अनिवार्य प्रश्न
BHU hospital maligned, changed corpses

बदनाम हुआ बीएचयू अस्पताल, बदल गई लाशें


अनिवार्य प्रश्न । ब्यूरो संवाद


वाराणसी। हजारों बार चिकित्सकों व पार्किंग के ठेकेदारों के भ्रष्टाचार से बदनाम हो चुका बीएचयू अस्पताल एक बार फिर बदनाम हो रहा है। बीएचयू अस्पताल की एक बड़ी लापरवाही लोगों के सामने आयी है, सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार एक मरीज के परिजन का शव दूसरे मृतक के परिजन को दे दिया गया है। जब दूसरे समूह के लोग अपने परिजन का शव लेने गए तो मालूम हुआ कि उनके परिजन का शव कोई और ले गया। उल्लेखनीय है कि शवों का बैग एक समान था।

वाराणासी में ही कई थानों मे थानाध्यक्ष रहे अनुपम श्रीवास्तव जो अभी फूड विजिलेंस सेल में है, उनके पिता बुजुर्ग रिटायर्ड अधिकारी थे। जो कोविड-19 से संक्रमित हो गए थे। उनका भोजूबीर स्थित एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। कल दिनांक 11 अगस्त 2020 को देर रात दशा ज्यादा खराब होने पर उक्त भोजूबीर स्थित निजी अस्पताल ने बीएचयू के लिए रेफर दिया।

जहां मध्य रात्रि लगभग दो बजे डॉक्टरों ने अनुपम श्रीवास्तव के पिता को मृत घोषित कर दिया। चिकित्सालय में कई कागजी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद शव को सौंपा जाता है। जब अनुपम श्रीवास्तव के पिता की लाश को दिया गया तो परिवारजनों ने उस लाश को अपना होने से इनकार कर दिया। तब अस्पताल वाले ने बताया कि एक लाश उन्होंने कुछ समय पहले दिया है जिसको लेकर परिजन लोग हरिश्चंद्र घाट गए हुए हैं।

जब अनुपम श्रीवास्तव का परिवार भागते हुए हरिश्चंद्र घाट पहुचा तो चिता पर उस लाश को आग लगा दी गई थी। लाश लगभग आधी से अधिक जल भी चुकी थी। प्राप्त जानकारी के मुताबिक इनके पिता की लाश डिप्टी सीएमओ जंग बहादुर के परिवारीजनों को दे दी गई थी। जंग बहादुर के परिवारीजनों ने शव लेते समय ज्यादा ध्यान नहीं दिया। यहां उल्लेखनीय है कि दूसरा शव अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ जंग बहादुर का था।

चिकिस्ता विज्ञान संस्थान में उक्त दोनों मृतकों के शवों की अदला-बदली के विषय में सर सुन्दरलाल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. एस. के. माथुर का भी वक्तव्य आया है। उन्होंने कहा है कि ‘‘एक मरीज की 12 अगस्त की भोर में दुखद मृत्यु हुई है। वे कोरोना से पीड़ित थे और इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। उसी के आस पास कोरोना से पीड़ित एक अन्य वृद्ध मरीज मृत अवस्था में आईसीयू में लाए गए। अलग-अलग स्थानों पर संपूर्ण कार्यवाही के बाद शवों को एक ही प्रकार के बॉडी बैग (कवर) में सरसुन्दर लाल अस्पताल स्थित शवगृह में रख दिया गया था।

ऐसा संज्ञान में आया है कि एक मरीज के परिजनों द्वारा दूसरे के शव को प्राप्त कर लिया गया। जबकि दूसरे मृतक के परिजनों द्वारा शव देखने पर ज्ञात हुआ कि ये शव उनके मरीज का नहीं है। यह दुखद है। इस घटना की एक समिति द्वारा जांच के आदेश दे दिये गए हैं, जो संपूर्ण तथ्यों और परिस्थितियों का विश्लेषण करेगी, इसके बाद इस संदर्भ में उचित कार्रवाई की जाएगी।’’

ऐसी अक्षम्य लापरवाहियों के जुर्म में किस अधिकारी पर क्या कार्यवाई होती है यह बनारस देखता रहा और आगे भी देखेगा। स्मृति बेहद दुःखद है।

इधर अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ जंग बहादुर के निधन की सूचना पर मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय के सीएमओ कक्ष में शोक सभा का आयोजन हुआ। जिसमें दिवंगत की आत्मा को शांति प्रदान करने की प्रार्थना की गयी। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ जंग बहादुर के परिवार के लिए दुःख की इस कठिन घड़ी में सब्र देने के लिए ईश्वर से दुआ की गई। इस अवसर पर दो मिनट का मौन भी रखा गया।

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