Elderly women to get free bus travel; children can be disinherited from property.Elderly women to get free bus travel; children can be disinherited from property.

अनिवार्य प्रश्न। संवाद।

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में 24 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति योजना को भी मंजूरी शामिल है। योजना के तहत प्रदेश की 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र की महिलाओं को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) की सभी बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा दी जाएगी। इस योजना का लाभ लेने के लिए महिलाओं को अपनी उम्र और पहचान प्रमाणित करने के लिए आधार कार्ड या मतदाता पहचान पत्र दिखाना होगा। वहीं, संतान देखभाल न करें तो संपत्ति से बेदखल कर सकेंगे बुजुर्ग व युवाओं के लिए 25 लाख टैबलेट खरीदने का प्रस्ताव मंजूर किया गया।

सरकार के अनुसार, इस योजना से प्रदेश की एक करोड़ से अधिक महिलाओं को लाभ मिलने की उम्मीद है। कैबिनेट के इस फैसले को वरिष्ठ महिलाओं के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। प्रदेश सरकार का कहना है कि लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति योजना के माध्यम से बुजुर्ग महिलाओं को यात्रा में आर्थिक सहायता मिलेगी और उन्हें प्रदेश में आवागमन के लिए बेहतर सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। पढ़िए कैबिनेट के बड़े फैसले…

प्रदेश के युवाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत 25 लाख टैबलेट की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। योगी सरकार ने टेंडर प्रक्रिया में चयनित संस्थाओं को क्रय आदेश जारी किए जाने की मंजूरी देकर प्रदेश के युवाओं को डिजिटल संसाधनों से जोड़ने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ये टैबलेट पात्र युवाओं को निशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे।

गौरतलब है कि स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना 5 वर्ष के लिए लागू है। योजना के तहत प्रदेश के युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए आधुनिक टैबलेट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इसके लिए 2,374.60 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। खास बात यह है कि इस योजना से केंद्र सरकार पर कोई अतिरिक्त व्यय भार नहीं पड़ेगा।

योजना के तहत स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा, कौशल विकास समेत विभिन्न शिक्षण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों में अध्ययनरत पात्र युवाओं को निशुल्क टैबलेट उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे विद्यार्थी अपने शैक्षिक पाठ्यक्रम को डिजिटल माध्यम से बेहतर ढंग से पूरा कर सकेंगे और तकनीक आधारित अध्ययन की सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। टैबलेट मिलने से युवाओं को सरकारी और गैर-सरकारी योजनाओं, ऑनलाइन प्रशिक्षण, रोजगार एवं स्वरोजगार से जुड़ी सेवाओं तक पहुंच बनाने में भी मदद मिलेगी। योगी सरकार का उद्देश्य केवल युवाओं को उपकरण उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसरों से जोड़ना है।

वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि कैबिनेट के इस निर्णय से उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, स्वास्थ्य शिक्षा, कौशल विकास प्रशिक्षण और आईटीआई से जुड़े पंजीकृत कुशल युवाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने में मदद मिलेगी। डिजिटल संसाधनों तक आसान पहुंच से प्रशिक्षण की गुणवत्ता बेहतर होने के साथ युवाओं की रोजगारपरक दक्षता भी बढ़ेगी। तकनीकी रूप से सक्षम युवा वर्ग रोजगार सृजन और सेवा क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

योगी कैबिनेट ने वरिष्ठ नागरिकों के सम्मानजनक जीवन और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए भी बड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि मंत्रिमंडल ने ‘उत्तर प्रदेश माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण नियमावली-2014’ में संशोधन करते हुए नियम 22 में 22क, 22ख और 22ग जोड़ने का निर्णय लिया है।

नए प्रावधानों के तहत मां-बाप अपने बच्चों को संपत्ति से बेदखल कर सकेंगे। इसके लिए बेदखली की प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है। यदि किसी भी वरिष्ठ नागरिक की संतान या उनके अन्य आश्रित रिश्तेदार उनका भरण-पोषण नहीं कर रहे हैं अथवा उनके साथ किसी तरह का दुर्व्यवहार कर रहे हैं तो पीड़ित बुजुर्ग उन्हें अपनी संपत्ति से बेदखल कर सकेंगे।

वित्त मंत्री ने बताया कि बुजुर्गों को इस व्यवस्था का लाभ आसानी से मिल सके, इसके लिए बेदखली की प्रक्रिया को स्पष्ट और समयबद्ध बनाया गया है। साथ ही, जल्द ही सरकार एक टोल नंबर भी जारी करेगी ताकि यदि कोई वरिष्ठ नागरिक स्वयं जाकर शिकायत करने में सक्षम न हो, तो उसे आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

