आगवानी लिखो अपने गीतों में बहती रवानी लिखो,तुम गरीबों के आंखों का पानी लिखो। प्रेमिका के खयालों से निकलो कभी,तुम किसानों के हक में किसानी लिखो। सुन सके जिसको मां-बाप,बेटी,बहन,तुम ग़ज़ल अब कोई खानदानी लिखो। खा के सीने पे गोली अमर जो हुए,वीरता की तुम उनकी कहानी लिखो। फिर सितम ना कभी मां पे ढाये कोई,भारती मां की चुनर को धानी लिखो। रात कितनी भी काली रहे पर ‘अयन’उगते सूरज की फिर आगवानी लिखो। पाने के बाद बुझ गया था चिराग़ तेरे जाने के बाद,आज रौशन हुआ है ज़माने के बाद। मैने की थी जतन तुझको भूलूं मगर,दिल से निकला नही तू समाने के बाद। दिल के पन्नों में बस तेरा ही ज़िक्र है,बोलो कैसे जिएं दिल लगाने के बाद । हमसफ़र हो मगर साथ चलते नहीं,भूल कैसे गए दिल लगाने के बाद। मेरे अश्कों से जलते दिए प्यार के।अश्क़ रुकते नहीं याद आने के बाद। आज करता ‘अयन’ बस तेरा शुक्रिया ,मिल गया है ख़ुदा तुझको पाने के बाद। Post navigation जनजातीय गरिमा को प्रौद्योगिकी का समर्थन – श्रीमती रंजना चोपड़ा