बुद्धि एक ऐसी मानसिक क्षमता है जो तर्क करने, योजना बनाने, समस्याओं को हल करने, अमूर्त रूप से सोचने व अनुभवों से सीखने में मदद करती है। यह प्रकृति द्वारा मानव को प्रदत्त एक अद्भुत उपहार व वरदान है। बुद्धि सोचने-समझने की शक्ति, सही-ग़लत में भेद करने की क्षमता और किसी भी परिस्थिति से तालमेल बिठाने का सामर्थ्य प्रदान करती है। शास्त्रों में इसे इस प्रकार वर्णित किया गया है— “बुद्ध्यते अनेन इति बुद्धिः” अर्थात् जिससे निश्चय किया जाए, उसे बुद्धि कहते हैं। यह बुद्धि ही है जो कहती है कि यही किया जाए और बाक़ी को छोड़ा जाए। यह बुद्धि ही है जो हमें पशु-पक्षियों से अलग करती है। पशु भूख लगने पर केवल खाता है, जबकि मनुष्य सोचता है— क्या खाऊँ? कितना खाऊँ? कब खाऊँ? यही बुद्धि का फ़र्क है जो हमें जानवरों से अलग करता है। प्रकृति का संविधान समानता का होता है; यह किसी के साथ पक्षपात नहीं करती। जैसे सूरज सबके लिए उगता है, सूरज की धूप, हवा और पानी सभी के लिए समान रूप से मयस्सर होते हैं; उसी प्रकार प्रकृति ने बुद्धि का वितरण भी सबके लिए बराबर किया है। संसार में लगभग 68% लोग सामान्य बुद्धि के होते हैं, जिनकी बुद्धि-लब्धि (IQ) 90–110 के बीच होती है। केवल 2.5% लोग ही ‘मिट्टी के माधव’, मूर्ख या कम बुद्धि वाले होते हैं और लगभग इतने ही प्रतिशत लोग जीनियस (प्रखर बुद्धि वाले) होते हैं। जिस तरह प्रकृति की वर्षा राजा के महल व ग़रीब की झोपड़ी—दोनों जगह एक जैसी होती है और हर खेत में समान रूप से बरसती है, वैसे ही न्यायिक रूप से प्रकृति ने सभी को बुद्धि का वितरण समान रूप से किया है; उस पर पक्षपात का आरोप नहीं लगाया जा सकता। जन्म के समय हर शिशु लगभग समान क्षमता लेकर पैदा होता है, कोई जन्म से तेज़ या धीमा नहीं होता। यह एक वैज्ञानिक तथ्य है कि दुनिया के किसी भी कोने में जन्मे बच्चे को यदि समान अवसर, पोषण और शिक्षा मिले, तो वह डॉक्टर, इंजीनियर, कलाकार, वैज्ञानिक और बहुत कुछ बन सकता है। तो प्रश्न उठता है कि फिर एक बच्चा दूसरे से कालांतर में कैसे पिछड़ जाता है? साथियों, फ़र्क बुद्धि से नहीं; बल्कि संस्कार, मेहनत, दिशा और अवसर से आता है। मनोवैज्ञानिक वॉटसन ने कहा था— “Give me a child, I can make him doctor, lawyer and dacoit also.” (आप मेरी बात समझ गए होंगे।) तीन चीज़ें बुद्धि को आकार देती हैं: पहला—परिवार: जिस भी घर में सवाल पूछने की आज़ादी होती है, वहाँ बुद्धि का विकास होता है। जहाँ ‘चुप रहो’ कहा जाता है, वहाँ बच्चों की बुद्धि दब जाती है और उनका मानसिक विकास बाधित होता है। दूसरा—शिक्षा: अच्छे शिक्षक, अच्छी किताबें और अच्छा वातावरण बच्चों की बुद्धि में अभिवृद्धि करते हैं। तीसरा—संघर्ष: परेशानियाँ और संघर्ष बुद्धि के विकास में आशातीत वृद्धि करते हैं। अत्यधिक आराम बुद्धि को सुस्त बना देता है। ज़िद और जुनून भी व्यक्ति को असाधारण सफलता दिलाते हैं। इसी कारण कभी-कभी मज़दूर का बेटा भी IAS बन जाता है और अमीर का बेटा आराम-तलबी की वजह से कुंद रह जाता है। यह आम लोगों का भ्रम है कि फलाँ बच्चा होशियार है और फलाँ कमज़ोर। ऐसा कदापि नहीं है; केवल अवसर की अनुपलब्धता, मेहनत की कमी और सही दिशा का अभाव ही ऐसी परिस्थिति पैदा करते हैं। आज बहुतायत अभिभावकों ने बुद्धि को मार्कशीट और पैकेज से तौलना शुरू कर दिया है। जो गणित में तेज़ होता है, उसे प्रायः जीनियस कह दिया जाता है और जो बच्चा मिट्टी से अच्छी कृति बनाता है या कला में तेज़ होता है, उसे कम बुद्धिमान या नालायक़ समझ लिया जाता है; जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण: बुद्धि के चार प्रकार तार्किक बुद्धि: स्कूलों में गणित, विज्ञान और तर्क आदि