अनिवार्य प्रश्न

शराबखानों पर टूटी फिजीकल डिस्टेंसिंग की मर्यादा


अनिवार्य प्रश्न । संवाद


जमातियों की तरह ही संक्रमण को तेजी से फैलाने में कोढ़ में खाज का काम कर सकते हैं शराबी
पहले दिन की लाकडाउन की ढील साबित हुई गलत
फिजिकल डिस्टेंसिंग की मर्यादा पहले ही दिन तार-तार


लखनऊ। लाकडाउन में मिली कुछ ढील को देखते हुए आम जनमानस का आना-जाना कुछ सरल हो गया है। अंतर शहरी व अंतर ग्रामीण जीवन को थोड़ी सी सहूलियत प्रदान की गई है। बावजूद इसके राज्य सरकारे व केंद्र सरकारे फिजिकल डिस्टेंसिंग के लिए पर्याप्त नियम कायदे व अनुबंध बना रखे हैं। हर तरफ आम नागरिक तो अपनी जरूरत की चीजें खरीदता भी रहा लेकिन मय अथवा शराब प्रेमियों का क्या कहना है। प्रदेशभर से प्राप्त सूचनाओं के मुताबिक मैखानों पर फिजिकल डिस्टेंसिंग की मर्यादा लाकडाउन में ढील के पहले ही दिन तार-तार हो गई।

लखनऊ, फैजाबाद, मिर्जापुर, जौनपुर एवं वाराणसी से भी आई सूचनाओं के अनुसार छूट मिलते ही लगभग हर मैखाने पर सैकड़ों व हजारों की संख्या में शराबी टूट पड़े। और एक दूसरे से गलबहियां करते हुए काउंटर से शराब खरीदते दिखे। उनके द्वारा फिजिकल डिस्टेंसिंग का खयाल नहीं रखा गया। वह परस्पर जूझकर छोटी सी छेद से अपने लिए सोमरस खरीदते रहे। कई जगह पर तो पुलिस को जाकर फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन कराना पड़ा।

बनारस में मैदागिन सहित कई जगह से प्राप्त सूचना के मुताबिक पुलिस के हूटर को देखकर शराबी तितर-बितर हुए, नहीं तो एक दूसरे से जल्दी शराब ले लेने की होड़ में फिजिकल डिस्टेंस की परवाह नहीं कर रहे थे। चिंता की बात यह है कि भाजपा सरकार हर मूल्य पर जनहित का दावा करती रही है। वह कई सारी चीजों छूटों को देने के बाद कुछ नियम और प्रतिबंध तो लगाई है लेकिन मैखाने को अभी खोल देने की इतनी भी क्या जल्दी थी।

लोगों का मानना है कि आवश्यक जरूरत की दुकान को खोलने के पश्चात अभी शराब की दुकान को बंद रखना चाहिए था। लेकिन सरकार अपने राजस्व के लिए किसी भी हद तक समझौता करने को तैयार दिख रही है। कई जिलों से प्राप्त सूचना के अनुसार इस बात से आम नागरिकों में रोष है कि जबकि बाजार अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ है इन शराबियों को कौन संभालेगा। शराबी जमातियों की तरह ही संक्रमण को तेजी से फैलाने में कोढ़ में खाज का काम कर सकते हैं। शराब की दुकानों को खोलने से खतरा काफी बढ़ गया है क्योंकि शराबी और जातियों में ज्यादा अंतर लोगों को नहीं लग रहा है।

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