद्देश्य चाइल्ड लाइन के पास बाल मजदूरों की रोकथाम के संबंध में आने वाली चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा करना था। जिससे चाइल्ड लाइन व रेलवे लाइन के कार्यकर्ता सशक्त होकर कार्य कर सकें और अधिक से अधिक बाल मजदूरों की रोकथाम का उनका पुनर्वासन किया जा सके।

चाइल्ड लाइन के निदेशक कमल कांत तिवारी ने बताया कि कानपुर नगर में पहले 20 से 25000 बाल मजदूर कार्यरत थे लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में परिवारों की आर्थिक स्थिति चरमरा जाने के कारण नगर में 50,000 से अधिक बाल मजदूरों के होने की संभावना है जो कि होटल, ढाबे, रेस्टोरेंट, कारखाने, मोटर मैकेनिक की दुकानों में काम करने को मजबूर होंगे। साथ ही उन्होंने बताया कि कानपुर नगर जिसकी गिनती बाल मजदूरों की संख्या बाहुल्य जिलों में होती है जिसमें राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना जो कि लगभग 2 वर्षों से बंद है उसको फिर से शुरू करने की अपील की गई है।

चाइल्ड लाइन कानपुर के समन्वयक प्रतीक धवन ने जनसामान्य से अपील की कि अगर कोई भी होटल, ढाबे, रेस्टोरेंट्स, मोटर मैकेनिक कारखाने/दुकानों या घर में बाल मजदूरी कराने की कोई सूचना पाए तो वह चाइल्डलाइन के निशुल्क नंबर 1098 पर कॉल करके बता दे। संस्था उसकी संरक्षा करेगी।

इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से चाइल्डलाइन कानपुर के निदेशक कमलकांत तिवारी, समन्वयक प्रतीक धवन, रेलवे चाइल्ड लाइन के समन्वयक गौरव सचान, दीक्षा तिवारी, शिवानी सोनवानी, प्रमोद कुमार श्रीवास्तव, रामानंद पाठक, शांति देवी, चाइल्ड लाइन की काउंसलर मंजुला तिवारी, रेलवे चाइल्ड लाइन की काउंसलर मंजूलता दूबे, उमाशंकर, प्रदीप पाठक, रीता सचान, संगीता सचान और नारायण त्रिपाठी आदि लोग उपस्थित रहे।

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