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लाकडाउन में बंटा देश के शहरों को स्टार

 

अनिवार्य प्रश्न । संवाद

दिया गया 6 शहरों को 5 स्टार, 65 शहरों को 3 स्टार और 70 शहरों को 1 स्टार का दर्जा दिया गया
एमओएचयूए ने कचरा मुक्त शहरों की स्टार रेटिंग के परिणामों की घोषणा की

दिल्ली। केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के राज्य मंत्री (स्वतंत प्रभार) श्री हरदीप एस पुरी ने कहा कि आकलन वर्ष 2019-2020 के लिए, कुल छह शहरों को 5-स्टार (अंबिकापुर, राजकोट, सूरत, मैसूरु, इंदौर और नवी मुंबई), 65 शहरों को 3-स्टार के रूप में और 70 शहरों को 1-स्टार के रूप में प्रमाणित किया गया है। कचरा मुक्त शहरों की स्टार रेटिंग के परिणामों की घोषणा करते हुए श्री पुरी ने आज कार्यक्रम में कचरा मुक्त शहरों की स्टार रेटिंग के लिए संशोधित प्रोटोकॉल को भी लॉन्च किया। कचरा मुक्त स्थिति प्राप्त करने के लिए शहरों के तंत्र को संस्थागत रूप देने और स्वच्छता के उच्च स्तर को प्राप्त करने के लिए शहरों को प्रेरित करने को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय द्वारा जनवरी 2018 में स्टार रेटिंग प्रोटोकॉल लॉन्च किया गया था। इस अवसर पर आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के सचिव श्री दुर्गा शंकर मिश्रा और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

प्रेस को संबोधित करते हुए मंत्री श्री पुरी ने कहा, “कोविड संकट के कारण स्वच्छता और प्रभावी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का महत्व अब सामने लाया गया है। वास्तव में, यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि वर्तमान स्थिति और खराब हो सकती थी यदि एसबीएम-यू ने पिछले पांच वर्षों में शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका नहीं निभाई होती। पांच साल पहले, हमने शहरी भारत के लिए वार्षिक स्वच्छता सर्वेक्षण दृ स्वच्छ सर्वेक्षण (एस एस ) की शुरुआत की। स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना के माध्यम से शहरी स्वच्छता में सुधार करने की दृष्टि से यह कार्यक्रम काफी सफल रहा। चूंकि यह एक रैंकिंग प्रणाली है, हमारे शहरों में से कई को, असाधारण रूप से अच्छा काम करने के बावजूद, उचित श्रेणी नहीं मिली। इसलिए, मंत्रालय ने कचरा मुक्त शहरों के लिए स्टार रेटिंग प्रोटोकॉल तैयार किया दृ यह हमारी परीक्षा प्रणालियों के समान एक व्यापक ढांचा है जहां हर शहर में प्रत्येक वार्ड को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) के 24 अलग-अलग घटकों में एक निश्चित मानक प्राप्त करना होगा और कुल प्राप्त अंक के आधार पर इन्हें श्रेणीबद्ध किया जाएगा।” उन्होंने आगे कहा, ष्हमारा उद्देश्य एसडब्ल्यूएम को संस्थागत रूप देने के साथ-साथ-साथ इसमें एकरूपता और पारदर्शिता लाना है। यह प्रमाण पत्र न केवल शहरी स्थानीय निकायों की स्वच्छ स्थिति की स्वीकार्यता है और एसडब्ल्यूएम प्रणाली को मजबूत करता है, बल्कि सार्वभौमिक रूप से ज्ञात मानकों के प्रति विश्वसनीयता का भी प्रतीक है। इसके अलावा, स्टार रेटिंग प्रोटोकॉल के तहत शहरों का प्रदर्शन महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उनका अंतिम मूल्यांकन तय किया जाता है।

