मई और जून की तपती गर्मी और झुलसा देने वाली लू से बचने के लिए प्रकृति ने हमें कई बेहतरीन चीजें दी हैं, जिनमें ‘बेल’ (Wood Apple) का स्थान सबसे खास है। बेल को हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है, लेकिन इसके औषधीय गुण भी बेमिसाल हैं। आयुर्वेद में इसे पेट की बीमारियों के लिए रामबाण माना गया है। गर्मियों के मौसम में बेल का सेवन किसी अमृत से कम नहीं है, क्योंकि यह न सिर्फ शरीर को भयंकर गर्मी से बचाता है, बल्कि कई तरह की मौसमी बीमारियों से भी हमारी रक्षा करता है। गर्मी के दिनों में बेल के फायदे अनगिनत हैं। इसकी तासीर बेहद ठंडी होती है, इसलिए बेल का शरबत पीने से शरीर अंदर से ठंडा रहता है और लू लगने का खतरा काफी कम हो जाता है। बेल में फाइबर की भरपूर मात्रा पाई जाती है, जो कब्ज, गैस, एसिडिटी और अपच जैसी पेट की समस्याओं को दूर करने में बेहद कारगर है। इसके अलावा, पसीने के कारण शरीर में होने वाली पानी और ऊर्जा की कमी को भी बेल तुरंत दूर करता है। इसमें मौजूद प्रोटीन, बीटा-कैरोटीन, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं और रक्तचाप व कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में भी मददगार साबित होते हैं। बेल का उपयोग अपनी दिनचर्या में कई तरीकों से किया जा सकता है, जिनमें इसका शरबत सबसे ज्यादा लोकप्रिय और स्वादिष्ट विकल्प है। इसे बनाने के लिए पके हुए बेल को फोड़कर उसका गूदा निकाल लिया जाता है और फिर उसे पानी में अच्छी तरह मैश करके बीजों व रेशों को छान लिया जाता है। स्वाद और ठंडक बढ़ाने के लिए इसमें भुना हुआ जीरा, काला नमक और पुदीने की पत्तियां मिलाई जा सकती हैं। इसके अलावा, आप पके हुए बेल का गूदा सीधे भी खा सकते हैं। आयुर्वेद में पेट के पुराने रोगों और पेचिश जैसी समस्याओं के लिए बेल के मुरब्बे को सुबह खाली पेट खाने की विशेष सलाह दी जाती है। वहीं, कच्चे बेल को सुखाकर बनाया गया चूर्ण भी पेट खराब होने या डायरिया जैसी स्थिति में हल्के गर्म पानी के साथ लिया जाता है। बेल सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है, लेकिन इसके सेवन में कुछ सामान्य सावधानियां बरतना भी जरूरी है। एक ही बार में बहुत अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से पेट भारी होने की समस्या हो सकती है। अगर आप मधुमेह (Diabetes) के मरीज हैं, तो बेल के शरबत में अलग से चीनी या गुड़ मिलाने से बचें और डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसका सेवन करें, क्योंकि पके बेल में पहले से ही प्राकृतिक मिठास काफी अधिक होती है। साथ ही, गर्भवती महिलाओं को भी इसे अपने आहार में नियमित रूप से शामिल करने से पहले चिकित्सकीय परामर्श जरूर लेना चाहिए। गर्मियों के मौसम में कृत्रिम कोल्ड ड्रिंक्स या पैक्ड जूस के बजाय बेल का प्राकृतिक सेवन आपको पूरी गर्मी तरोताजा और बीमारियों से दूर रखेगा। Post navigation जनजातीय गरिमा को प्रौद्योगिकी का समर्थन – श्रीमती रंजना चोपड़ा