विशेष संवाददाता लेह/पहलगाम । जवाहर पर्वतारोहण एवं शीतकालीन खेल संस्थान (JIM & WS), पहलगाम की टीम ने लद्दाख क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। संस्थान के २२ सदस्यीय पर्वतारोहण दल ने बेहद चुनौतीपूर्ण मौसम और विषम परिस्थितियों का सामना करते हुए रुमत्से फू क्षेत्र में स्थित ‘ख्याम त्सो मासिफ’ (पर्वतमाला) की विभिन्न चोटियों पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराया है। इस साहसिक अभियान की शुरुआत २६ जून, २०२६ को हुई थी, जब टीम लीडर कर्नल हेमचंद्र सिंह ने इस २२ सदस्यीय दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। लद्दाख के कठिन वातावरण में खुद को ढालने के लिए टीम ने एक सुनियोजित अनुकूलन (Acclimatization) कार्यक्रम का कड़ाई से पालन किया, जो इस सफलता की मुख्य कड़ी साबित हुआ। खराब मौसम पर भारी पड़ा हौसला: लगातार फतह की चोटियाँ २ जुलाई, २०२६: प्रतिकूल मौसम के बावजूद, टीम ने पहली बार ५९०१ मीटर ऊँची ‘माउंट पीक प्वाइंट’ चोटी पर विजय प्राप्त की। इसी दौरान टीम लीडर ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम करते हुए ५६०० मीटर की अभूतपूर्व ऊँचाई से पहली बार पैराग्लाइडिंग उड़ान भरी। ३ जुलाई, २०२६: तकनीकी रूप से बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण मानी जाने वाली ६०९० मीटर की ऊँची चोटी और एक अन्य ‘माउंट पीक प्वाइंट’ (५९४४ मीटर) पर टीम ने असाधारण साहस और बेजोड़ तालमेल का प्रदर्शन करते हुए फतह हासिल की। ५ जुलाई, २०२६: बिना थके और बिना रुके, दल ने इस पर्वत श्रृंखला की अंतिम और मुख्य चोटी ‘माउंट ख्याम-III’ (६०१८ मीटर) पर भी सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी की। सुरक्षित वापसी और नया कीर्तिमान सभी चारों चोटियों को चूमने के बाद, २२ सदस्यीय यह पूरी टीम सुरक्षित रूप से रोड हेड कैंप में वापस उतर आई है। खराब मौसम, बर्फीली हवाओं और कम ऑक्सीजन जैसी विपरीत परिस्थितियों के बीच JIM & WS की इस कामयाबी ने भारतीय पर्वतारोहण के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर स्थापित कर दिया है। टीम लीडर की ५६०० मीटर से पैराग्लाइडिंग उड़ान को इस क्षेत्र की सबसे साहसिक गतिविधियों में से एक माना जा रहा है। Post navigation भारत-ओमान CEPA का असर: वाराणसी से ओमान को भेजा गया 40 मीट्रिक टन बिस्कुट का पहला निर्यात