अनिवार्य प्रश्न। संवाद। नई दिल्ली / बेंगलुरु। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कर्नाटक के बेंगलुरु स्थित एक आईटी कंपनी के परिसर में संचालित शिशु देखभाल केंद्र (क्रेच) में मासूम बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार और क्रूरता की कथित घटनाओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्वतः संज्ञान लिया है। यह स्तब्ध कर देने वाला मामला तब प्रकाश में आया, जब चाइल्ड हेल्पलाइन के एक अधिकारी को इस क्रेच से जुड़े कुछ बेहद आपत्तिजनक वीडियो प्राप्त हुए। इन वीडियो में ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के उन छोटे बच्चों के साथ भयानक दुर्व्यवहार होते देखा गया, जिन्हें माता-पिता अपनी शिफ्ट के दौरान भरोसे के साथ वहां छोड़ जाते थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, क्रेच की नैनी (आया) द्वारा मासूमों को प्रताड़ित करने के रोंगटे खड़े कर देने वाले तरीके अपनाए जा रहे थे। वीडियो में कथित तौर पर देखा गया कि नैनी छोटे बच्चों को वॉशिंग मशीन के अंदर डाल रही थी, रोने पर उनके मुंह में टॉयलेट जेट स्प्रे से पानी छिड़क रही थी, और उन्हें चुप कराने के लिए टॉयलेट के भीतर बंद कर देती थी। इसके अलावा, बच्चों को जबरन पश्चिमी शैली के कमोड पर बैठने के लिए मजबूर किया जाता था और आवाज उठाने पर गंभीर अंजाम भुगतने की धमकी दी जाती थी। इस अमानवीय घटना के सामने आने के बाद एहतियात के तौर पर फिलहाल क्रेच को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि समाचारों में दर्शाए गए तथ्य सत्य हैं, तो यह सीधे तौर पर मासूम बच्चों के मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक अत्यंत गंभीर और संवेदनशील मामला है। इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए मानवाधिकार आयोग ने कर्नाटक के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी कर दिया है। आयोग ने राज्य प्रशासन और पुलिस से इस पूरे मामले की गहन जांच करने और दो सप्ताह के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। Post navigation एनसीडब्ल्यू ने लॉन्च की नई महिला हेल्पलाइन ‘14490’, 24 घंटे मिलेगी मुफ्त मनोवैज्ञानिक और कानूनी सहायता व्हाट्सएप के नए फीचर पर केंद्र सरकार का कड़ा रुख: नियमों के उल्लंघन को लेकर थमाया नोटिस