अनिवार्य प्रश्न। संवाद। लखनऊ। नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग लगातार राजनीतिक बहस के केंद्र में है। काठमांडो से उठी यह मांग अब पूर्व से पश्चिमी नेपाल के सीमावर्ती इलाकों तक पहुंचती दिखाई दे रही है। दांग में हिंदू राष्ट्र और राजशाही की बहाली के समर्थन में बैठकों व जनसंपर्क का दौर चलने की बात सामने आ रही है। नेपाल सीमा से सटे यूपी के बलरामपुर जिले में भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर है। नेपाल के हिंदू संगठनों से जुड़े लोग इस मुद्दे पर भारत से सहयोग की उम्मीद जता रहे हैं। नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग नई नहीं है। वर्ष 2008 में राजशाही समाप्त होने के बाद देश धर्मनिरपेक्ष संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य बना। संविधान नेपाल को बहुजातीय, बहुभाषी, बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक राष्ट्र के के रूप में परिभाषित करता है। इसके बावजूद हिंदू राष्ट्र और राजशाही की बहाली की मांग समय-समय पर उठती रही है। राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) लंबे समय से सांविधानिक राजशाही और हिंदू राष्ट्र को अपने प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल करती रही है। 2026 में आरपीपी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में नेपाल को वैदिक सनातन हिंदू राष्ट्र बनाने और राजशाही बहाल करने की मांग को प्रमुखता दी। जून 2026 में पार्टी नेतृत्व ने इन मुद्दों पर जनसमर्थन बढ़ने का दावा किया। विश्व हिंदू महासंघ के दांग जिला अध्यक्ष डॉ. भोलानाथ योगी ने भारत से सहयोग की अपेक्षा जताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। उन्होंने दोनों देशों के धार्मिक, सांस्कृतिक व सामाजिक संबंधों और रोटी-बेटी के रिश्ते का हवाला दिया। हालांकि, भारत की आधिकारिक नीति नेपाल की शासन व्यवस्था या सांविधानिक पहचान तय करने के बजाय उसके साथ स्थिर, शांतिपूर्ण व समृद्ध संबंध मजबूत करने की रही है। 81.2ः हिंदू आबादी नेपाल की 2021 की जनगणना के अनुसार देश में 81.2 प्रतिशत हिंदू, 8.21 प्रतिशत बौद्ध और 5.09 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है। हिंदू राष्ट्र समर्थक संगठन बहुसंख्यक हिंदू आबादी को अपनी मांग का आधार बताते हैं, जबकि संविधान सभी धर्मों व समुदायों के अधिकारों की व्यवस्था करता है। नेपाल के सुनसरी में भड़की हिंसा के बाद पूर्व राजा ज्ञानेंद्र वीर विक्रम शाहदेव ने देश के बिगड़ते सामाजिक माहौल पर चिंता जताई है। निर्मल निवास स्थित संवाद सचिवालय की ओर से 30 जुलाई को जारी सद्भाव संदेश में उन्होंने सभी समुदायों से भाईचारा और सद्भाव बनाए रखने की अपील की। कहा, नेपाल की बहुजातीय, बहुभाषिक और धार्मिक-सांस्कृतिक विविधता उसकी विशिष्ट पहचान है। सदियों से विभिन्न जाति-समुदाय, धर्म और संस्कृतियों के लोग मिल-जुलकर रहते आए हैं। यही नेपाल के सम्मान का आधार है। उन्होंने सुनसरी के कुछ गांवों में हुए विवाद और हिंसा में जन-धन की क्षति पर दुख जताया। कहा, तनाव का कोशी क्षेत्र और तराई के अन्य हिस्सों तक फैलना चिंताजनक है। ऐसी घटनाएं नेपाल की मौलिक मान्यताओं और सामाजिक मूल्यों के विपरीत हैं। Post navigation देश को चुकानी पड़ रही कीमत में अदाणी के खिलाफ केस बंद होने पर राहुल गांधी का पीएम पर हमला