अनिवार्य प्रश्न। संवाद। नई दिल्ली। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने एचपी इंडिया (HP India) और उसके सोलह रिसेलर्स पर प्रिंटिंग सप्लाईज़ (टोनर, कार्ट्रिज और प्रिंट हार्डवेयर उत्पादों) की बिक्री व आपूर्ति में सांठ-गांठ (एंटी-कॉम्पिटिटिव व्यवहार) करने के आरोप में भारी जुर्माना लगाया है। सीसीआई द्वारा 13 जुलाई 2026 को जारी आदेश के मुताबिक, कॉम्पिटिशन एक्ट, 2002 की धारा 27 के तहत एचपी इंडिया पर लगभग ₹11.98 करोड़ और उसके 16 रिसेलर्स पर संयुक्त रूप से करीब ₹2.30 करोड़ का जुर्माना ठोंका गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस मामले की शुरुआत खुद एचपी इंडिया द्वारा अधिनियम की धारा 46 के तहत दायर एक ‘न्यून दंड’ (lesser penalty) याचिका से हुई थी, जिसमें कंपनी ने रिसेलर्स के साथ सांठ-गांठ की बात स्वीकार की थी। जांच और साक्ष्यों के आधार पर आयोग ने पाया कि एचपी इंडिया ने इस पूरे गठजोड़ में केंद्रीय भूमिका निभाई और उसके टियर-2 रिसेलर्स (जैसे डीडी एंटरप्राइज, एसेंट इन्फॉर्मेशन, केपी एंटरप्राइजेज, ब्रिटेक्स एंटरप्राइजेज आदि) निविदाओं में कवर बिडिंग (फर्जी बोलियां) लगाने के दोषी थे, जो कानूनन बाजार प्रतिस्पर्धा के खिलाफ है। सीसीआई ने इस पूरे सिंडिकेट को तुरंत रोकने का निर्देश जारी करते हुए कंपनियों के साथ-साथ उनके जिम्मेदार अधिकारियों पर भी धारा 48 के तहत आर्थिक दंड लगाया है। Post navigation सहभागी जल बजटिंग से बदलेगी ग्रामीण भारत की सूरत, जल सुरक्षा और सामुदायिक सशक्तिकरण के लिए नीति और तकनीक का अनूठा मेल