अनिवार्य प्रश्न
Buyers and sellers can get the land registered themselves, but advocates are not forbidden to be the medium.

क्रेता-विक्रेता स्वयं करा सकते हैं जमीन की रजिस्ट्री, किन्तु अधिवक्ताओं को माध्यम बनाने को मनाही नहीं


अनिवार्य प्रश्न। ब्यूरो संवाद


वाराणसी। प्रदेश के स्टाम्प, न्यायालय शुल्क एवं निबंधन विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवीन्द्र जायसवाल ने अपने एक पत्र में कहा है कि रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 की धारा 32 के तहत रजिस्ट्री हेतु लेखपत्रों के प्रस्तुतिकरण की व्यवस्था है। इस व्यवस्था में अधिवक्ताओं के आवश्यक रूप से सम्मिलित होने की कोई बाध्यता ना पहले थी न आज है। क्रेता-विक्रेता अगर चाहे तो अपना लेखपत्र रजिस्ट्री कार्यालय में स्वयं प्रस्तुत कर लेखपत्रों की रजिस्ट्री करा सकते हैं। रजिस्ट्री प्रक्रिया में अधिवक्ताओं को सम्मिलित करना या ना करना पूर्णतया क्रेता-विक्रेता के विचार पर है। उनके अनुसार 2017 में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को ऑनलाइन किये जाने के बाद से विभागीय वेबसाइट पर लेखपत्रों के स्वसृजित किये जाने की व्यवस्था जनसामान्य के लिए उपलब्ध करायी गयी है, इसके माध्यम से क्रेता-विक्रेता रजिस्ट्री हेतु लेखपत्र स्वयं तैयार कर सकते हैं।

ऑनलाइन व्यवस्था के अंतर्गत पक्षकार अपने सर्किल रेट का पता लगा सकते हैं एवं स्टाम्प एवं निबंधन शुल्क का ऑनलाइन भुगतान विभिन्न माध्यमों से भी कर सकते हैं। जनसामान्य में प्रचार प्रसार हेतु पूर्व में भी विभाग द्वारा पत्र जारी किया गया था। उन्होंने आगे यह भी कहा कि इस सम्बन्ध में कोई नया शासनादेश जारी नही किया गया है।

उन्होंने वर्तमान सरकार द्वारा किये जा रहे राजस्व वृद्धि के प्रयासों में अधिवक्ताओं से सकारात्मक सहयोग की माँग की है। हांलांकि अधिवक्ता समाज काफी नाराज है और जमीन के बैनामें में वकीलों की भूमिका घटाए जाने के खिलाफ आन्दोलन कर रहा है।

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