प्रोटोकॉल को समग्र रूप से तैयार किया गया है, जिसमें शामिल हैं -नालियों और जल निकायों की सफाई, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन, निर्माण और तोड़ दिए गए भवनों के अपशिष्ट, आदि। ये घटक कचरा मुक्त शहर की स्थिति प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। इस प्रोटोकॉल का मुख्य जोर एसडब्ल्यूएम पर है, यह स्वच्छता के कुछ न्यूनतम मानकों का भी ध्यान रखता है।

आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के सचिव श्री दुर्गा शंकर मिश्रा ने कहा, “प्रोटोकॉल को स्मार्ट फ्रेमवर्क बनाने के लिए हमने तीन चरणों की मूल्यांकन प्रक्रिया विकसित की है। पहले चरण में, यूएलबी एक विशेष समय-सीमा के भीतर सहायक दस्तावेजों के साथ पोर्टल पर अपने प्रगति डेटा को अपलोड करते हैं। दूसरे चरण में मंत्रालय द्वारा चयनित और नियुक्त एक तीसरा पक्ष (एजेंसी) डेस्कटॉप मूल्यांकन करता है। डेस्कटॉप मूल्यांकन में सफल होने वाले शहर के दावे को स्वतंत्र रूप से क्षेत्र में जाकर सत्यापित किया जाता है। स्टार रेटिंग मूल्यांकन के इस चरण में, 1435 शहरों ने आवेदन किया। मूल्यांकन के दौरान, नागरिकों की 1.19 करोड़ प्रतिक्रियाएं और 10 लाख से अधिक भू-टैग किए गए चित्र एकत्र किए गए तथा 1210 क्षेत्र मूल्यांकनकर्ताओं द्वारा 5175 ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्रों का दौरा किया गया। 698 शहरों ने डेस्कटॉप मूल्यांकन में सफल रहे, क्षेत्र मूल्यांकन के दौरान 141 शहरों को स्टार रेटिंग के साथ प्रमाणित किया गया है। प्रमाणपत्रों की कम संख्या प्रोटोकॉल के कठोर और मजबूत प्रमाणन तंत्र को दर्शाती है। स्टार रेटिंग फ्रेमवर्क के लिए संशोधित प्रोटोकॉल लॉन्च करते हुए श्री मिश्रा ने कहा, “हमारा प्रयास शहरों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर फ्रेमवर्क में लगातार सुधार करना और इसे मजबूत बनाना है। नया प्रोटोकॉल वार्ड-वार जियो-मैपिंग, स्वच्छ नगर ऐप जैसे आईसीटी हस्तक्षेपों के माध्यम से एसडब्ल्यूएम मूल्य श्रृंखला की निगरानी और 50 लाख ़ की आबादी वाले शहरों में जोन-वार रेटिंग पर विचार करेगा।

इसके अतिरिक्त, कोविड संकट के मद्देनजर, मंत्रालय ने सभी राज्यों और शहरों को सार्वजनिक स्थानों की विशेष सफाई और क्वारंटाइन घरों से जैव-चिकित्सा अपशिष्ट के संग्रहण और निपटान के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। एमओएचयूए ने नागरिकों को उनके संबंधित यूएलबी द्वारा कोविड से संबंधित मुद्दों के समाधान के लिए अपने बेहद लोकप्रिय नागरिक शिकायत निवारण प्लेटफॉर्म, स्वच्छता ऐप को अप्रैल के पहले सप्ताह में, संशोधित किया। स्वच्छता कर्मचारियों की सुरक्षा और कल्याण के बारे में मंत्री श्री पुरी ने कहा, “एमओएचयूए ने स्वच्छता कर्मियों के लिए पीपीई के प्रावधान, स्वास्थ्य जांच और स्वच्छता के लिए नियमित मजदूरी के भुगतान के संबंध में एक एडवाइजरी भी जारी की है। मुझे यह देखकर खुशी हुई कि स्वच्छता कर्मचारियों की सेवाओं को अधिकारियों और नागरिकों द्वारा समान रूप से मान्यता दी जा रही है। कोविड से निपटने के लिए शहरों ने कई अन्य नवाचार भी किए हैं-कुछ शहर सार्वजनिक क्षेत्रों की स्वच्छता के लिए ड्रोन का उपयोग कर रहे हैं, जबकि अन्य शहर इसी काम के लिए फायर टेंडर का व्यापक उपयोग कर रहे हैं। गाजियाबाद जैसे शहरों ने जरूरतमंदों को भोजन और आश्रय की व्यवस्था देने का सराहनीय कार्य किया है। नागरिकों को सभी आवश्यक सेवाएं प्रदान करने और क्वारंटाइन घरों की स्थिति की निगरानी करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जा रहा है। ”