इसके उदाहरण हैं। भावनात्मक बुद्धि: रिश्ते बनाना, भावनाएँ समझना, क्रोध पर नियंत्रण करना और दूसरों को समझना आदि इसमें शामिल हैं। सामाजिक बुद्धि: समाज के साथ तालमेल बिठाना, नेतृत्व करना और टीम बनाना इसके उदाहरण हैं। रचनात्मक बुद्धि: इसमें नवीन सृजन का समावेश होता है; जैसे समस्याओं का नया हल निकालना, निर्माण करना आदि। बुद्धि, विवेक और चरित्र का संगम हमारे मनीषियों ने कहा है कि केवल बुद्धि से ही पूर्ण सफलता प्राप्त नहीं होती। तेज़ दिमाग़ कभी-कभी ख़तरनाक भी हो सकता है, यदि वह चरित्र से हीन हो। असली सफलता बुद्धि और चरित्र के संयोग से ही प्राप्त होती है। आज जितने भी फ्रॉड, घपले, घोटाले और साइबर क्राइम हो रहे हैं, वे सब तेज़ दिमाग़ का ही परिणाम हैं। जब बुद्धि का ग़लत इस्तेमाल होता है, तभी ये सब पैदा होते हैं; क्योंकि वहाँ चरित्र का अभाव होता है। यही वजह है कि प्रकृति ने बुद्धि के साथ विवेक भी प्रदान किया है। जिसके पास जितना विवेक होता है, उसकी बुद्धि उतनी ही सार्थक होती है। प्रकृति ने बुद्धि का वितरण जाति और धर्म से ऊपर उठकर गाँव, शहर, अमीर और ग़रीब—सभी में समान रूप से किया है। कई विद्वानों का मानना है कि बुद्धि प्रकृति का दिया हुआ एक ऋण है, जिसे ब्याज सहित समाज को लौटाना चाहिए। यदि तेज़ बुद्धि को ग़लत दिशा मिल जाए तो व्यक्ति अपराधी बन सकता है और यदि उसे सत्-दिशा मिल जाए, तो वह महापुरुष बन जाता है। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में सबसे पहले चरित्र-निर्माण पर बल दिया जाता है। भारतीय दर्शन: बुद्धि के चार स्तर वेद, पुराण और आयुर्वेद में बुद्धि के चार स्तरों का उल्लेख मिलता है— धी, मेधा, प्रज्ञा और बुद्धि। धी: इसे ‘ग्रहण शक्ति’ कहते हैं (नया सीखने व समझने की क्षमता)। मेधा: इसे ‘धारण व स्मरण शक्ति’ कहते हैं। प्रायः देखने में आता है कि कुछ बच्चे ‘धी’ में तेज़ होते हैं किंतु ‘मेधा’ में कमज़ोर; वे पढ़ते तो जल्दी हैं, पर शीघ्र ही भूल जाते हैं। प्रज्ञा: यह ‘विवेक और निर्णय शक्ति’ है, जिसे श्रेष्ठ ज्ञान कहा गया है।“प्रकृष्टं ज्ञानं इति प्रज्ञा।”ऐतरेय उपनिषद् का महावाक्य है— “प्रज्ञानम् ब्रह्म” अर्थात् प्रज्ञा ही ब्रह्म का रूप है। इसीलिए कहा जाता है कि बिना प्रज्ञा (विवेक) के अत्यधिक बुद्धिमान लोग भी ग़लत निर्णय ले बैठते हैं। संकल्प शक्ति: जब आपके पास कई विकल्प होते हैं, तब आप इसी संकल्प शक्ति के सहारे किसी एक श्रेष्ठ विकल्प का चयन करते हैं। बुद्धि-लब्धि (IQ) क्या है? किसी व्यक्ति की मानसिक योग्यता, तर्कशक्ति और समस्या-समाधान की क्षमता के संख्यात्मक माप को बुद्धि-लब्धि (Intelligence Quotient – IQ) कहा जाता है। इसका संप्रत्यय सबसे पहले वर्ष 1912 में जर्मन मनोवैज्ञानिक विलियम स्टर्न ने दिया था। इसे ज्ञात करने का सूत्र है: $$\text{IQ} = \left(\frac{\text{मानसिक आयु (Mental Age)}}{\text{वास्तविक आयु (Chronological Age)}}\right) \times 100$$ मानक परीक्षणों में 100 को औसत या सामान्य बुद्धि का स्तर माना जाता है। बुद्धि-लब्धि (IQ) के आधार पर वर्गीकरण: 140 या उससे अधिक: अति प्रतिभाशाली (Genius / Very Superior) 120 – 139: प्रखर बुद्धि (Superior) 110 – 119: उत्कृष्ट / तीव्र बुद्धि (High Average) 90 – 109: सामान्य / औसत बुद्धि (Average) 80 – 89: मंद बुद्धि (Low Average / Dull Normal) 70 – 79: सीमांत बुद्धि (Borderline) 70 से कम: अल्प बुद्धि / बौद्धिक अक्षम (Intellectually Deficient) लेखकप्रख्यात साहित्यकार, वार्ताकार, शिक्षाविद् एवं प्रथम श्रेणी के पूर्व प्रशासनिक अधिकारी रहे हैं। Post navigation समावेशी, पारदर्शी सरकारी खरीद का बेहतरीन प्लेटफॉर्म है जेम