अनिवार्य प्रश्न। संवाद। लखनऊ। राष्ट्रपति भवन में आज आयोजित भव्य नागरिक अलंकरण समारोह में भारत की राष्ट्रपति ने उत्तर प्रदेश से संबंधित सात प्रतिष्ठित हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया। कला, खेल, पुरातत्व, चिकित्सा, विज्ञान तथा आयुर्वेद जैसे विविध क्षेत्रों में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल पद्म विभूषण और पद्म श्री से अलंकृत किया गया। भारतीय शास्त्रीय संगीत की प्रख्यात वायलिन वादक डॉ. (श्रीमती) एन. राजम् को कला के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। “सिंगिंग वायलिन” के नाम से विख्यात डॉ. राजम् ने वायलिन पर हिंदुस्तानी गायन शैली को प्रस्तुत करने वाली “गायकी अंग” तकनीक को विकसित कर शास्त्रीय संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और डीन के रूप में उन्होंने दशकों तक संगीत शिक्षा को समृद्ध किया तथा देश-विदेश में भारतीय संगीत की विशिष्ट पहचान स्थापित की।खेल के क्षेत्र में पैरा हाई जंपर श्री प्रवीण कुमार को पद्म श्री से सम्मानित किया गया। विश्व नंबर-1 पैरा हाई जंपर के रूप में पहचान बना चुके प्रवीण कुमार पैरालंपिक पदक जीतने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय पैरा एथलीट हैं। टोक्यो पैरालंपिक में रजत और पेरिस पैरालंपिक 2024 में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने देश का गौरव बढ़ाया। उन्होंने कई एशियाई रिकॉर्ड स्थापित किए हैं तथा दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हैं।पुरातत्व एवं सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रो. बुद्ध रश्मि मणि को पद्म श्री प्रदान किया गया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और राष्ट्रीय संग्रहालय में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए उन्होंने अयोध्या, सारनाथ, कपिलवस्तु और अन्य ऐतिहासिक स्थलों के उत्खनन का नेतृत्व किया। अयोध्या उत्खनन से जुड़े उनके शोध कार्यों को विशेष महत्व प्राप्त हुआ। उन्होंने लगभग 200 पुरातात्विक स्थलों की खोज की तथा भारतीय इतिहास और विरासत अध्ययन को नई दिशा दी।चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए प्रो. (डॉ.) राजेंद्र प्रसाद को पद्म श्री से सम्मानित किया गया। पल्मोनरी मेडिसिन और तपेदिक उन्मूलन के क्षेत्र में उन्हें वैश्विक विशेषज्ञ माना जाता है। उन्होंने केजीएमयू, लखनऊ में भारत का पहला मेडिकल कॉलेज आधारित डीओटीएस केंद्र स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसका मॉडल बाद में देशभर के सैकड़ों मेडिकल कॉलेजों में अपनाया गया। “पल्मोनरी मेडिसिन के जनक” के रूप में विख्यात प्रो. प्रसाद ने टीबी और श्वसन रोगों के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है।कृषि अनुसंधान एवं विज्ञान के क्षेत्र में विशिष्ट उपलब्धियों के लिए डॉ. अशोक कुमार सिंह को पद्म श्री प्रदान किया गया। उन्होंने बासमती धान की उन्नत, जलवायु-अनुकूल तथा रोग प्रतिरोधी किस्मों के विकास में अग्रणी भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में विकसित पूसा बासमती की विभिन्न किस्मों ने भारत के बासमती निर्यात और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की। कृषि अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान ने भारतीय कृषि को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है।संक्रामक रोगों, विशेषकर काला-अजार के उपचार एवं अनुसंधान में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रो. श्याम सुन्दर को पद्म श्री से सम्मानित किया गया। उन्होंने काला-अजार के त्वरित निदान और प्रभावी उपचार पद्धतियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके शोध कार्यों के आधार पर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा नई उपचार पद्धतियों को अपनाया गया। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में उनके नेतृत्व में काला-अजार अनुसंधान को वैश्विक पहचान मिली है।आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. केवल कृष्ण ठकराल को पद्म श्री प्रदान किया गया। उन्होंने ‘क्षार सूत्र’ चिकित्सा पद्धति तथा ‘कर्मवेधन’ जैसी आयुर्वेदिक शल्य प्रक्रियाओं को लोकप्रिय बनाकर आयुर्वेदिक सर्जरी को व्यापक स्वीकार्यता दिलाई। आयुर्वेद शिक्षा, अनुसंधान और प्रशासन के क्षेत्र में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा अनेक शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया।उत्तर प्रदेश की इन सात विभूतियों को प्राप्त यह सम्मान राज्य के लिए गर्व का विषय है। विभिन्न क्षेत्रों में उनकी उपलब्धियां समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं तथा राष्ट्र निर्माण में समर्पित योगदान की उत्कृष्ट मिसाल प्रस्तुत करती हैं। Post navigation अवैध घुसपैठ और जनसांख्यिकीय बदलावों पर नकेल कसने के लिए केंद्र सरकार ने बनाई उच्चस्तरीय समिति