अनिवार्य प्रश्न

कोटेदार वसूल रहा नाजायज रुपये गरीब रह रहे भूखे, चन्दौली में लाकडाउन में भी नहीं मिल रहा सभी को राशन

अनिवार्य प्रश्न । ब्यूरो चन्दौली


अनिवार्य प्रश्न के एक स्टिंग आपरेशन में हुआ खुलासा
सरकार के निदेर्शों का नहीं हो रहा पालन, सैकड़ों गरीबों के पास खाने के लिए राशन नहीं
नाम जोड़ने के लिए कोटेदार ले रहा 100-100 रुपये
कह रहा तीन महीने बाद देगा राशन
विडिओ में कहते दिखा ऊपर चकिया सप्लाई आफिस में लिया जाता है घूस


चन्दौली । अनिवार्य प्रश्न के एक स्टिंग आपरेशन में कोटेदार द्वारा नाम जुड़वाने के लिए घूस लिये जाने के बड़े मामले का खुलासा हुआ है। विकास खण्ड शहाबगंज व थाना इलिया के अन्तर्गत आने वाले ग्राम घोड़सारी के सरकारी गल्ले का दुकानदार वहां के नागरिकों से कटे यूनिट व राशन कार्ड को जुड़वाने के लिए गरीबों से रुपए ले रहा है। नियमानुरुप सहज जनसेवा केन्द्र वाले कटे नाम जोड़ने पर 20 रुपये चार्ज करते हैं, लेकिन लाकडाउन होने के कारण वह बन्द हैं। ऐसे में कोटेदार रामजनम राम प्रत्येक यूनिट और प्रत्येक कार्ड को जुड़वाने के लिए 100 रुपये लेता है। सकार चाहे जो दावा कर ले पर लाकडाउन में भी कोटेदार का भ्रष्टाचार व उसकी क्रूरता कायम है।

जिस समय दुश्मन भी दुश्मन से दुश्मनी भूलकर उसकी सेवा व उसके भूखे रहने पर भोजन दे रहा है, चंदौली मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर चकिया से सटे शहाबगंज विकासखंड अंतर्गत घोड़सारी गांव के सरकारी गल्ले का दुकानदार/कोटेदार कटे हुए नामों व कार्डों को जोड़ने के लिए ₹100 प्रति यूनिट पैसा ले रहा है। और इतना ही नहीं वह 3 महीने बाद मिलने वाले राशन के प्रारंभ होने की बात कह रहा है।

चन्दौली के स्थानीय अनिवार्य प्रश्न व्यूरो द्वारा किये गए स्टिंग ऑपरेशन में हुए इस बड़े खुलासे में यह बात सामने आई है कि सरकारी गल्ले का विक्रेता सार्वजनिक वितरण प्रणाली के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहा है। विडियो में प्राप्त साक्ष्यों को देखा जाए तो वह यह कहता दिख रहा है कि प्रत्येक कटे हुए कार्ड व यूनिट को जोड़ने के लिए चकिया स्थित सप्लाई कार्यालय के लोग पैसा लेते हैं। पैसा नहीं देने पर कागज सालों तक एक तरफ रखा रह जाता है। जिसका पैसा नहीं मिलता वह नाम जुड़ नहीं पाता। वह 100 रुपये लेते हैं तो जाकर कटी यूनिट और कार्ड जुड़ पाता है। वीडियो में कोटेदार ने यहां तक कहा है कि जितनी यूनिट और कार्ड कटा है उतना अलग-अलग सौ-सौ रुपए लगेंगे। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ऐसे सैकड़ों लोग हैं जिनको नाम के लिए पैसा देना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि वह इतना दबंग हो गया है कि घटतौली तो करता ही है निर्धारित यूनिट से कम राशन भी देता है। जो लोग आवाज उठाते हैं उनको साफ कहता है कि जिसको जो करना है कर ले मैं इतना ही दूंगा।

