Rajasthan has carved a niche for itself in the implementation of the PM Setu Yojana, becoming the first state in North India to do so.Rajasthan has carved a niche for itself in the implementation of the PM Setu Yojana, becoming the first state in North India to do so.

अनिवार्य प्रश्न। संवाद।

जयपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्किल इंडिया मिशन और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य के अनुरूप राजस्थान ने प्रधानमंत्री सेतु (पीएम सेतु) योजना के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश इस योजना को लागू करने वाला उत्तर भारत का पहला और देश का पांचवां राज्य बन गया है। योजना का उद्देश्य राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को आधुनिक तकनीक, उद्योगों की भागीदारी और रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण से सशक्त बनाना है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास अध्यक्षता में शुक्रवार को आयोजित स्टेट स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में भिवाड़ी क्लस्टर के लिए एक कंपनी के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही राजस्थान में पीएम सेतु योजना के तहत आईटीआई उन्नयन की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है। अब इस प्रस्ताव को राष्ट्रीय स्टीयरिंग कमेटी की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद संबंधित कंपनी के साथ आवश्यक समझौते किए जाएंगे। इसके बाद भिवाड़ी क्लस्टर के चयनित राजकीय आईटीआई में उद्योगों की भागीदारी से आधुनिक आधारभूत ढांचे का विकास, अत्याधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं का विस्तार, उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम, प्रशिक्षकों का कौशल उन्नयन तथा युवाओं के लिए बेहतर रोजगार अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य शुरू होगा। प्रदेश में इस योजना के तहत भिवाड़ी, जयपुर, जोधपुर, बालोतरा, बांसवाड़ा, भरतपुर, बीकानेर और कोटा सहित आठ औद्योगिक क्लस्टरों के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए गए थे। इनमें सबसे पहले भिवाड़ी क्लस्टर के प्रस्ताव को स्वीकृति मिली है। उल्लेखनीय है कि कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय ने 4 अक्टूबर 2025 को पीएम सेतु योजना शुरू की थी। इसके तहत देशभर की एक हजार राजकीय आईटीआई को हब-एंड-स्पोक मॉडल पर विकसित किया जाना है। योजना का कुल परिव्यय 60 हजार करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है, जिसमें केंद्र सरकार, राज्य सरकार और उद्योगों की क्रमशः 50, 33 और 17 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी। राज्य सरकार का कहना है कि इस योजना से आईटीआई को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित कर युवाओं की रोजगार क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।

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