अनिवार्य प्रश्न। संवाद। नई दिल्ली। केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी ने घोषणा की है कि ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ के तहत दिसंबर 2026 तक देश के 75 लाख घरों में रूफटॉप सोलर लगाने का लक्ष्य है। योजना के दो वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि इस योजना ने महज दो साल के भीतर ही 40 लाख से अधिक घरों का आंकड़ा पार कर लिया है। इस अवसर पर योजना को जन-जन तक पहुंचाने और अधिक सुलभ बनाने के लिए ‘पीएम सूर्य घर’ का आधिकारिक लोगो और एक व्हाट्सएप बॉट भी लॉन्च किया गया। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित परिवारों के बीच इस योजना को तेजी से पहुंचाने के लिए यूटिलिटी-लिंक्ड एग्रीगेशन (यूएलए) मॉडल पेश किया गया है। इसके तहत राज्यों में लगभग 30 लाख रूफटॉप सोलर लगाने की योजना पहले ही तैयार की जा चुकी है, जिससे मुख्य रूप से 1 से 3 किलोवाट बिजली खपत वाले परिवारों को सीधा लाभ होगा। इस योजना को जनता का ज़बरदस्त समर्थन मिल रहा है और अब तक 22,750 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी दी जा चुकी है। इसका परिणाम यह है कि देश भर में 17 लाख से अधिक घरों का बिजली बिल अब पूरी तरह शून्य हो गया है। मई 2026 इस योजना का सबसे सफल महीना रहा, जिसमें रिकॉर्ड 3.16 लाख रूफटॉप सोलर लगाए गए और एक ही दिन में 15,000 घर इससे जुड़े। भारत की सौर क्षमता में हो रही अभूतपूर्व वृद्धि का जिक्र करते हुए श्री जोशी ने कहा कि मार्च 2026 तक देश की कुल सौर क्षमता 150 गीगावॉट को पार कर गई है। उन्होंने विकास की गति स्पष्ट करते हुए बताया कि देश को पहले 50 गीगावॉट तक पहुंचने में 96 महीने लगे थे, लेकिन 100 से 150 गीगावॉट तक का सफर सिर्फ 14 महीने में ही तय कर लिया गया। 13 फरवरी 2024 को 75,021 करोड़ रुपये के बजट के साथ शुरू हुई यह योजना अब दुनिया का सबसे बड़ा घरेलू रूफटॉप सोलर कार्यक्रम बन चुकी है, जिसके नेशनल पोर्टल पर 1 करोड़ से अधिक परिवार पंजीकरण करा चुके हैं। इस कार्यक्रम के दौरान काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) की दो महत्वपूर्ण रिपोर्ट भी जारी की गईं। इन रिपोर्टों में इस बात पर जोर दिया गया है कि योजना के निरंतर विस्तार और एक मजबूत इकोसिस्टम बनने से देश में हर साल 3.3 लाख से अधिक नई नौकरियां पैदा होने की संभावना है। मंत्री महोदय ने विश्वास जताया कि भविष्य में बैटरी स्टोरेज की लागत कम होने पर बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को भी इस योजना से जोड़ा जाएगा, जिससे वर्ष 2047 तक भारत का हर घर ऊर्जा के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सकेगा और यह योजना एक बड़ा जन-आंदोलन का रूप ले लेगी। Post navigation दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड में कई लोगों की मौत