FDA's strict directive: Ban on the sale of chocolates, chips, and cold drinks in Maharashtra schools.FDA's strict directive: Ban on the sale of chocolates, chips, and cold drinks in Maharashtra schools.

अनिवार्य प्रश्न। संवाद।

महाराष्ट्र। खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर बढ़ती सख्ती के बीच महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने राज्य के सभी स्कूलों को अपने परिसर से चॉकलेट, चिप्स और कोल्ड ड्रिंक जैसे सेहत के लिए नुकसानदेह खाद्य पदार्थों को पूरी तरह हटाने का आदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि साल 2020 में लागू केंद्र सरकार के नियमों का बड़े पैमाने पर पालन नहीं किया जा रहा है।

नए निर्देशों के अनुसार, ज्यादा फैट, ट्रांस-फैट, अतिरिक्त चीनी या ज्यादा नमक वाले खाद्य पदार्थों, जिनमें कार्बाेनेटेड ड्रिंक्स और पैक्ड स्नैक्स शामिल हैं, की स्कूल परिसर में बिक्री या प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक रहेगी। इतना ही नहीं, स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में ऐसे उत्पादों के विज्ञापनों पर भी पाबंदी लगा दी गई है। सरकारी, अनुदान प्राप्त और प्राइवेट, सभी तरह के स्कूलों को भोजन में फल, सब्जियां, अनाज, दालें और डेयरी प्रोडक्ट्स शामिल करने को कहा गया है।

तुकाराम मुंढे ने मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि बच्चों के लिए नुकसानदेह खाद्य पदार्थों की पूरी सूची एफडीए की वेबसाइट पर उपलब्ध है। उन्होंने साफ कहा कि कोल्ड ड्रिंक, चॉकलेट और कैफीन वाले पेय स्कूल और उसके 50 मीटर के दायरे में नहीं मिलने चाहिए। जब उनसे पूछा गया कि क्या अजीनोमोटो वाला चाइनीज खाना स्कूलों के आसपास बेचा जा सकता है, तो उन्होंने साफ लहजे में श्ना कहा। उन्होंने दोहराया कि इस कदम का मकसद छात्रों की सेहत में सुधार लाना है।

यह निर्देश प्री-प्राइमरी से लेकर हायर सेकेंडरी, रेजिडेंशियल स्कूलों, हॉस्टलों और राज्य बोर्ड, सीबीएसई, आईसीएसई से जुड़े सभी संस्थानों पर लागू होगा। इसके दायरे में स्कूल कैंटीन, मिड-डे मील देने वाली एजेंसियां और आसपास की खाने-पीने की दुकानें भी आएंगी। स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि परोसा जाने वाला खाना तय पोषण मानकों के मुताबिक हो। एफडीए ने पाया कि कई स्कूल कैंटीन बिना रजिस्ट्रेशन के चल रही हैं और नियमों के बावजूद ऐसे उत्पाद बेचे जा रहे हैं।

नियमों का पालन कराने के लिए तुकाराम मुंढे ने हर स्कूल में एक नोडल ऑफिसर नियुक्त करने और उसे ट्रेनिंग देने के निर्देश दिए हैं। स्कूलों को मेन गेट पर चेतावनी बोर्ड लगाने, फूड बिजनेस लाइसेंस प्रदर्शित करने और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अनहेल्दी खाने का विज्ञापन ना दिखाने का आदेश दिया गया है। शिक्षा विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि पीएम पोषण योजना के तहत खाना सप्लाई करने वाली एजेंसियों के पास वैध लाइसेंस हो। नियमों के पालन को स्कूल की मान्यता प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा और बार-बार उल्लंघन करने पर स्कूल की मान्यता भी रद्द की जा सकती है। मुंढे ने कहा कि यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू होगा और इसके लिए कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।

आदेश के तहत खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को साल में कम से कम दो बार हर स्कूल का मुआयना करना होगा। इस दौरान लाइसेंस, साफ-सफाई और 50 मीटर के दायरे में नियमों के पालन की जांच होगी। साथ ही साल में कम से कम एक बार खाने के सैंपल भी लिए जाएंगे। नियमों के गंभीर उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई और कड़ी सजा का प्रावधान भी किया गया है। तुकाराम मुंढे ने कहा कि यह काम चुनौतीपूर्ण है, लेकिन बच्चों की सेहत सुधारने का एक बड़ा मौका भी है।

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