Farmers' seminar and grafted seedling distribution program concluded at Krishi Vigyan Kendra, Chandauli.Farmers' seminar and grafted seedling distribution program concluded at Krishi Vigyan Kendra, Chandauli.

अनिवार्य प्रश्न। ब्यूरो संवाद।

चंदौली । कृषि विज्ञान केंद्र, चंदौली में सोमवार को किसान गोष्ठी एवं ग्राफ्टेड पौध वितरण कार्यक्रम का आयोजन भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी की एकीकृत बागवानी विकास मिशन परियोजना के अंतर्गत किया गया। कार्यक्रम में लगभग 36 किसानों ने प्रतिभाग किया तथा किसानों को 2200 ग्राफ्टेड बैंगन के पौधों का वितरण किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक सब्जी उत्पादन तकनीकों से जोड़ना, फसल की उत्पादकता एवं गुणवत्ता बढ़ाना तथा उन्नत तकनीकों के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि के अवसर उपलब्ध कराना रहा।

कार्यक्रम के दौरान किसानों को ग्राफ्टेड बैंगन के पौधों के महत्व एवं उपयोगिता के बारे में जानकारी दी गई। ग्राफ्टिंग तकनीक से तैयार पौधे मृदा जनित रोगों एवं विभिन्न प्रतिकूल परिस्थितियों के प्रति अधिक सहनशील होते हैं। इसके उपयोग से फसल की उत्पादकता एवं गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ उत्पादन लागत को कम करने और किसानों की लाभप्रदता बढ़ाने में सहायता मिलती है। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी के द्वारा किसानों को ग्राफ्टेड पौध तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र चंदौली के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ नरेंद्र रघुवंशी ने मुख्य अतिथि के रूप में पधारे डॉ ए.बी.सिंह को अंगवस्त्रम एवं स्मृति चिन्ह देकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया स कृषि विज्ञान केंद्र चंदौली के पहल पर एकीकृत बागवानी विकास मिशन परियोजना के अन्वेषक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अनंत बहादुर ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि ग्राफ्टिंग तकनीक आधुनिक एवं टिकाऊ सब्जी उत्पादन की दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीक है। इसके माध्यम से पौधों की वृद्धि एवं उत्पादन क्षमता में सुधार के साथ-साथ मृदा जनित रोगों तथा प्रतिकूल परिस्थितियों से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि सीमित भूमि में अधिक एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त करने के लिए किसानों को आधुनिक एवं उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने किसानों को ग्राफ्टेड पौधों के चयन, उचित रोपण विधि, सिंचाई एवं पोषण प्रबंधन तथा पौधों की नियमित निगरानी के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से बताया कि ग्राफ्टेड पौधों की रोपाई करते समय ग्राफ्ट यूनियन को मिट्टी के संपर्क में नहीं आना चाहिए, ताकि पौधे की रोग सहनशीलता एवं अन्य उपयोगी विशेषताओं का पूरा लाभ प्राप्त किया जा सके। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक प्रबंधन एवं उचित तकनीक के साथ ग्राफ्टेड सब्जियों की व्यावसायिक खेती किसानों के लिए अतिरिक्त आय का प्रभावी माध्यम बन सकती है। साथ ही, ग्राफ्टिंग तकनीक कृषि क्षेत्र में उद्यमिता एवं स्वरोजगार की नई संभावनाएँ भी विकसित कर सकती है। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र रघुवंशी ने किसानों से ग्राफ्टेड पौध तकनीक को व्यापक स्तर पर अपनाने तथा इसके लाभों को अन्य किसानों तक पहुँचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों का खेत स्तर पर व्यापक प्रसार कृषि को अधिक टिकाऊ, लाभकारी एवं आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

कार्यक्रम के दौरान शोधकर्ता अनीष कुमार सिंह ने किसानों को ग्राफ्टिंग की वैज्ञानिक विधि, ग्राफ्टेड पौधों की देखभाल, रोपण प्रबंधन, पोषण एवं सिंचाई प्रबंधन तथा व्यावसायिक सब्जी उत्पादन से संबंधित महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी प्रदान की। उन्होंने किसानों को ग्राफ्टेड पौधों के रख-रखाव एवं खेत में बेहतर स्थापना के लिए आवश्यक व्यावहारिक सुझाव वैज्ञानिक उद्यान मनीष सिंह,डॉ. अभयदीप गौतम भी दिए। कार्यक्रम में डॉ प्रतीक सिंह एवं किसानों ने ग्राफ्टेड पौध तकनीक से संबंधित अपनी जिज्ञासाएँ एवं समस्याएँ साझा कीं, जिनका वैज्ञानिकों द्वारा समाधान करते हुए आवश्यक तकनीकी सुझाव दिए गए। किसानों ने ग्राफ्टेड पौध तकनीक में विशेष रुचि दिखाई तथा इसे सब्जी उत्पादन में उपयोगी एवं लाभकारी तकनीक बताया।

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