‘अनिवार्य प्रश्न’ समाचार पत्र व वेब “हर कलम बिकती नहीं” आज के समय में जब समाचार माध्यमों का एक बड़ा वर्ग केवल तात्कालिक सूचना, प्रचार और मनोरंजन तक सीमित होता जा रहा है, ऐसे दौर में ‘अनिवार्य प्रश्न’ समाचार पत्र व वेब एक वैचारिक, सत्यनिष्ठ और निष्पक्ष मंच के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। यह केवल समाचार प्रस्तुत करने वाला माध्यम नहीं, बल्कि समाज, साहित्य, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को गंभीरता से देखने-समझने वाला एक वैचारिक समूह है। ‘अनिवार्य प्रश्न’ का मूल उद्देश्य केवल घटनाओं की जानकारी देना नहीं, बल्कि उनके पीछे छिपे सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय पक्षों को उजागर करना है। यह संस्थान मानता है कि समाचार समाज की चेतना को प्रभावित करते हैं और लेखन व्यक्ति की विचारधारा के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी कारण यहाँ प्रकाशित प्रत्येक सामग्री को गहन दृष्टि, संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व के साथ प्रस्तुत किया जाता है। इस संस्थान की विचारधारा में साहित्य और भाषा को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। ‘अनिवार्य प्रश्न’ के लिए साहित्य केवल रचनात्मक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि समाज की आत्मा है। भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, विचार और सभ्यता की वाहक है। यही कारण है कि यह मंच साहित्यिक, सामाजिक और वैचारिक विषयों को विशेष प्राथमिकता देता है। फिल्मों और मनोरंजन जगत को लेकर भी ‘अनिवार्य प्रश्न’ की दृष्टि अत्यंत गंभीर और सार्थक है। यह संस्थान फिल्मों को केवल मनोरंजन का साधन नहीं मानता, बल्कि उन्हें समाज-निर्माण की प्रभावशाली सामग्री के रूप में देखता है। इसके अनुसार सिनेमा समाज की मानसिकता, संस्कार और दिशा तय करने की क्षमता रखता है, इसलिए उसका मूल्यांकन केवल लोकप्रियता या व्यवसायिकता के आधार पर नहीं, बल्कि उसके सामाजिक प्रभाव के आधार पर किया जाना चाहिए। इसी प्रकार राजनीति, शिक्षा, संस्कृति, धर्म, सामाजिक व्यवस्था तथा समसामयिक विषयों पर प्रस्तुत समाचार और लेख भी केवल सूचनात्मक नहीं होते, बल्कि समाज को सोचने और आत्ममंथन करने के लिए प्रेरित करते हैं। ‘अनिवार्य प्रश्न’ का विश्वास है कि पत्रकारिता का उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि सत्य को निर्भीकता से सामने लाना और जनचेतना को जागृत करना भी है। इस संस्थान की स्थापना वरिष्ठ संपादक, पत्रकार तथा स्याही प्रकाशन के यशश्वी प्रकाशक पं. छतिश द्विवेदी ‘कुंठित’ द्वारा की गई है। पत्रकारिता, साहित्य और सामाजिक चिंतन के क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव, स्पष्ट दृष्टिकोण और निष्पक्ष विचारधारा ने ‘अनिवार्य प्रश्न’ को एक सशक्त वैचारिक पहचान प्रदान की है। “हर कलम बिकती नहीं” — यह केवल ‘अनिवार्य प्रश्न’ की टैग लाइन नहीं, बल्कि इसकी मूल आत्मा है। यह वाक्य संस्थान की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है जिसमें सत्य, निष्पक्षता, वैचारिक स्वतंत्रता और सामाजिक उत्तरदायित्व को सर्वोपरि माना गया है। ‘अनिवार्य प्रश्न’ निरंतर उसी पत्रकारिता की परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है जिसमें कलम सत्ता या स्वार्थ की नहीं, बल्कि सत्य और समाज की पक्षधर होती है।