The Delhi government has taken cognizance of the matter; Shashank Shekhar Tripathi's complaint has been forwarded to the concerned minister, and an impartial inquiry into the 'Vande Mataram' incident has been demanded.The Delhi government has taken cognizance of the matter; Shashank Shekhar Tripathi's complaint has been forwarded to the concerned minister, and an impartial inquiry into the 'Vande Mataram' incident has been demanded.

अनिवार्य प्रश्न। ब्यूरो संवाद।

वाराणसी। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रगीत “वंदे मातरम्” के गायन में कथित व्यवधान के आरोपों को लेकर अधिवक्ता, भारतीय जनता पार्टी विधि प्रकोष्ठ काशी क्षेत्र के संयोजक एवं दी बनारस बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शशांक शेखर त्रिपाठी द्वारा भेजे गए शिकायती प्रार्थना-पत्र पर दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री कार्यालय ने संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने शिकायत को संबंधित मंत्री के कार्यालय को आगे की आवश्यक कार्रवाई (थ्नतजीमत छमबमेेंतल ।बजपवद) के लिए अग्रसारित कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, शशांक शेखर त्रिपाठी ने 15 अगस्त 2026 को महामहिम राष्ट्रपति, दिल्ली के उपराज्यपाल, दिल्ली की मुख्यमंत्री, दिल्ली पुलिस आयुक्त तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को शिकायती प्रार्थना-पत्र भेजा था। मुख्यमंत्री कार्यालय के आधिकारिक ईमेल से 16 अगस्त 2026 को उन्हें सूचित किया गया कि शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय को प्राप्त हुई है तथा यह विषय संबंधित विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसलिए मामले को संबंधित मंत्री के कार्यालय को आवश्यक कार्रवाई हेतु भेज दिया गया है।

राष्ट्रीय सम्मान और कानून के समान अनुपालन का मामला

शशांक शेखर त्रिपाठी ने कहा कि उनकी शिकायत किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति को निशाना बनाने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान और कानून के समान अनुपालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय महत्व के अवसर पर यदि राष्ट्रगीत के गायन में व्यवधान उत्पन्न करने का आरोप सामने आता है तो उसकी निष्पक्ष और तथ्यपरक जांच आवश्यक है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की राजनीतिक पहचान, पद अथवा सार्वजनिक प्रतिष्ठा कानून से ऊपर नहीं हो सकती और कानून की नजर में सभी नागरिक समान हैं।

सोनिया गांधी, खड़गे और राहुल गांधी की मौजूदगी वाला कार्यक्रम

प्रार्थना-पत्र में 15 अगस्त 2026 को दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित ध्वजारोहण कार्यक्रम का उल्लेख किया गया है, जिसमें कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी उपस्थित थे। शिकायत में कहा गया है कि उपलब्ध सार्वजनिक वीडियो फुटेज के आधार पर कुछ हाव-भाव और इशारों को लेकर यह आरोप सामने आया कि राष्ट्रगीत के पूर्ण गायन में व्यवधान डालने का प्रयास किया गया। हालांकि, शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि कांग्रेस की ओर से इस आरोप का खंडन किया गया है और कहा गया है कि कोई व्यवधान नहीं हुआ था। इसी कारण त्रिपाठी ने जांच से पहले किसी को दोषी घोषित करने के बजाय मूल वीडियो, ऑडियो, सीसीटीवी फुटेज तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर वास्तविकता निर्धारित करने की मांग की है।

डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने की मांग

शिकायत में घटना से संबंधित सभी महत्वपूर्ण साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित रखने की मांग की गई है। इनमें कार्यक्रम की मूल वीडियो रिकॉर्डिंग, आधिकारिक ऑडियो, समाचार चौनलों की फुटेज, सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, कार्यक्रम की आधिकारिक स्क्रिप्ट, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान तथा अन्य डिजिटल साक्ष्य शामिल हैं। आवश्यकता पड़ने पर फॉरेंसिक और साइबर जांच कराने का भी आग्रह किया गया है।

संशोधित कानून के तहत जांच की मांग

शशांक शेखर त्रिपाठी ने अपने प्रार्थना-पत्र में च्तमअमदजपवद व िप्देनसजे जव छंजपवदंस भ्वदवनत ।बज, 1971 की संशोधित धारा 3 का उल्लेख करते हुए कहा है कि राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम्” को वैधानिक संरक्षण मिलने के बाद इस प्रकार के आरोपों की गंभीरता और बढ़ जाती है। उन्होंने मांग की है कि यदि जांच में किसी प्रकार का जानबूझकर व्यवधान प्रमाणित होता है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

मुख्यमंत्री कार्यालय की कार्रवाई का स्वागत

मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा शिकायत को संबंधित मंत्री के कार्यालय को भेजे जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए शशांक शेखर त्रिपाठी ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दिल्ली पुलिस और संबंधित विभाग मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र और वैज्ञानिक जांच करेंगे। उन्होंने कहा, “मेरा उद्देश्य किसी व्यक्ति को जांच और न्यायिक प्रक्रिया से पहले दोषी ठहराना नहीं है। मेरी मांग केवल यह है कि राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े इस गंभीर आरोप की निष्पक्ष जांच हो और कानून सभी के लिए समान रूप से लागू हो।” त्रिपाठी ने कांग्रेस नेतृत्व से भी जांच में सहयोग करने और उपलब्ध मूल रिकॉर्ड जांच एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत करने की अपील की है।

दिल्ली पुलिस से विधिसम्मत कार्रवाई की अपेक्षा

शिकायतकर्ता ने दिल्ली पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच, प्रथमदृष्टया संज्ञेय अपराध पाए जाने पर एफआईआर दर्ज करने तथा सभी डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में कोई अपराध नहीं बनता है तो उसके कारणों सहित उन्हें लिखित रूप से अवगत कराया जाए ताकि आवश्यक विधिक प्रक्रिया अपनाई जा सके। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े मामलों में राजनीति नहीं, बल्कि निष्पक्ष और तथ्याधारित जांच ही लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून के शासन की वास्तविक कसौटी है।

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