Chaos reigned from Jantar Mantar to Parliament throughout the day; lathi-charges occurred in some places, while stones were pelted in others.Chaos reigned from Jantar Mantar to Parliament throughout the day; lathi-charges occurred in some places, while stones were pelted in others.

अनिवार्य प्रश्न। संवाद।

दिल्ली । दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का संसद मार्च के दौरान जंतर-मंतर से संसद तक दिनभर बवाल चला। करीब बीस साल बाद प्रदर्शनकारी संसद भवन तक पहुंच गए। इस दौरान सुरक्षाकर्मियों के हाथ-पांव फूले, हर सड़क पर प्रदर्शनकारी दिखे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के वाहनों में तोड़फोड़ की और पत्थरबाजी भी की। इस पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। साथ ही आंसू गैस के गोले भी दागे। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का संसद मार्च सोमवार को दोपहर में संसद भवन तक पहुंच गया। मानसून सत्र के पहले दिन हाई प्रोफाइल सुरक्षा जोन में प्रदर्शनकारियों के पहुंचने से सुरक्षाकर्मियों ने आनन-फानन मुख्य दरवाजे को बंद किया। प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने के लिए आंसू गैस छोड़ने के साथ लाठी चार्ज भी करना पड़ा। करीब 20 साल बाद कोई मार्च संसद तक पहुंचने में कामयाब रहा। इसे संसद भवन की सुरक्षा में बड़ी चूक मानी जा रही है। दिल्ली पुलिस के सारे सुरक्षा इंतजाम सोमवार को तब नाकाम साबित हुए, जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का संसद मार्च हकीकत में संसद भवन के पास तक पहुंच गया। कई साल से पुलिस सारे संसद मार्च को संसद मार्ग थाने के पास रोक लेती थी। इससे पहले 2004-05 में समाजवादी पार्टी का संसद मार्च पटेल चौक तक पहुंचा था, तब पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए संसद के सामने रेल भवन और कृषि भवन के गोल चक्कर के पास लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले चलाए।

मार्च के नजदीक आने की जानकारी मिलते ही सुरक्षा कर्मियों को दौड़ लगानी पड़ी। इसके बाद संसद का गेट बंद कर दिया। संसद के अंदर सुरक्षा काफी कड़ी की गई है। जवानों ने कई स्तर का सुरक्षा घेरा बना रखा है। संसद भवन के सामने की सड़क पर आंसू गैस के गोले दागे जाने के बाद अफरातफरी के बीच भाग रहे लोगों का वीडियो भी सोशल मीडिया पर चल रहा है। दोपहर बाद खाली करवा लिया गया। इसके बाद वहां के हालात सामान्य हुए। लेकिन वहां से हटने के बाद प्रदर्शनकारी इससे लगी दूसरी सड़कों पर फैल गए थे। देर शाम तक पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच रस्साकशी चलती रही। पुलिस बैरिकेडिंग, नारेबाजी, धक्का-मुक्की और कार्रवाई के बीच जंतर-मंतर से लेकर संसद मार्ग, अशोक रोड, कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में घंटों हंगामा चलता रहा। कई जगह हालात संभालने के लिए पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा। करीब दोपहर 2 बजे हालात और बिगड़ गए, जब प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्ग पर आगे बढ़ने की एक और कोशिश की। पुलिस ने भीड़ को तितर बितर करने के लिए कार्रवाई शुरू की। चेतावनी के बावजूद जब वह नहीं हटे, तब पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े।

आंसू गैस छोड़े जाने के बाद मौके पर अफरा तफरी मच गई। धुएं के कारण कई प्रदर्शनकारी इधर उधर भागने लगे। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने पत्थर फेंके और पुलिस के बीच धक्का मुक्की भी देखने को मिली। जंतर-मंतर से निकलते ही संसद मार्च का आंदोलन भीड़ में तब्दील हो गया। इसके बाद इनका न कोई नेता रहा और न ही किसी के निर्देश पहुंचे। सहूलियत के हिसाब से प्रदर्शनकारी आगे बढ़ते रहे। जिसको जिस दिशा में खुला रास्ता में दिखा, वह उसी दिशा में हो गए।

वहीं, सबसे बड़ा समूह संसद मार्ग की तरफ बढ़ता रहा। भारी भीड़ के बीच यह लोग एक के बाद बैरीकेड लांघते हुए यह संसद भवन की दहलीज तक जा पहुंचे। इस दौरान जगह-जगह पर इनकी पुलिस के साथ झड़प भी हुई। जानकारों का मानना है कि पहले से कमजोर संगठनात्मक तैयारी ने अव्यवस्था बढ़ा दी। नेतृत्व के स्तर पर बड़ी संख्या में संसद मार्च के लिए जुटे प्रदर्शनकारियों के बीच तालमेल बिठाने का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किया था। इंटरनेट बंद होने का सबसे बड़ा असर उन पुलिसकर्मियों पर पड़ा, जिन्हें सोमवार को कानून व्यवस्था संभालने के लिए नई दिल्ली बुलाया गया था। जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन के बीच मंडी हाउस से करोल बाग और मंदिर मार्ग तक मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई। ऐसे ही दो पुलिसकर्मियों की ड्यूटी सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत बन रहे एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव के पास लगाई गई थी। उनके पास ड्यूटी रोस्टर था, लेकिन उसमें केवल तैनाती स्थल का नाम लिखा था।

इंटरनेट बंद होने से वे गूगल मैप नहीं चला सके। गोल मार्केट से पंडित पंत मार्ग तक भटकने के बाद उन्होंने ऑटो चालकों से रास्ता पूछा, लेकिन उन्हें भी इस नई जगह एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव की जानकारी नहीं थी। उन्हें इस जगह के पीछे की रोड पर तैनात किया गया था। बाद में कार्यालय के ब्रॉडबैंड इंटरनेट की मदद से उन्हें रास्ता खोजकर बताया गया और कागज पर प्रमुख सड़कें व चौराहे लिखकर दिए गए। दोनों पुलिसकर्मी आपस में कहते रहे कि अगर समय पर नहीं पहुंचे तो अनुपस्थित ही लगा दिया जाएगा। दूर-दराज के इलाकों और दूसरे राज्यों से आए प्रदर्शनकारी भी नई दिल्ली की सड़कों पर एक-दूसरे से जंतर मंतर का रास्ता पूछते नजर आए। इंटरनेट बंद होने का सीधा असर एप आधारित टैक्सी और बाइक सेवाओं पर भी पड़ा।

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