अनिवार्य प्रश्न। संवाद। उत्तराखंड । देवभूमि उत्तराखंड अपनी समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और प्रकृति से गहरे जुड़ाव के लिए जानी जाती है। यहां मनाए जाने वाले लोकपर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, कृषि परंपरा और सामाजिक एकजुटता का संदेश भी देते हैं। उत्तराखंड के कुमाऊं संभाग का प्रमुख लोकपर्व हरेला भी ऐसा ही पर्व है, जिसे हरियाली, खुशहाली और नई फसल के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। उत्तराखंड में आज लोकपर्व हरेला का त्योहार मनाया जा रहा है। हरेला पर्व के तहत प्रदेश के विभिन्न जिलों में पौधरोपण अभियान की शुरुआत की गयी। एक माह तक चलने वाले इस अभियान में विभिन्न सरकारी विभाग भी प्रतिभाग कर रहे हैं। सावन माह की शुरुआत के साथ मनाया जाने वाला हरेला कुमाऊं के घर-घर में विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती से भी जुड़ा माना जाता है, वहीं पहाड़ की कृषि संस्कृति में इसका विशेष महत्व है। हरेला केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि धरती, जंगल, जल और जीवन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है। हरेला के मौके पर मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए देहरादून के कैनाल रोड स्थित चिड़ोवाली क्षेत्र से हरित दून अभियान की शुरुआत की। इस मौके पर एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने पौधरोपण कर अभियान की शुरुआत की। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों, स्वयंसेवी संगठनों और अधिकारियों ने भी पौधे लगाकर हरित उत्तराखण्ड के संकल्प को मजबूत किया। अभियान के तहत विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए। उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी का कहना है कि हरित दून अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लगाए गए पौधों की नियमित देखरेख भी सुनिश्चित की जाएगी। हरेला पर्व पर आम जनता की सक्रिय भागीदारी ने इस अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप दिया। एमडीडीए के संयुक्त सचिव राकेश तिवारी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण का यह संदेश आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बनेगा। Post navigation उत्तराखंड के 8 जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट बेगूसराय में आयुर्वेद महाविद्यालय निर्माण अंतिम चरण में