नए प्रावधानों के अनुसार ऐसे मामलों में जिला मजिस्ट्रेट के पास शिकायत की जा सकेगी और उन्हें इस प्रकार के सभी मामलों की मासिक रिपोर्ट सरकार को देनी होगी। शिकायतों की सुनवाई 30 दिन के अंदर की जाएगी, ताकि बुजुर्गों को न्याय के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े।

सरकार द्वारा किए गए इस बदलाव का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके अधिकारों की रक्षा करना और उनके साथ होने वाले अत्याचार एवं दुर्व्यवहार में कमी लाना है। साथ ही, यह व्यवस्था परिवार के सदस्यों को अपने वृद्ध माता-पिता की देखभाल और उनके सम्मान के प्रति प्रेरित करेगी।

उत्तर प्रदेश में बड़े विदेशी निवेश और फॉर्च्यून-500 कंपनियों की औद्योगिक परियोजनाओं को जमीन पर उतारने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एफडीआई, विदेशी पूंजी निवेश (एफसीआई), फॉर्च्यून ग्लोबल-500 एवं फॉर्च्यून इंडिया-500 निवेश प्रोत्साहन नीति-2023 के तहत तीन परियोजनाओं को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी करने की मंजूरी दी गई। इन परियोजनाओं में कुल 2606.04 करोड़ रुपये का निवेश होगा और करीब 750 प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है। कैबिनेट की मंजूरी से अब इन परियोजनाओं को नीति के तहत निर्धारित वित्तीय प्रोत्साहनों का लाभ देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। खास बात यह है कि तीनों परियोजनाएं अलग-अलग औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ी हैं। इससे खाद्य प्रसंस्करण, पेय पदार्थ पैकेजिंग और प्लास्टिक आधारित निर्माण सामग्री के क्षेत्र में प्रदेश की औद्योगिक क्षमता बढ़ेगी।

एग्रिस्टो मासा प्राइवेट लिमिटेड बिजनौर में फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज का उत्पादन करेगी। परियोजना में 794.27 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। कंपनी बेल्जियम के एग्रिस्टो समूह और भारत के वेव समूह का संयुक्त उद्यम है। मौजूदा आलू फ्लेक्स उत्पादन के विस्तार और विविधीकरण के तहत प्रस्तावित इकाई में सालाना करीब 75 हजार मीट्रिक टन फ्रेंच फ्राइज का उत्पादन किया जाएगा। परियोजना से करीब 345 रोजगार सृजित होने का अनुमान है। इसके अलावा आलू की मांग बढ़ने से क्षेत्र के किसानों को भी स्थानीय स्तर पर बड़ा बाजार मिलने की उम्मीद है।

प्रदेश सरकार मैनपुरी के समान पक्षी विहार में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार करेगी। इसके लिए पक्षी विहार के पास ग्राम सभा की छह हेक्टेयर भूमि पर्यटन विभाग को निःशुल्क दी जाएगी। मंगलवार को कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

मैनपुरी का समान पक्षी विहार प्रदेश के प्रमुख वेटलैंड्स में एक है। लगभग 5.25 वर्ग किलोमीटर में फैले इस स्थल को 2019 में रामसर साइट घोषित किया गया था। सारस क्रेन समेत कई प्रजातियों के स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट यहां की खास पहचान है। सर्दियों के मौसम में दूर-दराज के देशों से आने वाले मेहमान पक्षियों से पूरा इलाका गुलजार हो उठता है।

पर्यटन व संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि प्रस्ताव के तहत मैनपुरी की किसनी तहसील के ग्राम समान स्थित छह हेक्टेयर ऊसर भूमि पर्यटन विभाग को दी जाएगी। ग्राम भूमि प्रबंधक समिति पर्यटन विभाग को जमीन देने का प्रस्ताव पहले ही पारित कर चुकी है। पर्यटन सुविधाओं के विकास से समान पक्षी विहार में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी।

साथ ही इसका लाभ आस-पास के क्षेत्रों में पर्यटन से जुड़े कारोबार को भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के साथ प्राकृतिक व ईको टूरिज्म की संभावनाओं को भी तेजी से विकसित किया जा रहा है। समान पक्षी विहार में पर्यटक सुविधाएं बढ़ने से देश-विदेश के पक्षी प्रेमियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। इससे मैनपुरी को पर्यटन के नक्शे पर नई पहचान मिलने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में प्रदेश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। कैबिनेट ने गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार तक विस्तारित करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण 6 लेन में किया जाएगा, जिसे भविष्य में 8 लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा।

