अनिवार्य प्रश्न। ब्यूरो संवाद। वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के आयुर्विज्ञान संस्थान (IMS) स्थित न्यू एल.टी. कॉम्प्लेक्स के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित हो रहे भव्य राष्ट्रीय सम्मेलन ‘EPICON 2026’ (EMINDIA 26) का आज दूसरा दिन बेहद खास रहा। कुल 5 दिनों तक चलने वाले इस विशाल EMA (Emergency Medicine Association) सम्मेलन के अंतर्गत, बाल आपातकालीन चिकित्सा (Pediatric EPICON) पर आधारित यह विशेष 2 दिवसीय सत्र चिकित्सा जगत के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस प्रतिष्ठित अवसर पर IAP की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. नीलम मोहन ने विशेष रूप से शिरकत करते हुए IAP-PEM चैप्टर के आधिकारिक न्यूज़लेटर का औपचारिक विमोचन किया। इस दौरान उन्होंने न्यूज़लेटर की प्रधान संपादक (Editor-in-Chief) डॉ. नेहा ठाकुर राय के उत्कृष्ट कार्यों और समर्पण की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई दी।प्रमुख हस्तियों और प्रतिष्ठित संकाय (Eminent Faculty) की उपस्थितिइस महासम्मेलन में देश-विदेश के दिग्गज चिकित्सा विशेषज्ञों ने अपने ज्ञान का प्रसार किया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से डॉ. अशोक चौधरी, डॉ. विनीता गुप्ता, डॉ. सुनील राव, डॉ. देबाशिष दास अधिकारी, डॉ. अनिल गोयल, और डॉ. अभिजीत साहा जैसे जाने-माने संकाय सदस्य उपस्थित रहे, जिन्होंने बच्चों में गंभीर संक्रमण, आघात (Trauma) और क्रिटिकल केयर से जुड़े जटिल विषयों पर अपने बहुमूल्य विचार रखे। सम्मेलन के सुचारू संचालन और वैश्विक दृष्टिकोण को आकार देने में संगठन अध्यक्ष डॉ. प्रेरणा बत्रा, संगठन सचिव डॉ. नेहा ठाकुर राय (आरएमएलआईएमएस, लखनऊ), इंडुसेम (INDUSEM) के सीईओ डॉ. सागर गलवांकर (USA), तथा ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटेरिएट प्रो. (डॉ.) बिक्रम गुप्ता मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।सम्मेलन के दौरान डॉ. सागर गलवांकर ने अपने संबोधन में कहा, “आपातकालीन चिकित्सा अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि आधुनिक स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ है। भारत में बाल आपातकालीन और आघात देखभाल (Pediatric Emergency & Trauma Care) को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालना समय की सबसे बड़ी मांग है।”वहीं, आयोजन सचिव डॉ. नेहा ठाकुर राय ने अपने विचार साझा करते हुए कहा, “यह सम्मेलन केवल अकादमिक चर्चाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे नन्हें मरीजों के जीवन को बचाने के लिए एक ठोस क्षेत्रीय ब्लूप्रिंट तैयार करने का मंच है। बच्चों की आपातकालीन देखभाल में ‘त्वरित पहचान और समय पर पुनर्जीवन’ (Recognition to Resuscitation) ही हर जान बचाने की कुंजी है।” कार्यक्रम के सफल आयोजन में आईएमएस, बीएचयू के निदेशक प्रो. (डॉ.) एस.एन. संखवार, संकाय प्रमुख प्रो. (डॉ.) संजय गुप्ता, और एमएस (एसएसएच) प्रो. (डॉ.) पुनीत सह-संरक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। साथ ही सह-संगठन सचिव डॉ. अनिल के. गोयल व डॉ. सुनील राय तथा कोऑर्डिनेटर अमित मिश्रा व्यवस्था को बेहतर बनाने में जुटे हैं। यह पांच दिवसीय महाकुंभ पूर्वांचल और देश भर की आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को एक नई ऊंचाइयों पर ले जाने का कार्य कर रहा है। Post navigation आयुष्मान कार्ड के नाम पर फर्जी वीडियो से सावधान रहें – सीएमओ