Author: Anivarya Prashna News

‘प्रबोध पथ’ खुली पाठशाला है, जहाँ अवलोकन ही अध्ययन है और जिज्ञासा ही दिशा — पं० छतिश द्विवेदी ‘कुण्ठित’

‘प्रबोध पथ’ के प्रथम चरण में प्रबुद्धजनों ने किया कबीर प्राकट्य स्थली व जनकवि धूमिल के गाँव का दौरा वाराणसी। साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था ‘उद्गार’ एवं ‘स्याही प्रकाशन’, ‘काशी…

मृत्यु के बाद उपयोगी बनना है, तो देहदान करें :   कल्पना पांडे

आलेख। कुछ महीने पहले मैंने देहदान का निर्णय लिया और मुंबई के के.ई.एम. अस्पताल जाकर उसकी औपचारिक प्रक्रिया पूरी की। समाज में मृत्यु संबंधी अंधविश्वासों, रूढ़ियों और गलतफहमियों को दूर…

प्रकृति का न्याय: धूप, हवा और पानी की तरह बुद्धि का वितरण भी सभी के लिए समान — डॉ. दयाराम विश्वकर्मा

बुद्धि एक ऐसी मानसिक क्षमता है जो तर्क करने, योजना बनाने, समस्याओं को हल करने, अमूर्त रूप से सोचने व अनुभवों से सीखने में मदद करती है। यह प्रकृति द्वारा…

अधिकारी होना: मज़ा भी और सज़ा भी : डॉक्टर दयाराम विश्वकर्मा

हाँ, तो बात हो रही थी— “अधिकारी होना: मज़ा भी और सज़ा भी।” तो आइए देखें कैसे अधिकारी होना मज़ा और सज़ा दोनों होता है। अधिकारी बनने पर जहाँ एक…

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