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IMA and Yogguru Baba Ramdev's favor duel Sunita Johri

आईएमए एवं योगगुरु बाबा रामदेव का पक्ष द्वंद्व : सुनीता जौहरी

 


आईएमए एवं योगगुरु बाबा रामदेव के पक्ष की निष्पक्षता से अध्ययन कर एक विहंगावलोकित आलेख पेश कर रहीं हैं लेखिका सुनीता जौहरी


एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति को लेकर दिए गए अपने बयान के बाद से ही बाबा रामदेव चर्चा में हैं। अब यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इसी बीच बाबा रामदेव की एलोपैथिक पर दिए गए विवादित बयान से नाराज होकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आई एम ए) उत्तराखंड के बीच कानूनी विवाद छिड़ गया।
दरअसल पिछले दिनों एलोपैथिक पर बाबा रामदेव ने दावा किया कि कोरोना संक्रमण में एलोपैथी से महज 10 फीसद गंभीर मरीज ठीक हुए हैं जबकि योग और आयुर्वेद से 90 फीसद। उन्होंने कहा कि कोरोना का रामबाण इलाज योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा में उपलब्ध है।

पिछले दिनो इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने बाबा रामदेव के बयान पर कड़ा विरोध जताया था। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बाबा के खिलाफ राजद्रोह का केस चलाने जैसी कड़ी कार्रवाई की मांग भी की थी। आईएमए ने एलोपैथी को लेकर बाबा के ज्ञान पर तो सवाल उठाए ही साथ ही सार्वजनिक माफीनामा न होने की दशा में एक हजार करोड़ के मानहानि के दावे तक की धमकी दे डाली है। हाल ही में बाबा रामदेव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में उन्होंने एलोपैथी चिकित्सा पद्धति को ‘मूखर्तापूर्ण विज्ञान’ बताया। स्वामी रामदेव ने कहा था कि एलोपैथिक दवाएं खाने से लाखों लोगों की मौत हुई है। एलोपैथी के डॉक्टर भी अपनी जान नहीं बचा पाए। उनके इस बयान के बाद ही देशभर के डॉक्टरों में रोष बढ़ गया। आईएमए के उत्तराखंड शाखा का कहना है कि हम बाबा रामदेव के हर सवाल का जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। लेकिन इससे पहले वह खुद अपनी योग्यता साबित करें।

अगर बाबा रामदेव ने 15 दिनों के अंदर माफी नहीं मांगी तो उनके खिलाफ एक हजार करोड़ रुपए की मानहानि का दावा किया जाएगा। इस मामले में आईएमए में उत्तराखंड के सचिव डॉ अजय खन्ना ने बाबा रामदेव को घेरते हुए कहा है कि वह बिना एलोपैथी की जानकारी के उस पर फालतू की बयानबाजी कर रहे हैं। जिससे कोरोना संक्रिमतों का इलाज कर रहे डॉक्टरों का मनोबल गिरा है।

हालांकि विवाद बढ़ा तो बाबा ने तुरंत सफाई भी दे डाली, लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बाबा रामदेव को तल्ख पत्र लिख उनकी सफाई को नाकाफी बताकर कड़ी नाराजगी जाहिर की और उनको बयान वापस लेने को कहा। जिसके बाद बाबा ने अपना बयान वापस तो ले लिया, लेकिन अगले ही दिन आईएमए पर एलोपैथी से संबंधित 25 सवालों का गोला दाग दिया। बाबा रामदेव के बयान के बाद आचार्य बालकृष्ण भी उनके बचाव में उतर आए थे। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि बाबा रामदेव की मंशा एलोपैथिक दवाओं पर टिप्पणी करने की नहीं थी। वो सिर्फ व्हाट्सएप मैसेज पढ़ रहे थे।

वहीं, उन्होंने ट्विटर पर एक पोस्ट भी की जिसमें उन्होंने लिखा कि पूरे देश को क्रिश्चियनिटी में कन्वर्ट करने के षड्यंत्र के तहत योग ऋषि रामदेव को बदनाम किया जा रहा है। देशवासियों, अब तो गहरी नींद से जागो। नहीं तो आने वाली पीढ़ियां तुम्हें माफ नहीं करेंगी। आचार्य बालकृष्ण ने तो यहां तक कहा कि बाबा का विरोध एलोपैथी से नहीं है विरोध तो आईएमए में के बयान से है।

फिलहाल इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रमुख डॉक्टर जेए जया लाल ने कहा है कि अगर योग गुरु बाबा रामदेव वैक्सीन और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के खिलाफ दिया गया अपना बयान वापस लेंगे तो आईएमए भी उनके खिलाफ दर्ज रिपोर्ट और उन्हें भेजी गई मानहानि की नोटिस वापस ले लेगा।


लेखिका सुनीता जौहरी वाराणसी उत्तर प्रदेश की रहने वाली हैं।


 

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