अनिवार्य प्रश्न। ब्यूरो संवाद। चंदौली। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद अब काशी और मथुरा में भी भव्य मंदिर निर्माण की मांग उठाते हुए हनुमानगढ़ी के महंत राजूदास ने कहा कि इन दोनों मामलों का समाधान न्यायालय के माध्यम से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो काशी और मथुरा में कारसेवा भी की जाएगी। महंत राजूदास सोमवार को नगर के अफीम कोठी रोड स्थित एक क्लीनिक के उद्घाटन समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद अब मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि और काशी के ज्ञानवापी परिसर में भी भव्य मंदिर का निर्माण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण आस्था का विषय है और इसे राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। काशी और मथुरा से जुड़े मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं, इसलिए इन मामलों में जो भी निर्णय होगा, वह न्यायालय के माध्यम से ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आस्था के साथ न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए मंदिर निर्माण की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। कृष्ण जन्मभूमि को लेकर बोले- आस्था रखने वालों को आगे आना चाहिए मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि से जुड़े विवाद पर महंत राजूदास ने कहा कि भगवान कृष्ण में आस्था रखने वाले लोगों को इस मुद्दे के समाधान के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रमणकारियों से जुड़े ढांचे के कारण यदि कृष्ण जन्मभूमि को लेकर विवाद है तो उसका समाधान होना चाहिए। इसी तरह ज्ञानवापी मामले में भी न्यायालय के माध्यम से आगे की कार्रवाई की जानी चाहिए।उन्होंने कहा कि दोनों मामलों में न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हुए आस्था के अनुरूप निर्माण की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा। जरूरत पड़ने पर दोनों स्थानों पर कारसेवा किए जाने की बात भी उन्होंने कही। अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी के आरोपों को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से सत्ता पक्ष पर की गई टिप्पणी के सवाल पर महंत राजूदास ने कहा कि धार्मिक मामलों को राजनीतिक बयानबाजी का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग पहले भगवान राम के अस्तित्व को नकारते थे, वे अब खुद को रामभक्त बता रहे हैं।उन्होंने राजनीतिक दलों को धर्म और आस्था से जुड़े विषयों पर टिप्पणी करते समय संयम बरतने की नसीहत दी। साथ ही कहा कि यदि राजनीतिक बयानबाजी इसी तरह जारी रही तो इसका राजनीतिक नुकसान भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि धार्मिक विषयों पर टिप्पणी करने से पहले सभी पक्षों को संवेदनशीलता का ध्यान रखना चाहिए। Post navigation मंडलीय अस्पताल में इलाज के दौरान मरीज की मौत, परिजनों ने डॉक्टर पर लगाया लापरवाही का आरोप