अनिवार्य प्रश्न। ब्यूरो संवाद। वाराणसी। काशी के भदैनी मोहल्ले में लोलार्क षष्ठी पर्व को लेकर देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ पड़ा है। बृहस्पतिवार की सुबह से लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। संतान और पुत्र रत्न की अभिलाषा लिए लगभग दो लाख भक्त लोलार्क कुंड पहुंचे हैं। आस्था का आलम यह है कि बुधवार की रात 12 बजते ही कुंड में स्नान का सिलसिला शुरू हो गया, जबकि ज्योतिषियों के मुताबिक बृहस्पतिवार की सुबह 6ः31 से 10ः26 बजे तक पूजा-अर्चना और स्नान का सबसे शुभ काल है। लोलार्क कुंड में आस्था की डुबकी लगाने के लिए यूपी, बिहार और झारखंड सहित 10 राज्यों से दंपती पहुंचे हैं। भदैनी से शिवाला तक तीन किलोमीटर लंबी बैरिकेडिंग की गई है। कुंड परिसर और बैरिकेडिंग के भीतर ही हजारों लोगों ने रात बिताई, ताकि शुभ मुहूर्त में डुबकी लगाने का अवसर न छूटे। भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के लिए स्थानीय प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए हैं। मंदिर के मुख्य पुजारी रमेश कुमार पांडेय ने बताया कि दंपती एक साथ कुंड के पवित्र जल में तीन बार डुबकी लगाते हैं। स्नान संपन्न होते ही कुंड में एक फल समर्पित किया जाता है और भीगे वस्त्र वहीं छोड़ दिए जाते हैं। मान्यता है कि इससे पूर्व के समस्त कष्ट और ग्रह-बाधाएं छूट जाती हैं। इसके पश्चात श्रद्धालु लोलार्केश्वर महादेव की विधिवत पूजा कर वंश वृद्धि का आशीर्वाद मांगते हैं। यह कुंड अपनी अनूठी बनावट के लिए जाना जाता है। लगभग 50 फीट गहराई और 15 फीट चौड़ाई वाला यह जलाशय नीचे उतरते हुए उल्टे पिरामिड का आकार लेता है, जहां तीन दिशाओं से सीढ़ियां उतरती हैं। धार्मिक दृष्टि से इसे सूर्य उपासना का दुर्लभ केंद्र माना गया है, जहां सौर ऊर्जा और मां गंगा के जल का अद्भुत संगम होता है। लोलार्क षष्ठी पर रविंद्रपुरी स्थित क्रीं कुंड पर भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। स्नान और दर्शन-पूजन के लिए दूर-दराज से पहुंचे भक्तों की मौजूदगी से पूरा परिसर खचाखच भर गया। बाबा कीनाराम के जन्मोत्सव (कीनाराम षष्ठी) के उपलक्ष्य में बृहस्पतिवार को क्रीं कुंड में विविध धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन तय है। सुबह परिसर में श्रमदान और स्वच्छता अभियान के बाद आरती संपन्न की जाएगी। Post navigation सृष्टि के शिल्पी भगवान विश्वकर्मा, नए भारत के शिल्पी मोदी – सीएम योगी