हरिद्वार तक गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार के लिए राज्य सरकार पर संभावित 10,761 करोड़ रुपये का व्यय-भार आएगा। परियोजना में केंद्र सरकार की किसी प्रकार की वित्तीय भागीदारी अपेक्षित अथवा प्रस्तावित नहीं है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद परियोजना की डीपीआर तैयार करने सहित आगे की आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।

उत्तराखंड सीमा से लगे बिजनौर जिले से हरिद्वार जाने के लिए वर्तमान में प्रमुख रूप से एनएच-34 (मेरठ-बिजनौर-हरिद्वार राष्ट्रीय मार्ग) की सुविधा उपलब्ध है। गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक विस्तार से बिजनौर को हरिद्वार से बेहतर और तेज कनेक्टिविटी मिल सकेगी।इसके साथ ही बिजनौर की कनेक्टिविटी गंगा एक्सप्रेसवे के माध्यम से प्रदेश की राजधानी लखनऊ से भी बेहतर होगी। इससे क्षेत्र में व्यापार, निवेश, उद्योग और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक पहुंचने से गंगा के तट पर स्थित दो प्रमुख कुम्भ नगरियों, प्रयागराज और हरिद्वार के बीच प्रवेश नियंत्रित एक्सप्रेसवे नेटवर्क के माध्यम से तेज और सुगम यातायात सुविधा विकसित होगी। इससे धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए दोनों धार्मिक नगरियों के बीच आवागमन अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद है।

एक्सप्रेसवे के विस्तार से धार्मिक पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। बेहतर कनेक्टिविटी से हरिद्वार, बिजनौर और गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़े अन्य क्षेत्रों में पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल सकती है। परियोजना के निर्माण और इससे उत्पन्न होने वाली आर्थिक गतिविधियों के माध्यम से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है। इससे क्षेत्र के आर्थिक एवं सामाजिक विकास को भी नई गति मिलेगी।

कैबिनेट ने सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए उप्र राज्य सड़क परिवहन निगम के बेड़े को मजबूत करने के लिए 250 नई वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों की खरीद का प्रस्ताव मंजूर कर लिया। इसके लिए 400 करोड़ रुपये की धनराशि को मंजूरी देने का निर्णय लिया गया है।

प्रस्ताव के तहत 50 सीटर वाली 100 बसें और 41 सीटर वाली 150 बसें खरीदी जाएंगी। इन 250 बसों की कुल खरीद पर करीब 425.50 करोड़ रुपये का व्यय संभावित है। सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली 400 करोड़ रुपये की धनराशि के अतिरिक्त करीब 25.50 करोड़ रुपये का खर्च राज्य सड़क परिवहन निगम अपने संसाधनों से वहन करेगा।

इस फैसले का एक अहम पहलू राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना भी है। सीपीक्यूएम के निर्देशों के अनुसार 1 नवंबर 2026 से दिल्ली में केवल सीएनजी, इलेक्ट्रिक और बीएस-6 वाहनों को प्रवेश की अनुमति होगी। ऐसे में इलेक्ट्रिक बसों के बेड़े का विस्तार यूपी से दिल्ली आने-जाने वाले सार्वजनिक परिवहन को इन पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप बनाने में मदद करेगा।

साथ ही नई इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों के लिए परिवहन सेवाओं को भी बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इलेक्ट्रिक बसें पर्यावरण के अनुकूल यात्रा सुविधा उपलब्ध कराने के साथ आम यात्रियों को आधुनिक और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन का विकल्प देंगी।

इसके साथ ही बस बेड़े के विस्तार से चालकों, परिचालकों और तकनीकी रख-रखाव से जुड़े कुशल-अकुशल कर्मियों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। बसों की संख्या में वृद्धि से ढाबा, रेस्टोरेंट और अन्य यात्री सुविधाओं से जुड़े रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के निकट सुलतानपुर में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (आईएमएलसी) की स्थापना को मंजूरी दे दी गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के बुनियादी ढांचा विकास और निर्माण कार्यों के लिए करीब 272.25 करोड़ रुपये के बजट प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई है।

क्लस्टर का विकास उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) कराएगा। यूपीडा प्रदेश के विभिन्न एक्सप्रेसवे के किनारे इंडस्ट्रियल कॉरिडोर योजना के तहत कुल 29 स्थलों पर ऐसे औद्योगिक क्लस्टर विकसित कर रहा है।

