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Launch of 'Lokshahi' mini booklet

‘लोकशाही’ लघु पुस्तिका का लोकार्पण


अनिवार्य प्रश्न। ब्यूरो संवाद।


उद्गार संगठन की 63 वीं कवि गोष्ठी संपन्न
विशेष कविता पाठ के लिए कवयित्री माधुरी मिश्रा का किया गया सत्कार


वाराणसी। ‘उद्गार’ साहित्यिक, सांस्कृतिक व सामाजिक संगठन के सहयोग से ‘स्याही प्रकाशन’ द्वारा प्रकाशित किए जाने वाले साहित्यिक लघुरचना श्रृंखला में वाराणसी के साहित्यकार विंध्याचल पांडे शगुन द्वारा रचित लघुकृति ‘लोकशाही’ का लोकार्पण दिनांक 16 मई 2022 दिन सोमवार को भोजूबीर स्थित स्याही प्रकाशन परिसर में किया गया। इस कार्यक्रम में उत्कृष्ट कविता पाठ के लिए कवित्री माधुरी मिश्रा को वरिष्ठ कवयित्री शिब्बि मंगाई द्वारा विशेष सम्मान दिया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जौनपुर के कवि आलोक द्विवेदी, संचालन वरिष्ठ कवि योगेंद्र नारायण चतुर्वेदी ‘वियोगी’ एवं धन्यवाद ज्ञापन संस्थापक व साहित्यकार छतिश द्विवेदी कुंठित’ ने किया।

कवि सगुन की लघुकृति ‘लोकशाही’ का लोकार्पण कार्यक्रम, सम्मान एवं कविता धारा के इस आयोजन में जिन कवियों ने काव्यपाठ किया उनमें आलोक द्विवेदी, डा. लियाकत अली, हर्षवर्धन ममगाई, सुनील कुमार सेठ, विंध्याचल पाण्डेय ‘शगुन’,  माधुरी मिश्रा, डा. कृष्ण प्रकाश श्रीवास्तव, कुंवर सिंह, कैलाश यादव, खलील अहमद ‘राही’, कवयित्री शिबबी ममगाईं एवं मशहूर शायर आशिक बनारसी आदि शामिल रहे। सभी ने एक से बढ़कर एक रचना का पाठ किया। कार्यक्रम में अच्छी और श्रेष्ठ रचना की प्रस्तुति के लिए आखिर में माधुरी मिश्रा का कवयित्री शिबबी ममगाईं द्वारा विशेष सम्मान किया गया। कार्यक्रम के आखिर में संस्था की ओर से धन्यवाद ज्ञापन छतिश द्विवेदी ‘कुंठित’ ने किया।

लोकशाही लघु पुस्तिका पर बोलते हुए अध्यक्ष आलोक द्विवेदी ने कहा कि यह लघु साहित्य स्याही प्रकाशन के लघुकृति प्रकाशन श्रृंखला के प्रकाशकीय कार्यों में गिनी जाएगी। यह छोटी जरूर है लेकिन एक बड़े कमरे में इक दिए की रोशनी की तरह है। यह अपनी भूमिका वैसे निभाएगी जैसे विशाल अंधेरी कोठरी में एक दीपक निभाता है। उक्त लघु पुस्तिका पर बोलते हुए साहित्यकार व प्रकाशक छतिश द्विवेदी ‘कुंठित’ ने कहा की भले ही विरोधाभास व संवेदनहीनता के वातावरण में संसार में ज्वलनशील पेट्रोलियम का समंदर भर दिया गया पर यह साहित्य की एक चिंगारी सागर भर के ज्वलनशील पदार्थों में से एक बूंद भी शेष रहने नहीं देगी। जैसे कि पेट्रोल के समंदर में एक चिंगारी डाल दिया जाए तो चिंगारी समस्त सागर को नष्ट करने के लिए काफी होती है। साहित्य और उसकी कृति कितनी भी छोटी क्यों न हो वह मनुष्य मन की संवेदनाओं को जागृत करने एवं मन की पत्थरता को मिटाने के लिए समर्थ होती है, बस जरूरत होती है तो पाठकों को पूरी भावना से उसे पढने व आत्मसात करने की।

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