Shreya was killed in 20 minutes: Vivek held both her hands, while Puneet slit her throat with a knife.Shreya was killed in 20 minutes: Vivek held both her hands, while Puneet slit her throat with a knife.

अनिवार्य प्रश्न। ब्यूरो संवाद।

वाराणसी। श्रेया उपाध्याय की हत्या में गिरफ्तार पुनीत मिश्रा का पुलिस आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाल रही है। वारदात के दिन विवेक ने श्रेया के हाथ पकड़े और पुनीत ने चाकू से गला रेता था। श्रेया के छटपटाने और सांस थमने तक दोनों कमरे में ही थे। 20 मिनट में हत्या के बाद कमरे से पहले विवेक निकला और फिर बाद में पुनीत कैब बुक करके निकला। विवेक ने पुनीत को आश्वस्त किया था कि वह रुपये से भरा बैग लेकर आ रहा है। 20 मिनट से अधिक समय होने के बाद विवेक का मोबाइल बंद हो गया।

पुलिस की छानबीन में सामने आया कि वाराणसी के एक कॉलेज से फार्मासिस्ट की डिग्री लेकर पुनीत मिश्रा महोबा के एक एनजीओ में काम करने चला गया। साल भर बाद झारखंड के एक एनजीओ में शामिल हुआ। विवेक से सोशल मीडिया और व्हाट्सएप के जरिए संपर्क में था। प्रेमिका के महंगे शौक पूरे करने की चाहत में पुनीत ने कई तरह से लोन और कर्ज ले रखा था। आर्थिक रूप से टूट चुके पुनीत को विवेक ने आश्वस्त किया कि मेरे लिए काम करोगे तो तुम्हे 22 लाख रुपये दूंगा। झारखंड में रहने के दौरान पुनीत से विवेक ने पुरानी दोस्ती का हवाला देते हुए मदद मांगी।

व्हाट्सएप चौट और कॉलिंग पर पुनीत को विश्वास दिलाया कि काम होते ही तुरंत पैसे मिल जाएंगे। झारखंड से पुनीत मिश्रा वाराणसी पहुंचा। दोनों की रोहनिया हाईवे पर ढाबे में मुलाकात हुई थी। यही दोनों ने पार्टी की और हत्या की योजना बनाई थी। पुनीत को विश्वास था कि हत्या के बाद वह पकड़ में नहीं आएगा और झारखंड में पुराने ठिकाने पर शरण लेगा। मऊ में पूजा सामग्री की दुकान चलाने वाले पिता सुरेंद्र मिश्रा को वारदात के बारे में जानकारी नहीं थी। मऊ पुलिस के जरिये उन्हें बेटे की गिरफ्तारी की जानकारी हुई।

जगतपुर पीजी कॉलेज में एमएससी की छात्रा श्रेया उपाध्याय उर्फ मोनू (22) की हत्या के मामले में आरोपी पुनीत मिश्रा को लेकर उसके पैतृक गांव मिश्रौली बकुची में सोमवार तक किसी को भनक तक नहीं थी। जघन्य वारदात में शामिल पुनीत की पहचान गांव में एक सामान्य लड़के के तौर पर थी।

पुनीत के पिता सुरेंद्र मिश्रा कस्बे के चोरपा बाजार में पूजा-पाठ और धार्मिक सामग्री की दुकान संचालित करते हैं। तीसरे नंबर के बेटे पुनीत की काबिलियत को लेकर नाज था। आर्थिक रूप से कमजोर होने पर उनका बड़ा बेटा श्रीराम मिश्रा दुबई में काम करता था। इजरायल ईरान के बीच युद्ध के बाद से वो घर पर ही है। दूसरे नंबर का बेटा कृष्णा उर्फ माखन भी अपना काम करता है। पुनीत के पिता सुरेंद्र और दोनों बड़े भाइयों ने अपने मोबाइल बंद कर लोगों से दूरी बना ली है। घटना के बाद से पुनीत अपने पिता और घर के लोगों के संपर्क में नहीं था। उसका मोबाइल बंद था। 20 अगस्त को दूसरे नंबर से फोन कर हाल चाल बताया था।

पुनीत बीफार्मा करने के बाद एनजीओ में काम कर रहा था। आर्थिक रूप से कमजोर होने के बाद पहले पिता ने उसे पढ़ाया फिर उसके बड़े भाई ने विदेश में नौकरी कर उसकी पढ़ाई को जारी रखा था। तीनों भाइयों में सबसे ज्यादा पढ़े लिखे होने के चलते पूरे परिवार को पुनीत से बहुत उम्मीदें थीं।

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