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अपने लालों के कारण लाल जोन में जाते हुए गांव


अनिवार्य प्रश्न । संवाद


लंबे खींचते लाख डाउन के कारण सरकारों का संयम जवाब दे गया है। केंद्र सरकार भी अव्यवस्था को भाँपकर और लोगों के संयम को टूटता देखकर रेलवे व अन्य परिवहन साधनों से लोगों को उनके घर वापस भेजने लगी है। यहां तक कि बंदे भारत जैसे अभियान से विदेशों से भी लोगों को मँगाया जाने लगा है। पिछले दिनों लगातार प्राप्त सूचनाओं के मुताबिक हजारों की संख्या में ट्रेनें चलाई गई जिससे लाखों की संख्या में श्रमिक एवं अन्य श्रेणी के शहर प्रवासी गांव में लौटे हैं।

गांव के विकास को गति देने वाले उसके यह लाल आज गांव में पहुंचकर गांव के लिए खतरा बढ़ा दिए हैं। कल जो गांवों को विकास के पथ पर ले जाने के लिए और वहां तक शहर की संस्कृति व उसकी सुंदरता को पहुंचाते थे वही सपूत अब गांवों को रास नहीं आ रहे हैं। चंदौली, बलिया, गाजीपुर, आजमगढ़, जौनपुर, मिर्जापुर जैसे जनपदों के सूत्रों के अनुसार जिसके घर के अपने लौट रहे हैं वह तो स्वागत कर रहा है बाकी पूरा गांव डर जा रहा है। पूरे गांव में इस बात की चर्चा होने लग रही है कि यह आदमी अभी क्यों आया है, इसे कुछ दिन और रुकना चाहिए था शहर में। अगर जी खा सकता था तो क्या जरूरत थी पूरे गांव को संकट में डालने की।

उल्लेखनीय है कि तमाम सीमाओं को सील होने के बाद भी प्रवेश के समय सभी लोगों की जांच नहीं हो पा रही है। और भारी मात्रा में लोग गांव में समा जा रहे हैं। लाखों की संख्या में हर श्रेणी के मजदूर व प्रवासी गांव को लौट चुके हैं। कुछ की जांच हुई है कुछ क्वेरेन्टाइन भी नहीं हो पाए हैं। कहीं-कहीं कुछ गांव से प्राप्त समाचारों के मुताबिक लोगों ने स्वयं को क्वेरेन्टाइन किया हुआ है और वह गांव से बाहर रह रहे हैं। बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों के हमारे संवाददाताओं ने बताया कि बिहार में प्रवेश किए जाने वाले मार्गों पर दोपहिया और चार पहिया वाहन के प्रवेश के समय तो उनकी जांच हो रही है लेकिन पैदल टुकड़ी में आने वाले लोगों की कोई जांच नहीं हो रही है। सीमा पर बैठे सुरक्षाकर्मी उनकी कोई जांच नहीं करते हैं।

ऐसे में लाखों की संख्या में लौट रहे सड़क मार्ग से मजदूर और शहर में रहने वाले अन्य श्रेणी के लोग अब गांव का संकट बढ़ा दिए हैं। सरकार व लोगों की चिंता यह है कि ऐसी परिस्थिति में जब गांव में बेरोकटोक लोग समा जाएंगे तब फिर संक्रमण को कैसे रोका जाएगा। शहरों में तो सब को चिन्हित कर जांच कर पाना मुश्किल है इसी बीच अगर यह बीमारी गांव में पहुंच गई और जन-जन के स्वास्थ्य में समा गई तब तो इसे भारत से निकाल पाना मुश्किल हो जाएगा। आने वाले समय को देखकर सरकारों का दम छूट रहा है। और चिकित्सा विभाग हाफ रहा है। ऐसे में लोगों को स्वयं सावधानी रखन होगी और गांव वालों को जागरूक होकर अपने ही लालों के आने पर जांच कराने के लिए प्रशासन को सूचना देनी होगी अन्यथा हालात और बिगड़ सकते हैं।

संवाददाताओं का कहना है कि अब वही गांव जो अपने लालों पर गर्व करते थे और उनके आने पर उत्सव मनाता था, कोरोना काल में अब अपने ही लालों के आने पर कांप जा रहा है। आगे कहीं ऐसा ना हो कि अपने ही लालों और काबिल सपूतों की वजह से ज्यादातर गांव रेड जोन में तब्दील हो जाएं। कोरोना ने सामथ्र्य व सफलता की परिभाषा बदल कर रख दिया है।

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