अनिवार्य प्रश्न
Yogi's assurance Did he forget or his factory

योगी जी का आश्वासन? वो भूले या उनके कारखास?


अनिवार्य प्रश्न। संवाद


विगत 03 वर्षों में भी योगी जी का आश्वासन पूरा नही कर सके उनके अधिकारी, आखिर क्यों?


कानपुर। परिवार व बाल कल्याण के क्षेत्र में विगत 38 वर्षो से सक्रीय रूप से कार्य कर रही संस्था सुभाष चिल्ड्रेन होम के बच्चे एवं संस्था कार्यकर्ता मा0 मुख्यमंत्री के एनेक्सी भवन पंचम तल पर कार्यालय में उनके एक विशेष आमंत्रण पर उनसे दिनांक 06 जून 2018 को मिले थे। जिसमें संस्था द्वारा सुभाष चिल्ड्रेन होम के बच्चों के लिए होम को अनुदान दिलाने के लिए आग्रह किया गया था, जिस पर योगी जी द्वारा अनाथ एवं जरूरतमंद बच्चों के हित के लिए सुभाष चिल्ड्रेन होम को चाइल्ड प्रोटेक्शन सर्विसेज के अंर्तगत अनुदानित करने के लिए अनुदान सूची में शामिल करने के लिए आश्वासन भी दिया गया था, लेकिन विभागीय अढचनों के कारण अभी तक इसमें कोई आगे की कार्यवाही नहीं हो सकी है। जिस कारण अनाथ, बेसहारा बच्चों के सर्वागीण विकास के लिए अनुदान नही मिल पा रहा है।

अब अनिवार्य प्रश्न यह है कि अपने दिए गये आश्वासन को माननीय मुख्यमंत्री भूल गये या उनके कारखास। क्योंकि मुख्यमंत्री तो झूठा आश्वासन दे नहीं सकते। हां, मगर जनसुनवाइयों में उनके कारखासों की गलत जवाबी से आमजन नाराज जरुर हो रहें हैं जिससे आने वाले चुनाव में उनकी पार्टी और सरकार को उनके कारखासों की करतूतों को भोगना पड़ सकता है।

ज्ञातव्य हो कि बाल कल्याण समिति कानपुर नगर द्वारा लगातार बच्चों के पुर्नवासन व आश्रय हेतु उन्हे सुभाष चिल्ड्रेन होम के लिए आदेशित किया जाता रहता है। जिसमें सुभाष चिल्ड्रेन होम के माध्यम से 2000 से अधिक बच्चों को आश्रय प्रदान कर उनका पुर्नवासन कर चुकी है। सुभाष चिल्ड्रेन होम के प्रबंधक कमलकान्त तिवारी ने बताया कि संस्था द्वारा सुभाष चिल्ड्रेन होम के बच्चों को बिना किसी सरकारी सहायता के विगत 14 वर्षो से संचालित किया जा रहा है। जिसमें बच्चांें के सर्वागीण विकास हेतु उनकी शिक्षा, रहने, खान-पान एवं खेलकूद आदि की समूचित व्यवस्था की जाती है। ऐसे में यदि संस्था को अनुदान प्राप्त होगा तो इन अनाथ तथा बेसहारा बच्चों की और बेहतर देखभाल हो सकेगी। जिस कारण संस्था द्वारा मा0 मुख्यमंत्री जी से सुभाष चिल्ड्रेन होम को चाइल्ड प्रोटेक्शन सर्विसेज के अंर्तगत अनुदानित करने के लिए अनुदान सूची में शामिल करने के लिए आग्रह किया गया था। लेकिन विभागीय अढचनों के कारण एक वर्ष बाद तक यह सम्भव नही हो सका है।

 

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