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The families of those who died due to the cyclone storm will get compensation of Rs 2 lakh and the families of the injured will get compensation of Rs 50 thousand.

चक्रवात तौकते के कारण मरने वालों के परिजनों को 2 लाख और घायलों के परिजनों को 50 हजार रुपये का मिलेगा मुआवजा


अनिवार्य प्रश्न। संवाद


चक्रवात तौकते के कारण मरने वालों के परिजनों को 2 लाख और घायलों के परिजनों को 50 हजार रुपये का मिलेगा मुआवजा


नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मोदी ने चक्रवात तौकते के कारण उत्पन्न हुई परिस्थिति का जायजा लेने के लिए बुधवार को गुजरात का दौरा किया। प्रधानमंत्री ने गुजरात और दीव स्थित उना (गिर-सोमनाथ), जाफराबाद (अमरेली), महुआ (भावनगर) में चक्रवात तौकते से प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण भी किया। हवाई सर्वेक्षण के बाद, उन्होंने गुजरात और दीव में राहत और पुनर्वास के लिए उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा करने के लिए अहमदाबाद में एक बैठक की।

प्रधानमंत्री ने गुजरात राज्य में तत्काल राहत गतिविधियों के लिए 1,000 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की घोषणा की। इसके बाद उन्होंने कहा, केन्द्र सरकार एक अंतर-मंत्रीमंडलीय टीम का गठन करेगी, ये टीम तूफान से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए राज्य का दौरा करेगी, जिसके आधार पर राज्य को आगे भी वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। उनके इस गुजरात दौरे में उनके साथ गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी और अन्य अधिकारी शामिल थे।

प्रधानमंत्री ने भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में चक्रवात तौकते से प्रभावित होने वाले लोगों के प्रति अपनी संवेदना और इस आपदा में अपनी जान गंवाने वाले मृतकों के परिजनों के प्रति गहरा दुःख व्यक्त किया। उन्होंने केरल, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान राज्यों और दमन एवं दीव, और दादर एवं नागर हवेली में चक्रवात तौकते के कारण मरने वालों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों के परिजनों को 50 हजार रुपये का अनुग्रह राशि के रूप में मुआवजा देने की घोषणा की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि चक्रवात के बाद की स्थिति को ध्यान में रखते हुए केन्द्र सरकार और प्रभावित राज्यों की सरकारें मिलकर काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि जैसे ही राज्य सरकारें अपने यहां होने वाले नुकसान का आकलन केन्द्र सरकार के साझा करेंगे, उसके तुरंत बाद इन राज्यों को तत्काल वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि हमें आपदा प्रबंधन से संबंधित और अधिक वैज्ञानिक अध्ययन की दिशा में लगातार कार्य करना होगा। उनके द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में क्षतिग्रस्त घरों और संपत्तियों की मरम्मत करने पर भी तत्काल ध्यान देने का आह्वान किया गया।

 

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