वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य व कूटनीतिक गतिरोध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में हड़कंप मच गया है। दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति बनने और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ पर बढ़ते दबाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव जल्द ही शांत नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक बड़े तेल संकट का सामना करना पड़ सकता है, जिससे भारत सहित दुनिया के कई विकासशील देशों में ईंधन की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। इस संकट की मुख्य वजह होर्मुज जलडमरूमध्य पर बना सैन्य दबाव है, जिसे वैश्विक तेल व्यापार की जीवनरेखा माना जाता है। ओमान और ईरान के बीच स्थित यह संकरा समुद्री मार्ग कितना महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया भर में होने वाले कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत और इराक जैसे बड़े तेल उत्पादक देश इसी मार्ग से अपने कच्चे तेल का निर्यात करते हैं। ईरान द्वारा इस मार्ग को अवरुद्ध करने या यहाँ टैंकरों पर हमले की बढ़ती आशंकाओं ने तेल कंपनियों और निवेशकों के बीच भारी डर पैदा कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप कच्चे तेल के दामों में अचानक यह भारी वृद्धि देखी जा रही है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, युद्ध की आहट और आपूर्ति ठप होने की आशंका के कारण ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई (WTI) दोनों के दामों में लगातार तेजी आ रही है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल के टैंकरों की आवाजाही पूरी तरह या आंशिक रूप से भी बाधित होती है, तो वैश्विक बाजार में प्रतिदिन लाखों बैरल कच्चे तेल की कमी हो जाएगी। इस संभावित आपूर्ति संकट को देखते हुए रिफाइनरियों और बड़े देशों ने अपनी रणनीतिक तेल जरूरतों को पूरा करने के लिए पहले से ही महंगे दामों पर स्टॉक जुटाना शुरू कर दिया है, जिससे कीमतों को और हवा मिल रही है। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा और सीधा असर भारत जैसे उन देशों पर पड़ेगा जो अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाली हर एक डॉलर की बढ़ोतरी भारत के आयात बिल को हजारों करोड़ रुपये बढ़ा देती है। यदि अमेरिका और ईरान का यह विवाद लंबे समय तक खिंचता है, तो भारतीय बाजारों में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के दामों में भारी बढ़ोतरी तय मानी जा रही है, जिससे माल ढुलाई महंगी होगी और आम जनता को चौतरफा महंगाई की मार झेलनी पड़ सकती है। सरकार और नीति निर्माता वर्तमान में स्थिति पर बारीक नजर रख रहे हैं और वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों की संभावनाओं को तलाश रहे हैं।