Authority to recruit doctors withdrawn from CMOs in the state.Authority to recruit doctors withdrawn from CMOs in the state.

अनिवार्य प्रश्न। संवाद।

लखनऊ। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत डॉक्टरों की भर्ती का अधिकार मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) से वापस ले लिया गया है। भर्ती में गड़बड़ी के आरोप सही मिलने पर शासन ने यह अधिकार छीन लिया है। शासन ने भर्ती का अधिकार एनएचएम को दे दिया है। एनएचएम की जीएम मानव संसाधन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये निर्देश दिए हैं। एनएचएम की जीएम मानव संसाधन ने स्पष्ट किया है कि डॉक्टरों के साक्षात्कार की पूरी प्रक्रिया अब एनएचएम के जरिये की जाएगी। ये निर्देश ऑनलाइन वीडियो बैठक के माध्यम से सभी संबंधित अधिकारियों को दिए गए। राज्य स्तर से जिलों में खाली पदों की संख्या और भर्ती की समय-सीमा के बारे में जानकारी दी जाएगी।

अस्पतालों व मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग कर्मियों का वर्दी भत्ता 2500 रुपये से बढ़ाकर 4500 रुपये कर दिया गया है। यह भत्ता अब तीन साल में ही मिलेगा। पहले पांच साल में मिलता था। इस फैसले से विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई करने वाले नर्सिंग छात्रों को भी मिलेगा। वेतन समिति 2016 के सातवें प्रतिवेदन के जरिये वर्दी भत्ता बढ़ाया गया है। फैसले से प्रदेश के करीब 15 हजार नर्सिंग कर्मियों को सीधा फायदा मिलेगा।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग के तहत कार्यरत नर्सिंग कर्मी लंबे समय से इस भत्ते की मांग कर रहे हैं। हालांकि, केजीएमयू, संजय गांधी पीजीआई सहित चिकित्सा संस्थानों में यह भत्ता मिल रहा है। वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार ने वर्दी भत्ता स्वीकृत करते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजा है। वर्दी धुलाई भत्ता भी 100 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। वर्दी भत्ता जारी होने पर स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय नर्सिंग अधिकारी एवं कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष शुभम त्रिपाठी एवं महामंत्री अशोक मीणा ने आभार जताया है।

राजकीय नर्सेज संघ के प्रदेश महामंत्री अशोक कुमार ने कहा कि वर्दी भत्ता के संबंध में 10 वर्ष बाद आदेश जारी होना दुर्भाग्यपूर्ण है। महंगाई के दौर में धुलाई भत्ता 100 से बढ़ाकर 150 रुपया प्रतिमाह किया जाना नाकाफी है। उन्होंने कहा कि संजय गांधी पीजीआई, केजीएमयू, लोहिया संस्थान के समान अन्य मेडिकल कॉलेजों और सरकारी अस्पतालों में कार्यरत कर्मियों को भत्ता दिया जाना चाहिए। ताकि समान कार्य और समान भत्ता का नियम लागू हो सके। इसके लिए विभाग को नए स्तर पर सभी भत्तों की समीक्षा की जानी चाहिए।

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