SpiceJet fined ₹1 lakh for using ‘dark patterns’ in flight bookings.SpiceJet fined ₹1 lakh for using ‘dark patterns’ in flight bookings.

अनिवार्य प्रश्न । संवाद।

नई दिल्ली। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने स्पाइसजेट लिमिटेड पर अपने फ्लाइट बुकिंग प्लेटफॉर्म पर भ्रामक डिजाइन प्रथाओं, जिन्हें ‘डार्क पैटर्न्स’ कहा जाता है, का उपयोग करने के लिए ₹1,00,000 (एक लाख रुपए) का जुर्माना लगाया है। मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त श्री अनुपम मिश्रा की अध्यक्षता वाले प्राधिकरण ने पाया कि कंपनी उपभोक्ताओं की सहमति के बिना उन्हें भ्रामक तरीकों से अपने प्रोग्राम्स में शामिल कर रही थी। सीसीपीए के निरीक्षण में सामने आया कि बुकिंग के दौरान उपभोक्ताओं को पहले से टिक किए गए (प्री-टिक) चेकबॉक्स के माध्यम से स्वतः ही ‘स्पाइसक्लब लॉयल्टी प्रोग्राम’ में नामांकित किया जा रहा था। इसके अलावा, डिफ़ॉल्ट रूप से पहले से चयनित विकल्पों के कारण उपभोक्ताओं को उनकी बिना किसी सक्रिय सहमति के प्रमोशनल संदेश प्राप्त करने के लिए भी राजी मान लिया जाता था।

जांच और नोटिस के दौरान यह भी पाया गया कि स्पाइसजेट ने अपनी गलती सुधारने के बजाय भविष्य के संदेशों के लिए टेक्स्ट, व्हाट्सऐप और ईमेल के माध्यम से एक अन्य प्री-टिक चेकबॉक्स का उपयोग जारी रखा, जिससे वही भ्रामक प्रथा बस एक अलग रूप में चलती रही। हालांकि प्रक्रिया के दौरान एयरलाइन ने इसे एक तकनीकी त्रुटि (टेक्निकल ग्लिच) बताया, लेकिन प्राधिकरण ने कंपनी को सख्त निर्देश देते हुए सभी आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने और भविष्य में इन्हें स्थायी रूप से लागू रखने का एक औपचारिक आस्थागत पत्र (undertaking) देने के लिए कहा है।

प्राधिकरण ने स्पाइसजेट के बुकिंग प्लेटफॉर्म पर मुख्य रूप से तीन प्रकार के डार्क पैटर्न्स की पहचान की है। पहला ‘मजबूर कार्रवाई’ (Forced Action), जिसके तहत उपभोक्ताओं को जबरन लॉयल्टी प्रोग्राम में नामांकित किया गया; दूसरा ‘इंटरफ़ेस हस्तक्षेप’ (Interface Interference), जहां कंपनी ने अपने फायदे वाले विकल्प को डिफ़ॉल्ट रूप से प्रस्तुत कर उपभोक्ता के निर्णय को प्रभावित किया; और तीसरा ‘छलपूर्ण प्रश्न’ (Trick Question), जिसमें भ्रम पैदा करने वाली नकारात्मक भाषा का प्रयोग कर सहमति ली जा रही थी। सीसीपीए ने स्पष्ट किया कि ऐसी प्रथाएं उपभोक्ता की स्वायत्तता को चोट पहुंचाती हैं और निष्पक्ष व पारदर्शी व्यापार के सिद्धांतों के पूरी तरह खिलाफ हैं।

अंततः, प्राधिकरण ने इस आचरण को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के तहत अनुचित व्यापार प्रथाओं, अनुचित अनुबंधों और भ्रामक प्रस्तुतियों का सीधा उल्लंघन माना है। इसके साथ ही यह कार्रवाई उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 के नियम 4(9) और डार्क पैटर्न्स की रोकथाम व विनियमन हेतु दिशानिर्देश, 2023 के उल्लंघन के तहत की गई है। इस आदेश के जरिए सीसीपीए ने एक बार फिर सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को कड़ा संदेश दिया है कि उपभोक्ता की सहमति हमेशा स्पष्ट, सूचित और स्वतंत्र होनी चाहिए; प्री-टिक चेकबॉक्स या भ्रामक इंटरफ़ेस के जरिए थोपी गई सहमति कानूनन मान्य नहीं होगी।

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