Chief Minister Yogi Adityanath attended the inaugural ceremony of the 7th National Convention of Vijnana Bharati—held over two days—as the chief guest.Chief Minister Yogi Adityanath attended the inaugural ceremony of the 7th National Convention of Vijnana Bharati—held over two days—as the chief guest.

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने दो दिवसीय वाराणसी दौरे के दूसरे दिन शनिवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) पहुंचे। यहाँ उन्होंने महामना मदन मोहन मालवीय की कर्मस्थली के स्वतंत्रता भवन में आयोजित ‘विज्ञान भारती’ के 7वें राष्ट्रीय अधिवेशन (13-14 जून, 2026) का बतौर मुख्य अतिथि उद्घाटन किया। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में 150 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे अत्याधुनिक ‘नेशनल सेंटर फॉर एजिंग’ का स्थलीय निरीक्षण कर निर्माण कार्यों का जायजा लिया।

विज्ञान भारती के अधिवेशन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने अतिथियों का प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र और बाबा विश्वनाथ की पावन धरा पर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि विज्ञान का मूल उद्देश्य ही लोक कल्याण है और दुनिया में जिस भी देश ने प्रगति की है, उसके पीछे विज्ञान का यही भाव रहा है। भारत की प्राचीन गौरवशाली परंपरा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक समय वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 44-45 प्रतिशत थी, जो स्वतंत्रता के समय घटकर डेढ़ से दो प्रतिशत रह गई। हमें इस बात का आत्ममंथन करना होगा कि ऐसा क्यों हुआ। पहले हमारा किसान सिर्फ खेती नहीं करता था, बल्कि वह एक ‘इनोवेटर’ (नवाचारी) था। इसी तरह हमारा व्यापारी केवल व्यापार नहीं करता था, बल्कि वह देश को जोड़ने की एक महत्वपूर्ण कड़ी था। कृषि और एमएसएमई (MSME) सेक्टर हमेशा से भारत की सबसे बड़ी ताकत रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने जैविक और जीरो बजट खेती पर जोर देते हुए रसायनों के अत्यधिक प्रयोग से खेतों को होने वाले नुकसान के प्रति आगाह किया। महान वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु का स्मरण करते हुए उन्होंने बताया कि केवल जीवों में ही नहीं, बल्कि पेड़-पौधों में भी चेतना होती है। ज्ञान जहाँ से भी आए, उसका स्वागत किया जाना चाहिए। पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि 2014 से पहले कारीगर बदहाल थे और उनके उत्पादों को बेकार मानकर बाजार से बाहर कर दिया गया था। लेकिन 2017 के बाद हमारी सरकार ने ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) योजना के जरिए डिजाइन और पैकेजिंग पर काम करते हुए उन्हें फिर से बाजार से जोड़ा। आज एमएसएमई सेक्टर को दी गई खुली छूट का ही परिणाम है कि प्रदेश का निर्यात दो लाख करोड़ रुपये के पार पहुँच गया है, 96 लाख यूनिटों में तीन करोड़ लोग काम कर रहे हैं और बेरोजगारी दर 3 प्रतिशत से नीचे आ गई है।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। बीएचयू के कुलपति अजीत चतुर्वेदी ने मुख्य अतिथि को पुष्प गुच्छ, अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर अतिथियों द्वारा विज्ञान भारती की पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। विज्ञान भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. शेखर पांडेय ने अपने संबोधन में बताया कि इस संस्था की शुरुआत 1991 में विज्ञान की उपलब्धियों को समाज के सामने आदर भाव से रखने के उद्देश्य से हुई थी। इस कार्यक्रम में राज्य मंत्री (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) हंसराज विश्वकर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, विधायक डॉ. अवधेश सिंह, सौरभ श्रीवास्तव, त्रिभुवन राम व सुशील सिंह, मुख्यमंत्री के शिक्षा सलाहकार प्रो. डी.पी. सिंह, पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल और जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

अधिवेशन के पश्चात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुजुर्गों की स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिए बीएचयू में बन रहे 7 मंजिला और 200 बिस्तरों वाले ‘नेशनल सेंटर फॉर एजिंग’ का निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यदायी संस्था के अभियंताओं को युद्धस्तर पर अभियान चलाकर तय समय सीमा के भीतर और मानकों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता के साथ निर्माण कार्य पूरा करने के सख्त निर्देश दिए। साथ ही बीएचयू प्रशासन के अधिकारियों को भी निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी करने को कहा।

गौरतलब है कि बुजुर्गों को समर्पित यह ‘नेशनल सेंटर फॉर एजिंग’ देश का तीसरा और उत्तर भारत का प्रमुख केंद्र होगा, जिसका निर्माण कार्य अब अपने अंतिम चरण में है। इस केंद्र में बुजुर्गों के लिए मल्टीस्पेशियलिटी जेरिएट्रिक ओपीडी, गठिया (अर्थराइटिस) क्लिनिक और मेमोरी क्लिनिक जैसी विशेष सुविधाएँ संचालित होंगी। मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, रेडियोलॉजी, आईसीयू, डे-केयर और प्राइवेट वार्ड से सुसज्जित यह केंद्र जरा-चिकित्सा (Geriatric Medicine) के क्षेत्र में अनुसंधान और क्षमता निर्माण में भी मदद करेगा। यहाँ वरिष्ठ चिकित्सकों और सीनियर रेजिडेंट्स के साथ-साथ एमडी (जरा चिकित्सा) की सीटें भी बढ़ाई जाएंगी। यह केंद्र न केवल बुजुर्गों के उपचार के लिए नए दिशानिर्देश तैयार करेगा, बल्कि डॉक्टरों और नर्सों को उनकी देखभाल के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित भी करेगा।

Powered by Syahi Prakashan | Anivarya Prashna News & Web Group