उन्होंने कहा, “मेरा मंत्रालय लॉकडाउन के दौरान वित्तीय समस्या के प्रतिकूल प्रभाव से अवगत है। लगभग 50 लाख विक्रेताओं (स्ट्रीट वेंडर्स) को समर्थन देने के लिए एक विशेष माइक्रो-क्रेडिट सुविधा शुरू की जा रही है। इसी तरह, शहरी प्रवासियों (विनिर्माण उद्योग आदि में कामगार आदि) की कठिनाइयों को कम करने के लिए अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कॉम्प्लेक्स (एएचआरसी) शुरू किए जा रहे हैं।

मिशन के लिए आगे बढ़ने के तरीके पर विस्तार से चर्चा करते हुए, मंत्री ने कहा, “हमारी दृष्टि प्रभावी मल प्रबंधन, सुरक्षित रोकथाम, परिवहन, निपटान और प्रसंस्करण के माध्यम से शहरी भारत में समग्र और स्थायी स्वच्छता सुनिश्चित करना है। इसके लिए जल निकायों में पानी बहाने से पहले 100ः अपशिष्ट जल उपचार के साथ-साथ जल के अधिकतम संभव पुनरू उपयोग पर ध्यान दिया जा रहा है। हम 3 आर और चक्रीय अर्थव्यवस्था के आधार पर 100ः वैज्ञानिक और संसाधन कुशल एसडब्लूएम प्राप्त करना चाहते हैं। हम एसडब्लूएम के मूल सिद्धांतों-अर्थात् प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और प्रसंस्करण पर अपना काम जारी रखेंगे, हमारे फोकस में सभी कचरा स्थलों का बायोरेमेडिएशन, एकल उपयोग प्लास्टिक मुक्त भारत, कुशल निर्माण और तोड़ दिए गए भवनों के अपशिष्ट प्रबंधन शामिल हैं।

हमें विश्वास है कि एसबीएम -यू के अगले चरण में, हम अपने सभी शहरों को ओडीएफ ़ बनाने में और कम से कम 3-स्टार कचरा मुक्त प्रमाणित करने में सक्षम होंगे तथा हमारे शहर और कस्बे स्वछता में नए मानदंड स्थापित करते रहेंगे, इस तरह एक “स्वच्छ”, “स्वस्थ”, “शशक्त” और “सम्पन” आत्मनिर्भर न्यू इंडिया का मार्ग प्रशस्त होगा ।

2014 में अपनी शुरुआत के बाद से, स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (एस बी एम दृ यू ) ने स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन दोनों ही क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। आज, 4324 शहरी स्थानीय निकाय (यू एल बी ) को ओडीएफ (4204 प्रमाणित ओडीएफ ), 1306 शहरों को ओडीएफ ़ और 489 शहरों को ओडीएफ ़़ प्रमाणित घोषित किया गया है। इसके अलावा, 66 लाख व्यक्तिगत घरेलू शौचालय और 6 लाख से अधिक सामुदायिक व सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण हो चूका है ध् निर्माण प्रक्रिया जारी है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में, 96ः वार्डों में 100ः घर-घर से कचरा संग्रह की सुविधा है, जबकि कुल कचरे के 65ः को संसाधित किया जा रहा है।

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