स्टिंग ऑपरेशन की विडिओ में वह 100 रुपये प्रत्येक व्यक्ति के हिसाब से रुपये लेते भी साफ दिख रहा है। कोटेदार इतना क्रूर व दुस्साहर्सी हो गया है कि उसे तनिक परवाह नहीं कि शासन, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री की मंशा क्या है। जहां सरकारें किसी व्यक्ति को भूखा न रहने देने का दावा कर रही हैं उसी दावे की पोल ऐसी खुल चुकी है। यह पोल अब आम आदमी के सामने आ गई है। इस संबंध में जब हमारे संवाददाता द्वारा चकिया स्थित सप्लाई चेन की अधिकारी ममता से बात किया गया तो उनके आचरण और उनके संवाद से लग गया कि कहीं न कहीं उनकी मिलीभगत इस पूरे मामले में है, तथा चकिया का फूड सप्लाई विभाग इस भ्रष्टाचार को जान रहा है। उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि जिनका नाम कटा है वह किसी सहज जन सेवा केंद्र पर जाकर नाम जुड़वा लें। मैडम को इतना भी पता नहीं है कि लाॅकडाउन में सहज जन सेवा के एक भी केन्द्र खुले नहीं हैं। नागरिक आखिर कहां जाएंगे।

संवाददाता के यह कहने पर कि सहज जन सेवा के केन्द्र खुले नहीं हैं ममता मैडम ने संवाददाता से यहां तक कह दिया कि हम लोगों के यहां इतना काम है कि यहां नाम नहीं जुड़ पाएगा। इस समय जब लोग भूख से मर रहे हैं, देश और अपनी सुरक्षा के लिए सरकारी आवाहन पर घरों में बंद  हैं उनके पास खाने के लिए राशन नहीं है। ऐसे में जो पात्र हैं उनको भी राशन न मिल पा रहा है। और गैर जिम्मेवार अधिकारी भरे पेट डकार रहे हैं।

कितनी क्रूरता की बात है कि इस दौर में भी सार्वजनिक वितरण प्रणाली नहीं सुधर रही है। राशन विक्रेताओं से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों का इस तरह का गैर जिम्मेदाराना बयान कहीं न कहीं उनके भ्रष्टाचारी होने की सूचना देता है। हमारे चन्दौली संवाददाता प्रदीप कुमार पाण्डेय व कमलेश नारायण सिंह ने जब स्थानीय जिला सप्लाई अधीक्षक से बात किया तो उन्होंने कहा कि कोटेदार बदमाश होगा नहीं तो नाम अनायास नहीं कटता उसकी जांच कराकर देखा जाएगा।

उल्लेखनीय है कि नाम और यूनिट कटने से पहले कोटेदार को सूचना दी जाती है। और प्रमाणन हेतु उस व्यक्ति को बुलाया जाता है। जब वह व्यक्ति लंबे समय तक नहीं आता और अपना प्रमाणन नहीं कराता या अपना आधार कार्ड मैच नहीं कराता तो उसकी यूनिट कट जाती है। रही बात राशन कार्ड कट जाने की तो यह तो हो ही नहीं सकता। फिर इसमें कहीं ना कहीं कोई साजिश है। कोटेदार और स्थानीय सप्लाई विभाग से जुड़े अधिकारियों की इस पर एक बड़ी जांच करनी चाहिए। योगीराज में जब केन्द्र के सभी निर्देशों के पूर्ण पालन की बात होती है लाकडाउन में उनके अधिकारियों के इस रवैए से गरीब लोग भूख से लड़ रहे हैं। सार्वजनिक वितरण से जुड़े लोगों का यह रवैया उनके राज्य पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।

इस स्टिंग ऑपरेशन के मामले में पाठकों को यह बताना है कि प्रमाणों के मद्देनजर अनिवार्य प्रश्न के स्टिंग आपरेशन सेल ने समाचार पत्र के लीगल सेल को इसे स्थानांतरित कर दिया है। लाकडाउन के बाद संबंधित कोटेदार रामजनम राम और हीलाहवाली करने वाले अधिकारियों के ऊपर साक्ष्यों पर आधारित धराओं में मुकदमा कायम करा दिया जाएगा। विधिक सेल के प्रमुख अधिवक्ता कमलेश चंद त्रिपाठी व अधिवक्ता अनुराग पाण्डेय ने बताया कि इन भ्रष्टाचारियों को सजा मिलनी तो निश्चित है लेकिन जो अधिकारी जानने के बाद भी इसमें कार्यवाही नहीं किए और भूखे लोगों तक भोजन नहीं पहुंचाए उनकी कुर्सी भी खतरे में आएगी।

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