अनिवार्य प्रश्न। संवाद। नई दिल्ली। देश में महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा और कल्याण को बढ़ावा देने की दिशा में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने एक बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने महिलाओं के लिए एक नई समर्पित 24×7 टोल-फ्री हेल्पलाइन सेवा 14490 की शुरुआत की है, जो संकट में फंसी महिलाओं के लिए एक डिजिटल शिकायत पंजीकरण प्रणाली के रूप में कार्य करेगी। यह नया शॉर्ट कोड नंबर आयोग की मौजूदा हेल्पलाइन 7827170170 से जुड़ा हुआ है, जिसे याद रखना बेहद आसान है। इस डिजिटल एक्सेस प्वाइंट के माध्यम से 18 वर्ष से अधिक आयु की कोई भी महिला या लड़की किसी भी समय अपनी शिकायत दर्ज करा सकती है और तत्काल पेशेवर सहायता प्राप्त कर सकती है। इस हेल्पलाइन का संचालन प्रमुख मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों के प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक परामर्शदाताओं द्वारा किया जा रहा है, जो घरेलू हिंसा और अन्य दुर्व्यवहारों से पीड़ित महिलाओं को सुलभ और त्वरित मानसिक संबल प्रदान करेंगे। इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सहयोग से तैयार यह हेल्पलाइन ‘डिजिटल इंडिया’ के सिद्धांतों का एक बेहतरीन उदाहरण है। यह तकनीकी मंच न केवल चौबीसों घंटे शिकायत दर्ज करने की सुविधा देता है, बल्कि महिलाओं को रेफरल सहायता और विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी भी उपलब्ध कराता है। इसके अलावा, आयोग को मिलने वाली इन शिकायतों का समय-समय पर गहन विश्लेषण भी किया जाएगा, जिससे महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों की प्रकृति और प्रवृत्तियों को समझा जा सके। इस विश्लेषण से प्राप्त निष्कर्षों का उपयोग व्यवस्था की कमियों को दूर करने और पुलिस कर्मियों, न्यायिक अधिकारियों तथा प्रशासनिक पदाधिकारियों के संवेदीकरण कार्यक्रमों में केस स्टडी के रूप में किया जाएगा ताकि पूरी प्रणाली को और अधिक जवाबदेह बनाया जा सके। राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) इस हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों की जांच-पड़ताल के लिए एक सख्त और व्यवस्थित निवारण तंत्र का पालन करता है। आयोग के अधिकार क्षेत्र में आने वाले मामलों को तुरंत पंजीकृत कर एक यूनिक केस नंबर दिया जाता है, जिसके बाद पुलिस जांच की निगरानी, वैधानिक प्रावधानों के कार्यान्वयन और मध्यस्थता या काउंसलिंग के जरिए मुद्दों को सुलझाने का प्रयास किया जाता है। गंभीर अपराधों के मामलों में आयोग द्वारा विशेष जांच समितियों का भी गठन किया जाता है। आयोग का मानना है कि इस समर्पित चैनल के माध्यम से महिलाओं और औपचारिक प्रणालियों के बीच का संबंध और मजबूत होगा, जिससे देश भर में महिलाओं की सुरक्षा और संस्थागत प्रक्रियाओं में उनका विश्वास बढ़ेगा। Post navigation DoT ने ऑथराइज़ेशन और लाइसेंस माइग्रेशन के लिए लॉन्च किया ‘डिजिटल बाय डिज़ाइन’ पोर्टल बेंगलुरु के आईटी कंपनी क्रेच में बच्चों से क्रूरता: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लिया स्वतः संज्ञान, कर्नाटक सरकार और पुलिस से मांगी रिपोर्ट