अनिवार्य प्रश्न
Akash is away from the steps, Milkha Singh is no more

कदमों से दूर हुआ आकाश, नहीं रहे मिल्खा सिंह


अनिवार्य प्रश्न। संवाद


नई दिल्ली। भारत में फ्लाइंग सिख के नाम से मशहूर भारत के श्रेष्ठ धावक मिल्खा सिंह अब हम सभी के बीच अपनी उड़ान भरने के लिए नहीं रहे। वह एक महीने तक कोरोना से जूझने के बाद शुक्रवार 18 जून 2021 को लगभग 11ः30 बजे चंडीगढ़ में अपनी अंतिम सांस लिये। दुखद है कि इसके पहले रविवार को ही उनकी पत्नी और वॉलीबॉल की एक श्रेष्ठ कप्तान रह चुकी निर्मल मिल्खा कौर भी अपना शरीर कोरोना की वजह से ही छोड़ चुकी थीं।

मिल्खा सिंह के पुत्र जीव मिल्खा सिंह ने उनके ना होने की खबर की पुष्टि की। लगभग 91 वर्ष के बेहतरीन धावक मिल्खा सिंह 1958 के राष्ट्रमंडल खेलों के हीरो रह चुके हैं। सूत्रों ने यह भी बताया है कि बीते गुरुवार को उनकी कोरोना की जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। लेकिन शुक्रवार को उनकी तबीयत और खराब हो गई। बताया जा रहा है कि उन्हें बुखार था और ऑक्सीजन भी कम हो गई थी।

चार बार एशिया महाद्वीप में खेलों के स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले मिल्खा सिंह ने 1958 में राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता था। 1960 के रोम ओलंपिक में उन्होंने अपने जीवन का सबसे शानदार प्रदर्शन किया जिसमें वह 400 मीटर की दौड़ में चैथे स्थान पर रहे थे। ‘फ्लाइंग सिख’ के नाम से मशहूर मिल्खा सिंह को एक पाकिस्तानी प्रधानमंत्री अयूब खान ने नवाजा था। आगे चलकर इसी नाम से दुनियाभर में वह जाने पहचाने गये और उनके के प्रशंसकों ने उन्हें खूब प्यार दिया।

मिल्खा सिंह के परिवार में उनके बेटे जीव मिल्खा सिंह जो कि एक गोल्फर हैं, के साथ उनकी तीन बेटियों का हरा भरा संसार है। मिल्खा सिंह पर ‘भाग मिल्खा भाग’ नाम से एक मशहूर फिल्म भी बनी थी। हालांकि मिल्खा सिंह ने इस फिल्म की कथा के पात्र संघर्ष को अपने संघर्ष से कमतर बताया था। हमारे भारत के लिए अविस्मरणीय शख्सियत रह चुके मिल्खा सिंह भारत के गौरव बढ़ाने के लिए याद किए जाते रहेंगे।

माननीय प्रधानमंत्री ने मिल्खा सिंह के लिए शोक व्यक्त करते हुए बड़े सार्थक शब्दों में संवेदना प्रकट की है। उन्होंने कहा है कि ‘श्री मिल्खा सिंह जी के निधन के साथ हमने एक ऐसा चमत्कारी खिलाड़ी खो दिया है जिसने राष्ट्र को सम्मोहित कर लिया था और अनगिनत भारतीयों के दिल में जगह बनाई थी। उनके प्रेरणादायी व्यक्तित्व ने उन्हें लाखों लोगों का प्रिय बना दिया था। उनके निधन से व्यथित हूं। मैंने कुछ ही दिन पहले श्री मिल्खा सिंह जी से बात की थी। मुझे नहीं पता था कि यह हमारी अंतिम बातचीत होगी। कई उदीयमान एथलीट उनकी जीवन यात्रा से प्रेरणा ग्रहण करेंगे। उनके परिवारजनों तथा दुनिया भर में फैले उनके प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं।’

साथ ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी मिल्खा से के निधन पर संवेदना प्रकट करते हुए कहा है कि ‘फ्लाइंग सिख’ के नाम से लोकप्रिय श्री मिल्खा सिंह की उपलब्धियां देशवासियों को हमेशा गौरवांवित करती रहेंगी। उनके निधन से खेल जगत को हुई क्षति की भरपाई होना कठिन है। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।’

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