Demand raised for quality checks on food items within the Varanasi court complex; Advocate Shashank Shekhar Tripathi has highlighted the issue.Demand raised for quality checks on food items within the Varanasi court complex; Advocate Shashank Shekhar Tripathi has highlighted the issue.

अनिवार्य प्रश्न। ब्यूरो संवाद।

वाराणसी। वाराणसी कचहरी परिसर में विक्रय किए जा रहे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, स्वच्छता एवं शुद्धता की जांच कराने की मांग उठी है। दी बनारस बार एसोसिएशन, वाराणसी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं भारतीय जनता पार्टी विधि प्रकोष्ठ, काशी क्षेत्र के संयोजक अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने जिला प्रशासन एवं खाद्य सुरक्षा विभाग से कचहरी परिसर में औचक निरीक्षण और खाद्य पदार्थों के नमूनों की वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की है।

इस संबंध में त्रिपाठी ने माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश, वाराणसी को प्रार्थना-पत्र भेजकर कहा है कि कचहरी परिसर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में अधिवक्ता, न्यायिक अधिकारी, कर्मचारी एवं वादकारी चाय, दूध, नाश्ता, भोजन, मिठाई एवं अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं। ऐसे में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता सुनिश्चित किया जाना जनस्वास्थ्य के दृष्टिकोण से अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने अपने प्रार्थना-पत्र की प्रतिलिपि मुख्य न्यायाधीश उच्च न्यायालय इलाहाबाद, रजिस्ट्रार जनरल, जिलाधिकारी वाराणसी, खाद्य सुरक्षा आयुक्त उत्तर प्रदेश तथा खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन को भी प्रेषित की है।

त्रिपाठी ने कहा कि कचहरी परिसर में उपलब्ध खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर समय-समय पर शिकायतें एवं चर्चाएं सामने आती रही हैं। विशेष रूप से दूध और चाय की गुणवत्ता को लेकर मिलावट की आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं। उन्होंने मांग की कि खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम द्वारा औचक निरीक्षण कर दूध, चाय, खाद्य तेल, मिठाई तथा अन्य खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर अधिकृत प्रयोगशाला में जांच कराई जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन, मिलावट या अस्वच्छता की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही कचहरी परिसर में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता की नियमित निगरानी के लिए स्थायी व्यवस्था भी विकसित की जानी चाहिए।

अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि यह किसी व्यक्ति या प्रतिष्ठान को दोषी ठहराने का विषय नहीं है, बल्कि जनस्वास्थ्य, पारदर्शिता और न्यायहित से जुड़ा मामला है। इसलिए जांच निष्पक्ष, वैज्ञानिक एवं तथ्यपरक तरीके से कराई जानी चाहिए।

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