सुलतानपुर में विकसित होने वाले इस क्लस्टर में 2-लेन और 4-लेन की आंतरिक सड़कों का व्यापक नेटवर्क तैयार किया जाएगा। परियोजना के तहत कुल 11,620 मीटर आंतरिक मार्ग और 2,000 मीटर लंबी एप्रोच रोड का निर्माण प्रस्तावित है।

इसके अलावा अत्याधुनिक बुनियादी सुविधाओं के तहत आरसीसी नालियां, कल्वर्ट, आधुनिक फायर स्टेशन, ओवरहेड वॉटर टैंक, वाटर सप्लाई नेटवर्क, बाउंड्री फेंसिंग और 132/33/11 केवी का विद्युत उपकेंद्र भी बनाया जाएगा।परियोजना के सभी निर्माण कार्य ईपीसी यानी इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन मोड पर कराए जाएंगे। इसके लिए ग्लोबल बिड आमंत्रित कर निर्माण कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की योजना है।

सरकार का मानना है कि इस औद्योगिक क्लस्टर की स्थापना से सुलतानपुर और आसपास के जिलों में बड़े औद्योगिक निवेश का रास्ता खुलेगा। उद्योगों के आने से पूर्वांचल के आर्थिक विकास को गति मिलेगी और स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे ग्रिड को और मजबूत करते हुए कैबिनेट ने झांसी लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना के विकास प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण पर 7,968.30 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत आएगी, जिसका पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेग।

यह नया संपर्क मार्ग बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के चौनेज 170$300 (जालौन के ग्राम फूलपुरा के निकट) से शुरू होकर उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर (राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 44) पर अम्बाबाई (झांसी) तक जाएगा। 106.30 किलोमीटर लंबी यह परियोजना शुरुआत में प्रवेश-नियंत्रित 6-लेन की होगी, जिसे भविष्य में 8-लेन तक विस्तारित किया जा सकेग।

इसकी डिजाइन स्पीड 120 किमी/घंटा तय की गई है। यह मार्ग जालौन (उरई) और झांसी की चार तहसीलों (गरौठा, टहरौली, मोठ व झांसी प्रथम) से होकर गुजरेगी, जिसके लिए 110 मीटर चौड़ा राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) अधिग्रहित किया जाएगा।

ईपीसी पद्धति पर दो पैकेजों में होगा निर्माणवित्तीय मूल्यांकन के बाद इस परियोजना को पीपीपी के बजाय ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेन्ट एवं कन्सट्रक्शन) पद्धति पर दो पैकेजों में विकसित करने का निर्णय लिया गया है। इस एक्सप्रेसवे के बनने से गरौठा के पास बन रहे डिफेन्स इंडस्ट्रियल कॉरिडोर नोड और बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) क्षेत्र को देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क से सीधी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी मिल जाएगी। इसके साथ ही झांसी किला, ओरछा के श्रीरामराजा मंदिर, दतिया पीताम्बरा पीठ और सोनागीर जैन तीर्थ जैसे प्रमुख धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों तक श्रद्धालुओं का आवागमन बेहद सुगम और सुरक्षित हो जाएगा।

कैबिनेट ने पुलिस विभाग को 1323 वाहन खरीदने की मंजूरी दी है। इसमें 87.36 करोड़ रुपये व्यय होंगे। कैबिनेट में पेश गृह विभाग के प्रस्ताव के मुताबिक जिलों में निष्प्रयोज्य वाहनों एवं स्क्रैप वाहनों की जगह 1057 नए वाहन खरीदे जाएंगे। इससे पुलिस का वाहन बेड़ा मजबूत होगा जिससे कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण में मदद मिलेगी। इन वाहनों की खरीद वर्तमान वित्तीय वर्ष में की जाएगी।

सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) के 50 प्रतिशत पद सीधी भर्ती से भरे जाएंगे। इस संबंध में लाए गए प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंगलवार को हरी झंडी दे दी। वर्तमान में सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) सेवा नियमावली में 100 प्रतिशत पद प्रोन्नति से भरे जाते हैं। अब नियमावली में 50 प्रतिशत पद सीधी भर्ती और 50 प्रतिशत प्रोन्नति से भरे जाने के लिए आवश्यक संशोधन का रास्ता साफ हो गया है। शासन का मानना है कि इससे एडीओ पंचायत के स्तर पर अधिक कुशल युवा मिल सकेंगे।

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